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जीवन में खुशियां भरने के लिए पूजी गईं मां कालरात्रि
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:58 PM IST
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प्रतापगढ़।
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रोग, शोक मिटाकर जीवन में खुशियां भरने वाली मां कालरात्रि के दर्शन-पूजन को लेकर नवरात्र के सातवें दिन देवीधामों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। कोई देवी मंत्रों के बीच चरणों में शीष झुकाता, तो कोई घंटों मां के ध्यान में डूबा रहा। श्रद्धाभाव से पूजन-अर्चन कर भक्तों ने मातारानी के चरणों में मत्था टेक मन्नतें मांगीं। देवीधामों में सुबह से लेकर देरशाम तक भक्तों का रेला लगा रहा।
मां दुर्गा का सातवां रूप कालरात्रि के नाम से विख्यात है। श्रीदुर्गा सप्तशती में मां के इस रूप का महात्म्य बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे भाव से पूजन पर मां भक्तों को हर बला से बचाती हैं। रोग, दोष, अभिचारिक कर्म सहित तमाम दुष्प्रभावों से बचाकर मां भयमुक्त कर हर मन्नतें पूरी करती हैं। नवरात्र के महापर्व में मंगलवार को मां कालरात्रि के दर्शन-पूजन को लेकर देवीधामों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रों के बीच मां बेल्हादेवी और चंद्रिका देवी का विधि-विधान से पूजन हुआ। सुबह चार बजते ही घंटे-घडिय़ाल की आवाज के बीच मां की महाआरती हुई। फिर क्या था, भक्तों की कतार में बच्चे, बूढ़े, युवा सभी थे। सुबह से ही शहरी भीड़ के साथ दूरदराज के भक्तों का आने का सिलसिला चलता रहा।
मां चंद्रिकाधाम में मंगलवार को लगने वाले मेले में भीड़ का आलम यह था कि मुख्यमार्ग तक भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई थी। महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइन होने के कारण गर्भ गृह में पहुंचने के लिए लोग धक्का-मुक्की करते रहे। महिला और पुरुष पुलिस की तैनाती होने के बाद भी भीड़ को नियंत्रित करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी तरह रानीगंज तहसील क्षेत्र स्थित मंा बाराही धाम में आस्था का रेला दिखा। सुबह से मां बाराही की जय-जयकार शुरू हो गई। मुख्यद्वार से लेकर मंदिर परिसर से ही भक्तों की कतार लगी रही। भोर से शुरू हुए दर्शन पूजन का क्रम देरशाम तक चलता रहा।
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हर ओर गूंज रहे देवीगीत
नवरात्र के अंतिम चरण में भक्तों की आस्था हिलारे ले रही है। वेदी व कलश पूजन मेें प्रयुक्त जौ के बीज अंकुरित होकर बाहर आ गए हैं, जिससे वेदी की शोभा देखते ही बन रही है। देवीधामों, पूजन पंडालों, मंदिरों व घरों में देवी मां के गुणगान में हर कोई जुटा हुआ है। चारों पहर मां के गीत, पचरे व मंत्र से पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा है।
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मां दुर्गा का सातवां रूप कालरात्रि के नाम से विख्यात है। श्रीदुर्गा सप्तशती में मां के इस रूप का महात्म्य बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे भाव से पूजन पर मां भक्तों को हर बला से बचाती हैं। रोग, दोष, अभिचारिक कर्म सहित तमाम दुष्प्रभावों से बचाकर मां भयमुक्त कर हर मन्नतें पूरी करती हैं। नवरात्र के महापर्व में मंगलवार को मां कालरात्रि के दर्शन-पूजन को लेकर देवीधामों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। वैदिक मंत्रों के बीच मां बेल्हादेवी और चंद्रिका देवी का विधि-विधान से पूजन हुआ। सुबह चार बजते ही घंटे-घडिय़ाल की आवाज के बीच मां की महाआरती हुई। फिर क्या था, भक्तों की कतार में बच्चे, बूढ़े, युवा सभी थे। सुबह से ही शहरी भीड़ के साथ दूरदराज के भक्तों का आने का सिलसिला चलता रहा।
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मां चंद्रिकाधाम में मंगलवार को लगने वाले मेले में भीड़ का आलम यह था कि मुख्यमार्ग तक भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई थी। महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइन होने के कारण गर्भ गृह में पहुंचने के लिए लोग धक्का-मुक्की करते रहे। महिला और पुरुष पुलिस की तैनाती होने के बाद भी भीड़ को नियंत्रित करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी तरह रानीगंज तहसील क्षेत्र स्थित मंा बाराही धाम में आस्था का रेला दिखा। सुबह से मां बाराही की जय-जयकार शुरू हो गई। मुख्यद्वार से लेकर मंदिर परिसर से ही भक्तों की कतार लगी रही। भोर से शुरू हुए दर्शन पूजन का क्रम देरशाम तक चलता रहा।
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हर ओर गूंज रहे देवीगीत
नवरात्र के अंतिम चरण में भक्तों की आस्था हिलारे ले रही है। वेदी व कलश पूजन मेें प्रयुक्त जौ के बीज अंकुरित होकर बाहर आ गए हैं, जिससे वेदी की शोभा देखते ही बन रही है। देवीधामों, पूजन पंडालों, मंदिरों व घरों में देवी मां के गुणगान में हर कोई जुटा हुआ है। चारों पहर मां के गीत, पचरे व मंत्र से पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा है।