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डेंगू पर काबू पाने में फेल हुआ स्वास्थ्य महकमा
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स्वास्थ्य महकमा डेंगू पर काबू पाने में फेल हो गया है। विभाग के इस बीमारी से काबू पाने और बचाव के सारे इंतजाम फेल हो गए हैं। आलम यह है कि हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू के 72 मरीज सामने आ चुके हैं। शासन की ओर से दवा छिड़काव और सावधानी बरतने और प्रचार-प्रसार के लिए दावे तो बहुत किए जा रहे हैं, मगर हकीकत में कुछ नहीं हो रहा है।
जिले में डेंगू के अब तक 72 मरीज सामने आ चुके हैं। इससे दोगुना अधिक मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होकर अपना इलाज करवा रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने वाले लोगों को डेंगू का मरीज मानने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त से अब तक 72 मरीज डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इन मरीजों का इलाज प्रयागराज के एसआरएन और लखनऊ के पीजीआई में हुआ।
यहां जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद चिकित्सकों की ओर से सीएमओ को संदेश पत्र भेजकर मरीजों के गांवों में दवा का छिड़काव कराने को कहा जाता है। कागज पर दवा का छिड़काव भी होता है, मगर हकीकत में जांच रिपोर्ट लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर चुप्पी साध लेते हैं। जनपद में चार माह के भीतर 72 डेंगू के मरीजों के मिलने से आम जनमानस सहमा हुआ है।
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इसके बाद भी दवा का छिड़काव और बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। विभाग इसे लेकर संजीदा नहीं है। पखवारे भर से मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
तराई वाले इलाकों में ज्यादा मिल रहे डेंगू के मरीज
स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि 72 मरीजों में ज्यादातर लोग तराई वाले इलाकों के हैं। सबसे ज्यादा डेंगू के मरीज कुंडा में मिले हैं। इसके अलावा पट्टी, लालगंज, बेलखरनाथ इलाके में भी डेंगू के मरीज मिले हैं।
माहभर में डेंगू से तीन लोगों की गई जान
रखहा। विकासखंड बेलखरनाथधाम क्षेत्र के डड़वा महोखरी गांव में माह भर के भतीर डेंगू बुखार से 3 लोगों की जान जा चुकी है। मगर स्वास्थ्य विभाग इसे मानने को तैयार नहीं है। जानकारी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। पट्टी कोतवाली के डड़वा महोखरी निवासी खुशबू (22) पुत्री विनोद तिवारी को डेंगू बुखार हो गया था। माह भर पहले इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसी तरह उसी गांव की रहने वाली श्यामा देवी (65) पत्नी हरिशंकर तिवारी को लंबे समय से बुखार हो रहा था।
इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में श्यामा देवी ने तीन नवंबर को दम तोड़ दिया। उसी गांव के रहने वाले अंजनी तिवारी (12) पुत्र लालचंद की मौत बुखार के चलते 10 नवंबर की रात इलाज के दौरान इलाहाबाद में हो गई। बताया जा रहा है कि उसी गांव की रहने वाली रुचि (22) पुत्री रामकैलाश दुबे को डेंगू हो गया है।
उसकी इलाज डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज दिल्ली में हो रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग डेंगू से मौत मानने को तैयार नहीं है। कुंडा में बीते दो दिनों के अंदर चार मरीज तो पट्टी में दो मरीज मिले हैं। पट्टी में भी एक व्यापारी की डेंगू से मौत हो गई। मगर स्वास्थ्य विभाग मानने को तैयार नहीं है।
जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट संदिग्ध मानते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल में दस तो जनपद के सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड का निर्माण बीते तीन साल पहले हुआ था। मगर अब तक एक भी मरीज इन वार्डों में भर्ती नहीं किए गए हैं। अभी तक जनपद के सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था नहीं थी।
मगर इस बार जिला अस्पताल के सीएमएस रहे डॉक्टर इम्तियाज अहमद ने डेंगू जांच किट मंगवा की थी। किट से मरीजों की जांच जरूर होती है, मगर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक किट से हुई जांच को संदिग्ध मानते हैं। जांच में डेंगू की पुष्टि होती है तो चिकित्सक कंफर्म करने के लिए प्रयागराज के एसआरएन भेज देते हैं।
मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद यदि डेंगू पुष्ट होती है तो शासन डेंगू मानता है। किट से हो रही जांच को सत्य नहीं माना जा सकता है। जिले में डेंगू से अभी तक एक भी मौत नहीं हुई है। जनपद में रहने वाले 12 से 15 मरीज को ही डेंगू हुआ है। अन्य मरीज किसी न किसी दूसरे शहर में रहते हैं। बीमार होने के बाद प्रतापगढ़ आते हैं। एसआरएन हो या फिर पीजीआई में भर्ती होने के बाद प्रतापगढ़ का पता लिखाते हैं। इसलिए हमें जानकारी मिलती है। जानकारी मिलते ही दवा का छिड़काव करने के लिए टीम भेजी जाती है। डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
बीमार बना सकती है जिला अस्पताल की गंदगी
डेंगू के मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अनजान बना हुआ है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को बीमारियों का खतरा सता रहा है। दरअसल डंपिंग जोन में कूड़ा डंप कर रखा जा रहा है। इससे मच्छर पनप रहे हैं। इससे मरीज परेशान हैं। जिम्मेदार इससे अनजान बने हैं।
बेलखरनाथ में डेंगू की चपेट में आने से तीन लोगों की जान जा चुकी है। वहीं कुंडा क्षेत्र में डेगू से नौ लोग बीमार हो चुके हैं। प्रतिदिन दो से तीन डेंगू के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल के जिम्मेदार पूरी तरह अनजान बने हैं। जिला अस्पताल परिसर में चिल्ड्रेन वार्ड के नीचे डॉक्टर अनिल गुप्ता के आवास के बगल बने डंपिंग जोन में इन दिनों कूड़ा डंप हैं।
जिम्मेदार अफसरों का ध्यान इस ओर नहीं पड़ रहा है। इससे मच्छर पनप रहे हैं। जिला अस्पताल के मेडिकल, चिल्ड्रेन और सर्जिकल पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों को दूसरी बीमारियों का खतरा सता रहा है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत जिम्मेदार अफसरों से की जा चुकी है, मगर अफसर इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। डंपिंग जोन में अस्पताल का कचरा डंप होने से एक ओर दुर्गंध उठ रही है तो दूसरी ओर मच्छर पनप रहे हैं।
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जिले में डेंगू के अब तक 72 मरीज सामने आ चुके हैं। इससे दोगुना अधिक मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होकर अपना इलाज करवा रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने वाले लोगों को डेंगू का मरीज मानने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त से अब तक 72 मरीज डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। इन मरीजों का इलाज प्रयागराज के एसआरएन और लखनऊ के पीजीआई में हुआ।
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यहां जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद चिकित्सकों की ओर से सीएमओ को संदेश पत्र भेजकर मरीजों के गांवों में दवा का छिड़काव कराने को कहा जाता है। कागज पर दवा का छिड़काव भी होता है, मगर हकीकत में जांच रिपोर्ट लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसर चुप्पी साध लेते हैं। जनपद में चार माह के भीतर 72 डेंगू के मरीजों के मिलने से आम जनमानस सहमा हुआ है।
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इसके बाद भी दवा का छिड़काव और बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। विभाग इसे लेकर संजीदा नहीं है। पखवारे भर से मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
तराई वाले इलाकों में ज्यादा मिल रहे डेंगू के मरीज
स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि 72 मरीजों में ज्यादातर लोग तराई वाले इलाकों के हैं। सबसे ज्यादा डेंगू के मरीज कुंडा में मिले हैं। इसके अलावा पट्टी, लालगंज, बेलखरनाथ इलाके में भी डेंगू के मरीज मिले हैं।
माहभर में डेंगू से तीन लोगों की गई जान
