फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   misconduct with kidney patients

गुर्दें के मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़

Mon, 18 Nov 2019 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2019 12:42 AM IST
विज्ञापन
misconduct with kidney patients
गुर्दे के मरीजों की जान से खिलवाड़
विज्ञापन

दो टेक्नीशियन के भरोसे मरीजों की हो रही है डायलिसिस
प्रतापगढ़। जिला अस्पताल के डायलिसिस विभाग में गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां चिकित्सक की भले ही तैनाती विभाग ने कर दी है, मगर अब उन्होंने आना बंद कर दिया है। छह के बजाए दो टेक्नीशियन के भरोसे गुर्दा रोगियों की डायलिसिस की जा रही है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें आननफानन में इमरजेंसी में भर्ती कराया जाता है।
हेरिटेज हॉस्पिटल्स लिमिटेड वाराणसी ने जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर खोल रखा है। पीपीपी मोड के तहत गुर्दा रोगियों की सप्ताह में तीन बार मुफ्त डायलिसिस की जाती है। विभाग की मानें तो एक मरीज की डायलिसिस पर शासन की ओर से कंपनी को लगभग एक हजार रुपये मिलते हैं। कंपनी ने जो अपना मानक तैयार कर रखा है उसमें छह बेड हैं। इसके लिए छह टेक्नीशियन, एक डॉक्टर, काउंसलर और एक ऑपरेटर होना चाहिए। जबकि जिला अस्पताल परिसर में संचालित डायलिसिस सेंटर पर न तो कोई चिकित्सक है और न ही काउंसलर। दो टेक्नीशियन और उनके दो सहायक के भरोसे यहां आने वाले मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। कभी-कभार डायलिसिस के दौरान मरीजों की हालत बिगड़ने लगती है तो उन्हें आननफानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इससे जिला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान मरीजों की जान का भी खतरा बना रहता है। मगर जिम्मेदार अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर मनोज खत्री डायलिसिस कक्ष में राउंड लेने चले जाते हैं। किसी दिन तो एक टेक्नीशियन यदि अवकाश पर चला जाता है तो छह मरीजों का इलाज महज एक टेक्नीशियन अपने सहायक के साथ करता है।
विज्ञापन

डायलिसिस के दौरान दो लोगों की बिगड़ चुकी है हालत
जिला अस्पताल में स्थित डायलिसिस सेंटर पर बीते चार माह में लगभग एक हजार लोगों की डायलिसिस हो चुकी है। इनमे से दो लोगों की डायलिसिस के दौरान हालत बिगड़ गई थी। आनन-फानन में टेक्नीशियन द्वारा दोनों मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। मगर इस ओर न तो सीएमएस का ध्यान जा रहा है और न ही सीएमओ का।
विज्ञापन
विज्ञापन

जब तक डॉक्टर की व्यवस्था नहीं है, उस समय तक जिला अस्पताल के एक डॉक्टर की ड्यूटी लगाई गई है। संस्था को पत्र लिखकर डॉक्टर और टेक्नीशियन बढ़ाने की अपेक्षा की गई है। यदि ऐसा नहीं होता तो शासन को पत्र भेजा जाएगा।
डॉ. इम्तियाज , सीएमएस, जिला अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed