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स्टेशन पर चली झाड़ू, वेंडरों ने लिया सफाई का संकल्प
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Fri, 02 Oct 2015 11:41 PM IST
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भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा और अपना दल समर्थित प्रत्याशियों को पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं मिलने से उनका खेल बिगड़ गया है। इसका फायदा उठाते हुए अन्य प्रत्याशी भी अपने को पार्टी समर्थित बताकर मतदाताओं को गुमराह कर रहे हैं। इससे पार्टी समर्थित प्रत्याशियों द्वारा सफाई देने के बाद भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही है।
पंचायत चुनाव में भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा और अपना दल ने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए होने वाले चुनाव में समर्थित प्रत्याशी उतार रखे हैं। गांव तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राजनैतिक दलों ने प्रत्याशियों को समर्थन तो दिया, मगर उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं दिया है। ऐसी स्थिति में पार्टी से जुड़े कई नेता चुनाव मैदान में कूद गए हैं और वह अपने को पार्टी समर्थित प्रत्याशी बताकर जनता से वोट मांग रहे हैं।
यह किसी एक पार्टी और एक वार्ड के चुनाव में नहीं देखने को मिल रहा है, बल्कि अधिकांश वार्डों के चुनाव के चुनाव में ऐसा ही आलम है। कई प्रत्याशी ऐेसे भी हैं जो पहले किसी पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और चुनाव में दूसरी पार्टी का समर्थन मिलने का दावा कर रहे हैं। अधिकांश प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जिन्होंने पार्टी के रंग में अपना बैनर और पोस्टर भी छपवा रखा है। ऐसा करके मतदाताओं को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी के घोषित समर्थित प्रत्याशी मतदाताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति को साफ करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। राजनैतिक दलों की इस चुनावी रणनीति से घोषित प्रत्याशियों का बना-बनाया खेल बिगड़ जा रहा है।
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पंचायत चुनाव में भाजपा, बसपा, कांग्रेस, सपा और अपना दल ने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए होने वाले चुनाव में समर्थित प्रत्याशी उतार रखे हैं। गांव तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राजनैतिक दलों ने प्रत्याशियों को समर्थन तो दिया, मगर उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं दिया है। ऐसी स्थिति में पार्टी से जुड़े कई नेता चुनाव मैदान में कूद गए हैं और वह अपने को पार्टी समर्थित प्रत्याशी बताकर जनता से वोट मांग रहे हैं।
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यह किसी एक पार्टी और एक वार्ड के चुनाव में नहीं देखने को मिल रहा है, बल्कि अधिकांश वार्डों के चुनाव के चुनाव में ऐसा ही आलम है। कई प्रत्याशी ऐेसे भी हैं जो पहले किसी पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और चुनाव में दूसरी पार्टी का समर्थन मिलने का दावा कर रहे हैं। अधिकांश प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जिन्होंने पार्टी के रंग में अपना बैनर और पोस्टर भी छपवा रखा है। ऐसा करके मतदाताओं को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी के घोषित समर्थित प्रत्याशी मतदाताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति को साफ करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। राजनैतिक दलों की इस चुनावी रणनीति से घोषित प्रत्याशियों का बना-बनाया खेल बिगड़ जा रहा है।
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