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मोतियाबिंद आपरेशन के लिए लगाना होगा पड़ोसी जनपद का चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 04 Jul 2016 12:25 AM IST
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अांखें
जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ सीएमओ बनकर गैरजनपद चले गए। उनके अलावा जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी पर एक भी आंख के सर्जन की तैनाती नहीं है। ऐसे में बेल्हावासियों को आंख में दिक्कतें आने पर प्राइवेट अस्पताल या फिर पड़ोसी जनपद अमेठी के साथ इलाहाबाद तक चक्कर लगाना पड़ेगा।
जिला अस्पताल में नेत्र सर्जन के पद पर डा. एसके तिवारी तैनात थे। जनपद में वह एकमात्र नेत्र सर्जन थे।
जनपदभर के नेत्र के मरीजों की जांच व मोतियाबिंद के मरीजों की जांच और आपरेशन का जिम्मा डा. एसके तिवारी के ऊपर था। बीते दिनों विभाग ने उन्हें सीएमओ बनाकर आजमगढ़ भेज दिया। उनके गैर जनपद जाने से अब मोतियाबिंद का आपरेशन करने वाला जनपद के सरकारी अस्पतालों में कोई चिकित्सक नहीं रह गया है। ऐसे में बेल्हा के नेत्र पीड़ित लोगों को इलाज कराने के लिए इलाहाबाद या फिर मुंशीगंज अमेठी तक चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे मरीज परेशान हो गए हैं। अभी तक उनके स्थान पर किसी चिकित्सक की तैनाती की कोई चर्चा नहीं हैं। जबकि बरसात के मौसम में मोतियाबिंद का ज्यादा आपरेशान होता है। मौसम ठंडा रहने के कारण मरीज को दिक्कतें कम होती हैं। लेकिन इस बार बरसात तो आई मगर चिकित्सक ही नहीं हैं कि मोतियाबिंद का आपरेशन हो सके।
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जिला अस्पताल में नेत्र सर्जन के पद पर डा. एसके तिवारी तैनात थे। जनपद में वह एकमात्र नेत्र सर्जन थे।
जनपदभर के नेत्र के मरीजों की जांच व मोतियाबिंद के मरीजों की जांच और आपरेशन का जिम्मा डा. एसके तिवारी के ऊपर था। बीते दिनों विभाग ने उन्हें सीएमओ बनाकर आजमगढ़ भेज दिया। उनके गैर जनपद जाने से अब मोतियाबिंद का आपरेशन करने वाला जनपद के सरकारी अस्पतालों में कोई चिकित्सक नहीं रह गया है। ऐसे में बेल्हा के नेत्र पीड़ित लोगों को इलाज कराने के लिए इलाहाबाद या फिर मुंशीगंज अमेठी तक चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे मरीज परेशान हो गए हैं। अभी तक उनके स्थान पर किसी चिकित्सक की तैनाती की कोई चर्चा नहीं हैं। जबकि बरसात के मौसम में मोतियाबिंद का ज्यादा आपरेशान होता है। मौसम ठंडा रहने के कारण मरीज को दिक्कतें कम होती हैं। लेकिन इस बार बरसात तो आई मगर चिकित्सक ही नहीं हैं कि मोतियाबिंद का आपरेशन हो सके।
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