रखहा। विकासखंड बेलखरनाथधाम क्षेत्र के डड़वा महोखरी गांव में माह भर के भतीर डेंगू बुखार से 3 लोगों की जान जा चुकी है। मगर स्वास्थ्य विभाग इसे मानने को तैयार नहीं है। जानकारी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। पट्टी कोतवाली के डड़वा महोखरी निवासी खुशबू (22) पुत्री विनोद तिवारी को डेंगू बुखार हो गया था। माह भर पहले इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इसी तरह उसी गांव की रहने वाली श्यामा देवी (65) पत्नी हरिशंकर तिवारी को लंबे समय से बुखार हो रहा था।
इलाज के दौरान एक निजी अस्पताल में श्यामा देवी ने तीन नवंबर को दम तोड़ दिया। उसी गांव के रहने वाले अंजनी तिवारी (12) पुत्र लालचंद की मौत बुखार के चलते 10 नवंबर की रात इलाज के दौरान इलाहाबाद में हो गई। बताया जा रहा है कि उसी गांव की रहने वाली रुचि (22) पुत्री रामकैलाश दुबे को डेंगू हो गया है।
उसकी इलाज डॉक्टर भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज दिल्ली में हो रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग डेंगू से मौत मानने को तैयार नहीं है। कुंडा में बीते दो दिनों के अंदर चार मरीज तो पट्टी में दो मरीज मिले हैं। पट्टी में भी एक व्यापारी की डेंगू से मौत हो गई। मगर स्वास्थ्य विभाग मानने को तैयार नहीं है।
जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट संदिग्ध मानते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल में दस तो जनपद के सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड का निर्माण बीते तीन साल पहले हुआ था। मगर अब तक एक भी मरीज इन वार्डों में भर्ती नहीं किए गए हैं। अभी तक जनपद के सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था नहीं थी।
मगर इस बार जिला अस्पताल के सीएमएस रहे डॉक्टर इम्तियाज अहमद ने डेंगू जांच किट मंगवा की थी। किट से मरीजों की जांच जरूर होती है, मगर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक किट से हुई जांच को संदिग्ध मानते हैं। जांच में डेंगू की पुष्टि होती है तो चिकित्सक कंफर्म करने के लिए प्रयागराज के एसआरएन भेज देते हैं।
मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद यदि डेंगू पुष्ट होती है तो शासन डेंगू मानता है। किट से हो रही जांच को सत्य नहीं माना जा सकता है। जिले में डेंगू से अभी तक एक भी मौत नहीं हुई है। जनपद में रहने वाले 12 से 15 मरीज को ही डेंगू हुआ है। अन्य मरीज किसी न किसी दूसरे शहर में रहते हैं। बीमार होने के बाद प्रतापगढ़ आते हैं। एसआरएन हो या फिर पीजीआई में भर्ती होने के बाद प्रतापगढ़ का पता लिखाते हैं। इसलिए हमें जानकारी मिलती है। जानकारी मिलते ही दवा का छिड़काव करने के लिए टीम भेजी जाती है। डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
बीमार बना सकती है जिला अस्पताल की गंदगी
डेंगू के मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अनजान बना हुआ है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को बीमारियों का खतरा सता रहा है। दरअसल डंपिंग जोन में कूड़ा डंप कर रखा जा रहा है। इससे मच्छर पनप रहे हैं। इससे मरीज परेशान हैं। जिम्मेदार इससे अनजान बने हैं।
बेलखरनाथ में डेंगू की चपेट में आने से तीन लोगों की जान जा चुकी है। वहीं कुंडा क्षेत्र में डेगू से नौ लोग बीमार हो चुके हैं। प्रतिदिन दो से तीन डेंगू के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल के जिम्मेदार पूरी तरह अनजान बने हैं। जिला अस्पताल परिसर में चिल्ड्रेन वार्ड के नीचे डॉक्टर अनिल गुप्ता के आवास के बगल बने डंपिंग जोन में इन दिनों कूड़ा डंप हैं।
जिम्मेदार अफसरों का ध्यान इस ओर नहीं पड़ रहा है। इससे मच्छर पनप रहे हैं। जिला अस्पताल के मेडिकल, चिल्ड्रेन और सर्जिकल पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों को दूसरी बीमारियों का खतरा सता रहा है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत जिम्मेदार अफसरों से की जा चुकी है, मगर अफसर इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। डंपिंग जोन में अस्पताल का कचरा डंप होने से एक ओर दुर्गंध उठ रही है तो दूसरी ओर मच्छर पनप रहे हैं।