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Pratapgarh: प्रसव पीड़िता को कोरोना का भय दिखाकर अस्पताल से भगाया, रास्ते में बच्ची को दिया जन्म
Wed, 20 May 2020 11:58 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 20 May 2020 11:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दर्द से कराह रही प्रसव पीड़िता को पट्टी तहसील क्षेत्र के डॉक्टरों ने कोरोना का भय दिखाकर अस्पताल से भगा दिया। ससुर उसे साथ लेकर एक से दूसरे अस्पताल में भटकता रहा, लेकिन किसी ने भी भर्ती नहीं किया। महिला ने रास्ते में ही बच्ची को जन्म दे दिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। पीड़ित ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर की है।
कंधई थाना क्षेत्र के सराय भवानी निवासी रामकुमार पुत्र नीमर का कहना है कि उसकी बहू कल्पना को 17 मई को दिन में प्रसव पीड़ा हुई। इसकी सूचना गांव की आशा को दी गई, लेकिन उसने कोई मदद नहीं की। इस पर घरवाले एंबुलेंस बुलाकर उसे बेलखरनाथधाम सीएचसी ले गए। आरोप है कि डाक्टरों ने पीड़िता को भर्ती करने से मना कर दिया। उसे जिला महिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा।
इस पर एंबुलेेंस चालक ने जिला महिला अस्पताल हॉटस्पाट इलाके में होने के कारण बंद होने की बात कहते हुए वहां ले जाने से इनकार कर दिया। इस पर घरवाले उसे पट्टी सीएचसी ले गए। एंबुलेंस चालक ने इसके लिए भी तीन सौ रुपये ले लिए। वह उन्हें पट्टी सीएचसी में छोड़कर चला गया। यहां भी डाक्टरों ने प्रसव पीड़िता को भर्ती नहीं किया।
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कल्पना की हालत बिगड़ती जा रही थी। सीएचसी में मौजूद लोगों की सलाह पर घरवाले उसे पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां उसे देखने के बाद हालत नाजुक बताते हुए डाक्टरों ने ले जाने के लिए कहा। इससे परेशान रामकुमार एक वाहन से बहू को लेकर घर जाने लगा। रास्ते में ही प्रसव पीड़ा से कराह रही कल्पना ने बेटी को जन्म दे दिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।
घर पहुंचने तक कल्पना की हालत बिगड़ चुकी थी। आसपास के लोगों ने डायल 112 को फोनकर इसकी जानकारी दी। इस पर पुलिस मौके पर पहुंची और एबुलेंस बुलाकर कल्पना को सीएचसी बेलखरनाथधाम भेजा। वहां उसे देखते ही डाक्टर भड़क गए और कोरोना का संदिग्ध बताकर सभी को बंद करने की धमकी देने लगे।
इससे परेशान रामकुमार ने बहू को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसका इलाज चल रहा है। इस मामले में बेलखरनाथ सीएचसी अधीक्षक नीरज सिंह का कहना है कि प्रसव पीड़िता के ब्लड कम था। जिसके चलते उसे रेफर किया गया था। बीमारी का डर दिखाकर उसे धमकाने की बात गलत है।
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कंधई थाना क्षेत्र के सराय भवानी निवासी रामकुमार पुत्र नीमर का कहना है कि उसकी बहू कल्पना को 17 मई को दिन में प्रसव पीड़ा हुई। इसकी सूचना गांव की आशा को दी गई, लेकिन उसने कोई मदद नहीं की। इस पर घरवाले एंबुलेंस बुलाकर उसे बेलखरनाथधाम सीएचसी ले गए। आरोप है कि डाक्टरों ने पीड़िता को भर्ती करने से मना कर दिया। उसे जिला महिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा।
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इस पर एंबुलेेंस चालक ने जिला महिला अस्पताल हॉटस्पाट इलाके में होने के कारण बंद होने की बात कहते हुए वहां ले जाने से इनकार कर दिया। इस पर घरवाले उसे पट्टी सीएचसी ले गए। एंबुलेंस चालक ने इसके लिए भी तीन सौ रुपये ले लिए। वह उन्हें पट्टी सीएचसी में छोड़कर चला गया। यहां भी डाक्टरों ने प्रसव पीड़िता को भर्ती नहीं किया।
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कल्पना की हालत बिगड़ती जा रही थी। सीएचसी में मौजूद लोगों की सलाह पर घरवाले उसे पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां उसे देखने के बाद हालत नाजुक बताते हुए डाक्टरों ने ले जाने के लिए कहा। इससे परेशान रामकुमार एक वाहन से बहू को लेकर घर जाने लगा। रास्ते में ही प्रसव पीड़ा से कराह रही कल्पना ने बेटी को जन्म दे दिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।
घर पहुंचने तक कल्पना की हालत बिगड़ चुकी थी। आसपास के लोगों ने डायल 112 को फोनकर इसकी जानकारी दी। इस पर पुलिस मौके पर पहुंची और एबुलेंस बुलाकर कल्पना को सीएचसी बेलखरनाथधाम भेजा। वहां उसे देखते ही डाक्टर भड़क गए और कोरोना का संदिग्ध बताकर सभी को बंद करने की धमकी देने लगे।
इससे परेशान रामकुमार ने बहू को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसका इलाज चल रहा है। इस मामले में बेलखरनाथ सीएचसी अधीक्षक नीरज सिंह का कहना है कि प्रसव पीड़िता के ब्लड कम था। जिसके चलते उसे रेफर किया गया था। बीमारी का डर दिखाकर उसे धमकाने की बात गलत है।