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मॉडल और आदर्श बूथ नहीं, बल्कि सखी बूथ होंगे आकर्षण का केंद्र
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Model and not ideal booth, this time Sakhi booth will be the center of attraction
विधानसभा चुनाव में इस वर्ष मॉडल और आदर्श बूथ नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि इनके स्थान पर सखी बूथ बनेंगे। विधानसभा के लिए सखी बूथ आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इन बूथों पर सिर्फ महिला कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इस बार सात विधानसभा क्षेत्रों के लिए 35 सखी बूथों का निर्माण कराया जाएगा।
एक विधानसभा में कम से कम पांच बूथों का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को ड्यूटी करने में हो रही असुविधा को देखते हुए अधिकतर सखी बूथों को टाउन एरिया, नगरपालिका और तहसीलों के बाजारों में बनाने का निर्णय लिया गया है। सखी बूथों पर महिला कर्मचारियों की तैनाती होने के साथ ही सुरक्षा में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। हालांकि इन बूथों पर भी स्टेटिक मजिस्ट्रेट और माइक्रो ऑब्जर्वर की भी तैनाती होगी।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्टेटिक मजिस्ट्रेट और माइक्रो आब्जर्वर के रूप में महिलाओं को ही तैनात किया जाए। अब यह देखना है कि जिला प्रशासन का प्रयास कितना सफल होता है। सखी बूथों पर तैनात महिला कर्मचारी अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए परेशान हैं, मगर प्रशासनिक अफसर सखी बूथ पर तैनात महिला कर्मचारियों की ड्यूटी काटने के लिए तैयार नहीं हैं।
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जबकि अन्य बूथों पर मतदान अधिकारी प्रथम और द्वितीय के रूप में तैनात महिला कर्मचारियों और शिक्षकों को उनकी व्यक्तिगत परेशानी को देखते हुए राहत मिल रही है। सखी बूथों को आकर्षक ढंग से सजाने और वहां की व्यवस्था को देखने के लिए बीएलओ और लेखपालों को लगाया गया है। इस बार के चुनाव में यही सखी बूथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
चुनाव आयोग ने इस बार महिला मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए सखी बूथ बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विधानसभा में पांच-पांच बूथ बनाए जा रहे हैं। महिलाओं की सुविधा को देखते हुए सखी बूथों का निर्माण बाजार या शहर में कराया जा रहा है। सुनील शुक्ला, उप जिला निर्वाचन अधिकारी
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एक विधानसभा में कम से कम पांच बूथों का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को ड्यूटी करने में हो रही असुविधा को देखते हुए अधिकतर सखी बूथों को टाउन एरिया, नगरपालिका और तहसीलों के बाजारों में बनाने का निर्णय लिया गया है। सखी बूथों पर महिला कर्मचारियों की तैनाती होने के साथ ही सुरक्षा में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। हालांकि इन बूथों पर भी स्टेटिक मजिस्ट्रेट और माइक्रो ऑब्जर्वर की भी तैनाती होगी।
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जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्टेटिक मजिस्ट्रेट और माइक्रो आब्जर्वर के रूप में महिलाओं को ही तैनात किया जाए। अब यह देखना है कि जिला प्रशासन का प्रयास कितना सफल होता है। सखी बूथों पर तैनात महिला कर्मचारी अपनी ड्यूटी कटवाने के लिए परेशान हैं, मगर प्रशासनिक अफसर सखी बूथ पर तैनात महिला कर्मचारियों की ड्यूटी काटने के लिए तैयार नहीं हैं।
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जबकि अन्य बूथों पर मतदान अधिकारी प्रथम और द्वितीय के रूप में तैनात महिला कर्मचारियों और शिक्षकों को उनकी व्यक्तिगत परेशानी को देखते हुए राहत मिल रही है। सखी बूथों को आकर्षक ढंग से सजाने और वहां की व्यवस्था को देखने के लिए बीएलओ और लेखपालों को लगाया गया है। इस बार के चुनाव में यही सखी बूथ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
चुनाव आयोग ने इस बार महिला मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए सखी बूथ बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विधानसभा में पांच-पांच बूथ बनाए जा रहे हैं। महिलाओं की सुविधा को देखते हुए सखी बूथों का निर्माण बाजार या शहर में कराया जा रहा है। सुनील शुक्ला, उप जिला निर्वाचन अधिकारी