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ओलावृष्टि और बरसात से क्रय केंद्रों पर सन्नाटा
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Thu, 23 Apr 2015 12:01 AM IST
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ओलावृष्टि और बरसात से तबाह हुए किसानों के पास बेचने के लिए तोला भर गेहूं नहीं है। अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनकी सालभर की गृहस्थी चलना मुश्किल है। यही वजह है कि जिले के 83 क्रय केंद्रों पर अभी तक बोहनी नहीं हुई है। किसानों कीउपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक अप्रैल से 14.50 रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं खरीदने के जिले में 83 केंद्र खुले हुए हैं। किसानों का गेहूं खरीदने के लिए पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, खाद्य विभाग सहित अनेक कार्यदायी संस्थाओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गेहूं क्रय केंद्रों का आलम यह है कि किसी भी क्रय केंद्र पर एक दाना गेहूं की खरीदारी नहीं हुई है।
सामान्य किसानों की बात तो दूर रही, बड़े काश्तकारों की फसल पूरी तरह चौपट होने से किसी के पास बेचने के लिए है ही नहीं। अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनके खेत में जो भी गेहूं का दाना भी मिला, इससे उनके वर्ष भर की गृहस्थी पर संकट खड़ा हो गया है। इससे चिलचिलाती धूप में कर्मचारी केंद्र खोलकर बैठे तो हैं, मगर अभी तक उनके हाथ निराशा ही लगी है। जिला प्रशासन को 45 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला हुआ था। लक्ष्य अधिक होने के कारण क्रय केंद्रों की संख्या भी इस बार बढ़ा दी गई थी। मगर दुर्भाग्य ही रहा कि ओलावृष्टि और बरसात ने अन्नदाताओं का दाना ही छीन लिया। जिला विपणन अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि क्रय केंद्र खुले हुए हैं, मगर कोई भी किसान गेहूं बेचने नहीं आ रहा है।
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सामान्य किसानों की बात तो दूर रही, बड़े काश्तकारों की फसल पूरी तरह चौपट होने से किसी के पास बेचने के लिए है ही नहीं। अधिकांश किसान ऐसे हैं जिनके खेत में जो भी गेहूं का दाना भी मिला, इससे उनके वर्ष भर की गृहस्थी पर संकट खड़ा हो गया है। इससे चिलचिलाती धूप में कर्मचारी केंद्र खोलकर बैठे तो हैं, मगर अभी तक उनके हाथ निराशा ही लगी है। जिला प्रशासन को 45 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला हुआ था। लक्ष्य अधिक होने के कारण क्रय केंद्रों की संख्या भी इस बार बढ़ा दी गई थी। मगर दुर्भाग्य ही रहा कि ओलावृष्टि और बरसात ने अन्नदाताओं का दाना ही छीन लिया। जिला विपणन अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि क्रय केंद्र खुले हुए हैं, मगर कोई भी किसान गेहूं बेचने नहीं आ रहा है।
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