{"_id":"64b6b4c73d8abc97da097f04","slug":"game-closed-in-pm-kisan-sinchai-yojana-now-contribution-will-have-to-be-deposited-first-pratapgarh-news-c-262-1-ptp1002-1790-2023-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: पीएम किसान सिंचाई योजना में बंद हुआ खेल, अब पहले जमा करना होगा अंशदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: पीएम किसान सिंचाई योजना में बंद हुआ खेल, अब पहले जमा करना होगा अंशदान
Tue, 18 Jul 2023 09:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Tue, 18 Jul 2023 09:20 PM IST
विज्ञापन
किसानों को अनुदान बांटने के मिले 6.58 करोड़ रुपये, दस फीसदी घट गई अनुदान राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत अनुदान के नाम पर होने वाला खेल पूरी तरह बंद हो गया है। अब किसानों को आवेदन के साथ ही बीस प्रतिशत अंशदान राशि उद्यान विभाग के खाते में जमा करनी होगी। इसके बाद कार्यदायी संस्था किसानों के खेतों में ििस्प्रंकलर सेट लगाने और पाइप बिछाने का कार्य करेगी। शासन ने इस मद में किसानों को 6.58 करोड़ रुपये अनुदान बांटने का लक्ष्य दिया है। वहीं इस योजना में अनुदान राशि 20 से घटाकर दस फीसदी कर दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत जिला उद्यान विभाग किसानों को पाइप और िस्प्रकलर सेट देता है। जिससे किसान कम पानी में फल और सब्जियों की सिंचाई कर सकें। योजना के तहत अभी तक सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था। इसमें विभागीय कर्मचारी और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत से किसान सिर्फ अनुदान का लाभ ले लेते थे। फाइल में योजना का लक्ष्य पूरा दिखा देते थे।
अब शासन ने योजना को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को आवेदन के बाद बीस प्रतिशत अंशदान राशि जमा करनी होगी। जो किसान अंशदान राशि नहीं जमा करेंगे, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। फिर कार्यदायी संस्था किसानों के घर पहुंचकर पूरा सेट लगाएगी। जिसका गुजरात की कंपनी सीजीआरसी सत्यापन करेगी। शासन ने जिले के 1303 हेक्टेयर के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 6.58 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।
विज्ञापन
इनसेट-- -- -- -- -- -- -
घट गई अनुदान की राशि
पीएम किसान सिंचाई योजना में सीमांत कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था, मगर चालू वित्तीय वर्ष में अनुदान घटाकर 80 प्रतिशत कर दिया गया है। फिलहाल यह प्रकि्रया इतनी जटिल है कि किसानों को अनुदान का लाभ लेने में पसीना आ जाएगा।
वर्जन-- -- -- -- -
पीएम किसान सिंचाई योजना को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। अब विभाग की भूमिका सिर्फ इतनी होगी कि वह किसानों से अंशदान जमा कराए। इसके बाद कार्यदायी संस्था गांव में पहुंचकर सिंचाई उपकरण लगाने, सत्यापन का काम पूरा करेगी।
सुनील कुमार शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत अनुदान के नाम पर होने वाला खेल पूरी तरह बंद हो गया है। अब किसानों को आवेदन के साथ ही बीस प्रतिशत अंशदान राशि उद्यान विभाग के खाते में जमा करनी होगी। इसके बाद कार्यदायी संस्था किसानों के खेतों में ििस्प्रंकलर सेट लगाने और पाइप बिछाने का कार्य करेगी। शासन ने इस मद में किसानों को 6.58 करोड़ रुपये अनुदान बांटने का लक्ष्य दिया है। वहीं इस योजना में अनुदान राशि 20 से घटाकर दस फीसदी कर दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत जिला उद्यान विभाग किसानों को पाइप और िस्प्रकलर सेट देता है। जिससे किसान कम पानी में फल और सब्जियों की सिंचाई कर सकें। योजना के तहत अभी तक सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था। इसमें विभागीय कर्मचारी और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत से किसान सिर्फ अनुदान का लाभ ले लेते थे। फाइल में योजना का लक्ष्य पूरा दिखा देते थे।
विज्ञापन
अब शासन ने योजना को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अनुदान का लाभ लेने के लिए किसानों को आवेदन के बाद बीस प्रतिशत अंशदान राशि जमा करनी होगी। जो किसान अंशदान राशि नहीं जमा करेंगे, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। फिर कार्यदायी संस्था किसानों के घर पहुंचकर पूरा सेट लगाएगी। जिसका गुजरात की कंपनी सीजीआरसी सत्यापन करेगी। शासन ने जिले के 1303 हेक्टेयर के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 6.58 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।
विज्ञापन
इनसेट
घट गई अनुदान की राशि
पीएम किसान सिंचाई योजना में सीमांत कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था, मगर चालू वित्तीय वर्ष में अनुदान घटाकर 80 प्रतिशत कर दिया गया है। फिलहाल यह प्रकि्रया इतनी जटिल है कि किसानों को अनुदान का लाभ लेने में पसीना आ जाएगा।
वर्जन
पीएम किसान सिंचाई योजना को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। अब विभाग की भूमिका सिर्फ इतनी होगी कि वह किसानों से अंशदान जमा कराए। इसके बाद कार्यदायी संस्था गांव में पहुंचकर सिंचाई उपकरण लगाने, सत्यापन का काम पूरा करेगी।
सुनील कुमार शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी