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चकरघिन्नी बन गए हैं 48 गांव के ग्रामीण

Tue, 10 Nov 2020 12:35 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Nov 2020 12:35 AM IST
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People from 48 villages are getting worried
प्रतापगढ़। शासन के आदेश के फेर में जिले के 48 गांवों के लोग चकरघिन्नी बन गए हैं। इन गांवों के लोग न तो नगर पालिका व नगर पंचायतों में शामिल हो सके हैं और न ही गांव में ही हैं। जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उन्हें इस कार्यालय से उस कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। नगर पालिका व नवसृजित नगर पंचायतों से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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जिले में कुल 1255 ग्राम पंचायतें थीं। नगर पालिका परिषद बेल्हा के सीमा विस्तार में 19 गांव आंशिक व पूर्ण रूप से शामिल कर लिए गए। इसके अलावा कई गांव नवसृजित नगर पंचायत कोहड़ौर, सुवंसा, पृथ्वीगंज और रानीगंज में शामिल हो गए। अब जिले में कुल 1207 ग्राम पंचायतें बची हैं। पिछले साल शहरी क्षेत्र में शामिल 48 गांवों में 30 मार्च तक कार्यकाल देखने का जिम्मा विकासखंडों के हवाले कर दिया गया। कोरोना को देखते हुए शासन ने इसे 30 सितंबर तक आगे बढ़ा दिया।
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अभी तक निकायों में शामिल गांवों का ब्यौरा नगर पालिका व नवसृजित नगर पंचायतों में समाहित नहीं किया जा सका। जिसके चलते ग्रामीण से शहरी बने लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक मुसीबत उन परिवार के लोगों को हो रही है, जिनके परिवार में किसी का जन्म हुआ है अथवा किसी की मृत्यु। वह प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पूर्व की तरह ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनका प्रमाण पत्र निर्गत करने में विकासखंड के कर्मचारी हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। चूंकि 30 सितंबर के बाद से शहर में शामिल गांवों के लिए शासन से कोई आदेेश नहीं आया।
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नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी जाने के बाद सभी को निराशा मिल रही है। अभी शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों का नाम साइट पर नहीं आ सका है। जिसके चलते लोगों को जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगाना हो रहा है। इसके बाद भी उनका काम नहीं हो पा रहा। करनपुर निवासी बृजेश के बेटी का जन्म हुआ है। वह नगर पालिका से लेकर सदर विकासखंड का चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी उन्हें कहीं से राहत नहीं मिल सकी। ऐसा ही एक मामला दहिलामऊ निवासी शिवकुमार का है, जो अपनी मां के निधन पर मृत्युप्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
शहर में शामिल 48 गांवों में दस माह से ठप पड़े हैं विकास कार्य
शासन की हरी झंडी मिलने के बाद जिले के 48 गांव के ग्रामीण शहरी बन गए, लेकिन इन गांवों में जनवरी माह से विकास के लिए शासन से कोई धनराशि नहीं मिली है। नगर पालिका व नगर पंचायतों में भी शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों के लिए कोई बजट रिलीज नहीं हुआ। अब शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों का विकास विकासखंड से भी नहीं कराया जा सकेगा। इससे लोगों के सामने तमाम दिक्कतें हो रही हैं। न तो सफाई हो रही है और न ही पेयजल और जलनिकासी के लिए कोई कार्य हो सका।
नगर पालिका सीमा विस्तार व नवसृजित नगर पंचायतों में 40 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। सितंबर माह के बाद शहर में शामिल गांवों के लिए शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं आया। अभी नगर पालिका व नगर पंचायतों की साइट पर शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों को भी नहीं रखा जा सका है। अभिलेखों की उपलब्धता न होने के कारण प्रमाण पत्र निर्गत करने में अड़चन आ रही है।

मुदित सिंह, ईओ नगर पालिका/ नोडल अधिकारी नगर पंचायत
नगर निकाय में शामिल 48 गांवों को लेकर शासन से कोई नया आदेश नहीं आया है। सितंबर के बाद पूरी तरह सभी गांव नगरीय निकाय के अधीन हो गए हैं। शासन द्वारा नगर पालिका व नगर पंचायतों को बराबर समय दिया गया कि वह अपनी पूरी तैयारी कर लें। अब वहां के लोगों को प्रमाण पत्र निर्गत करना नगर निकाय की जिम्मेदारी है। यदि नगर पालिका व नगर पंचायत के अधिकारी कोई सहयोग उनके विभाग से चाहते हैं तो हम तैयार हैं।
रविशंकर द्विवेदी, डीपीआरओ
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