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चाय बेचने वाले के बेटे को आईआईटी में सफलता, अब फीस की दरकार
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 25 Jun 2015 11:28 PM IST
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गुदड़ी के एक और लाल ने कमाल किया है। जिले के पट्टी तहसील क्षेत्र के विनैका गांव निवासी तरुण ने मेहनत के बल पर आईआईटी में सफलता हासिल की है। सामान्य कैटेगरी में उसे 2929वीं रैंक मिली है। निहायत गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले तरुण के पिता दाउदपुर बाजार में गुमटी में चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अब परिवार बेटे की पढ़ाई की फीस को लेकर परेशान है। उन्हें भी मुख्यमंत्री से मदद की दरकार है।
विनैका गांव निवासी तरुण कुमार यादव ने इंटर तक की परीक्षा स्थानीय स्तर पर ही हासिल की। तीन माह पूर्व उसके पिता बजरंग बहादुर यादव ने कर्ज लेकर किसी तरह उसका दाखिला इलाहाबाद की एक कोचिंग में कराया। होनहार बेटे ने पिता का कर्ज उतारने में पूरा दम लगा दिया। उसने आईआईटी में सामान्य कैटगरी में 2929वीं रैंक हासिल कर ली। उसकी सफलता से परिवार खुशी से फूला नहीं समा रहा है। इसके पहले तरुण पढ़ाई के साथ दुकान में पिता का हाथ भी बंटाया करता था। अब परिवार के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। घरवाले बेटे की आईआईटी की फीस भरने को लेकर परेशान हैं। पिता की चाय की दुकान से इतनी ही आमदनी हो पाती है कि किसी तरह गुजारा हो जाए। अब परिवारवालों को मुख्यमंत्री से मदद की उम्मीद है।
सामान्य किसान परिवार का होने के बाद भी तरुण ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे और हौसले बुलंद हों तो बड़ी से बड़ी मंजिल पाई जा सकती है। दाउदपुर के आचार्य नरेन्द्र देव इंटर कालेज विनैका से उसने हाईस्कूल व श्रीगोविंद इंटर मीडिएट कालेज बरहटा मछलीशहर जौनपुर से उसने इंटर की परीक्षा 2013 में उत्तीर्ण की थी। तरुण ने बताया कि कुछ हासिल करने के लिए आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है। निरंतर अभ्यास से सफलता मिलनी तय है। उसने अपनी सफलता का श्रेय मां-बाप व चाचा गिरजाशंकर यादव को दिया है। पढ़ाई के पीछे उसकी लगन को देखकर आर्थिक मदद के साथ ही वह उसका हौसला बढ़ाया करते थे।
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विनैका गांव निवासी तरुण कुमार यादव ने इंटर तक की परीक्षा स्थानीय स्तर पर ही हासिल की। तीन माह पूर्व उसके पिता बजरंग बहादुर यादव ने कर्ज लेकर किसी तरह उसका दाखिला इलाहाबाद की एक कोचिंग में कराया। होनहार बेटे ने पिता का कर्ज उतारने में पूरा दम लगा दिया। उसने आईआईटी में सामान्य कैटगरी में 2929वीं रैंक हासिल कर ली। उसकी सफलता से परिवार खुशी से फूला नहीं समा रहा है। इसके पहले तरुण पढ़ाई के साथ दुकान में पिता का हाथ भी बंटाया करता था। अब परिवार के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। घरवाले बेटे की आईआईटी की फीस भरने को लेकर परेशान हैं। पिता की चाय की दुकान से इतनी ही आमदनी हो पाती है कि किसी तरह गुजारा हो जाए। अब परिवारवालों को मुख्यमंत्री से मदद की उम्मीद है।
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सामान्य किसान परिवार का होने के बाद भी तरुण ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे और हौसले बुलंद हों तो बड़ी से बड़ी मंजिल पाई जा सकती है। दाउदपुर के आचार्य नरेन्द्र देव इंटर कालेज विनैका से उसने हाईस्कूल व श्रीगोविंद इंटर मीडिएट कालेज बरहटा मछलीशहर जौनपुर से उसने इंटर की परीक्षा 2013 में उत्तीर्ण की थी। तरुण ने बताया कि कुछ हासिल करने के लिए आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है। निरंतर अभ्यास से सफलता मिलनी तय है। उसने अपनी सफलता का श्रेय मां-बाप व चाचा गिरजाशंकर यादव को दिया है। पढ़ाई के पीछे उसकी लगन को देखकर आर्थिक मदद के साथ ही वह उसका हौसला बढ़ाया करते थे।
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