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लागत की बात दूर, खाद और बीज भर का नहीं मिला चेक
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:32 PM IST
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आलू और सरसों की फसल नष्ट होने पर किसानों को जो राहत का चेक मिला है, वह सिर्फ ऊंट के मुंह में जारी साबित हो रहा है। किसानों की मानें तो उन्हें विश्वास था कि जितना नुकसान हुआ है उसका आधा तो मिल ही जाएगा। मगर ऐसा नहीं हो सका। कुंडा इलाके के त्रिलोकपुर निवासी रामशंकर को 1880, ताज्जुबअली 6400, छोटेलाल 1485, सज्जनअली 5400, लालगंज इलाके के पाती गांव निवासी मो. मतीम 4454, हरिहरपुर निवासी हीरालाल 4554 रुपये का चेक जब प्रभारी मंत्री के हाथों मिला, तो वह अंकित धनराशि को निहारते रहे।
छोटेलाल कम पढ़े-लिखे होने के कारण बगल बैठे किसान से पूछते रहे कि कितनी धनराशि का चेक है। ताजुब्बअली और हीरालाल की माने तो उनकी आलू और सरसों की पूरी फसल तहस-नहस हो गई, मगर उन्हें मात्र 6400 रुपये का चेक दिया गया। उन्होंने बताया कि डीएपी और यूरिया इतनी महंगी है कि इस रुपये से बीज और खाद की भी भरपाई नहीं होगी। अधिकांश किसानों की यह भी शिकायत थी कि लेखपालों ने घर बैठे उनके नुकसान की क्षति का आंकलन कर लिया है। इसलिए उन्हें जिनती धनराशि मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं दी गई है। तहसीलदारों तक यह शिकायत पहुंचने पर और धनराशि देने का आश्वासन देकर मामला शांत किया।
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छोटेलाल कम पढ़े-लिखे होने के कारण बगल बैठे किसान से पूछते रहे कि कितनी धनराशि का चेक है। ताजुब्बअली और हीरालाल की माने तो उनकी आलू और सरसों की पूरी फसल तहस-नहस हो गई, मगर उन्हें मात्र 6400 रुपये का चेक दिया गया। उन्होंने बताया कि डीएपी और यूरिया इतनी महंगी है कि इस रुपये से बीज और खाद की भी भरपाई नहीं होगी। अधिकांश किसानों की यह भी शिकायत थी कि लेखपालों ने घर बैठे उनके नुकसान की क्षति का आंकलन कर लिया है। इसलिए उन्हें जिनती धनराशि मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं दी गई है। तहसीलदारों तक यह शिकायत पहुंचने पर और धनराशि देने का आश्वासन देकर मामला शांत किया।
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