{"_id":"5750776b4f1c1b6a79109795","slug":"model-school-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमीशन की भेंट चढ़ गया कूराडीह मॉडल स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमीशन की भेंट चढ़ गया कूराडीह मॉडल स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 02 Jun 2016 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मॉडल स्कूलों के निर्माण में जबरदस्त कमीशनबाजी हुई है। जिले की निर्माण इकाइयों को भवन बनाने का जिम्मा न सौंपकर गैर जनपद की इकाइयों को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आश्चर्य की बात तो यह रही कि अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष निर्माण कार्य पूरा नहीं होेने के बावजूद अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया है। शिवगढ़ विकास खंड में के बच्चों को आवासीय शिक्षा देने के लिए कूराडीह में मॉडल स्कूल का निर्माण किया जा रहा है। तीन करोड़ दो लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले भवन के निर्माण का जिम्मा आवास विकास परिषद को सौंपा गया है। मई 2013 में प्रारंभ हुए भवन को अगस्त 2015 तक निर्मित होने का समय दिया गया था।
मगर, आलम यह है कि अभी तक भवन के निर्माण में आधे से अधिक भाग का निर्माण नहीं हुआ है। दो मंजिला बनने वाले भवन में नीचे का हिस्सा तैयार हो गया है, मगर ऊपरी भाग में कच्छप गति से काम हो रहा है। समय से भवन के तैयार नहीं होने के कारण इन स्कूलों में पठन-पाठन की रणनीति नहीं तैयार हो पा रही है। माडल स्कूलों के निर्माण में हो रही देरी के लिए काफी हद तक शासन में बैठे लोग जिम्मेदार हैं। दरअसल में भवन निर्माण के लिए शासन स्तर पर ही टेंडर हुआ। अफसरों ने कमीशन सेट कर कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्य का जिम्मा तो सौंप दिया। मगर, इसके बाद उन पर कोई नियंत्रण नहीं रखा। इसके चलते कार्यदायी संस्था पूरी तरह मनमानी बरत रही है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता में भी खेल किया जा रहा है।
विज्ञापन
मगर, आलम यह है कि अभी तक भवन के निर्माण में आधे से अधिक भाग का निर्माण नहीं हुआ है। दो मंजिला बनने वाले भवन में नीचे का हिस्सा तैयार हो गया है, मगर ऊपरी भाग में कच्छप गति से काम हो रहा है। समय से भवन के तैयार नहीं होने के कारण इन स्कूलों में पठन-पाठन की रणनीति नहीं तैयार हो पा रही है। माडल स्कूलों के निर्माण में हो रही देरी के लिए काफी हद तक शासन में बैठे लोग जिम्मेदार हैं। दरअसल में भवन निर्माण के लिए शासन स्तर पर ही टेंडर हुआ। अफसरों ने कमीशन सेट कर कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्य का जिम्मा तो सौंप दिया। मगर, इसके बाद उन पर कोई नियंत्रण नहीं रखा। इसके चलते कार्यदायी संस्था पूरी तरह मनमानी बरत रही है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता में भी खेल किया जा रहा है।
विज्ञापन