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इधर जूझते रहे किसान, उधर 2.5 करोड़ की बाजार में बिक गई डीएपी

Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 11:55 PM IST
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Here farmers are worried about fertilizer, there the warehouse in-charge sold DAP of 2.5 crores
fertilizer
जिले में इन दिनों डीएपी की जबरदस्त किल्लत है। समितियां खाली पड़ी हैं। डीएपी आने की सूचना मिलते ही खाद लेने के लिए मारामारी मच जा रही है। उधर, जिम्मेदारों ने 2.5 करोड़ रुपये की डीएपी फर्जीवाड़ा निजी दुकानदारों को बेच दी। यह खेल केवल तीन दिनों के भीतर हुआ है। जांच में इस बात का खुलासा होने पर अधिकारी भी दांतों तले अंगुली दबा रहे हैं। जबकि किसानों को खाद की दिक्कत न हो, इसके लिए 3500 मैट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई गई थी।
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जिले के किसान गेहूं की बुवाई करने के लिए डीएपी लेने को समितियों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकांश समितियों में ताले लटक रहे हैं। जहां खाद मिल रही थी, वहां लोगों को धक्के खाने पड़ रहे थे। डीएपी की किल्लत से जूझ रहे किसानों की समस्या को देखते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे रहे। मामला सुर्खियों में आने के बाद शासन से मामले की छानबीन होने लगी। जिसके बाद अधिकारियों की नींद खुली और डीएपी की उपलब्धता की खोजबीन शुरू कराई गई।
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सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अरविंद प्रकाश के अनुसार, रबी अभियान वर्ष 2021-22 के लिए पीसीएफ के गोदामों में भंडारित 3500 मैट्रिक टन डीएपी जिलाधिकारी के स्तर से सहकारी समितियों/संस्थाओं में वितरित करने के लिए आवंटित की गई थी। जिसमें से आठ नवंबर को कुल 2455 मीट्रिक टन डीएपी का प्रेषण पीसीएफ द्वारा किया गया। 9 से 11 नवंबर के बीच 78 समितियों को 1038.50 मीट्रिक टन डीएपी पीसीएफ द्वारा भेजी गई, मगर खाद समितियों में नहीं पहुंची।
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प्रकरण संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने जांच कराई। मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने पीसीएफ के जिला प्रबंधक से पूछताछ की। जिला प्रबंधक धनंजय तिवारी ने बताया कि पीसीएफ के समस्त गोदामों का प्रभार भंडार नायक संतोष कुमार के पास है। सभी गोदामों से वही समितियों को खाद भेजता है।

जांच में यह सामने आया कि भंडार नायक संतोष कुमार ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए 1055 मैट्रिक टन डीएपी निजी दुकानदारों को बेच दी। गायब डीएपी की कीमत 2 करोड़ 53 लाख रुपये है। हैरत की बात यह है कि मामला सामने आने के बाद भी कई दिनों तक जिम्मेदार अधिकारी टालमटोल करते रहे।
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