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निलंबित गोदाम प्रभारी को बचाने में जुटे विभागीय अफसर
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fertilizer
ढाई करोड़ रुपये की डीएपी के घपले में विभागीय अफसरों की सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता है। एफआईआर दर्ज होने के पांच दिन बाद भी लखनऊ से नामित जांच अधिकारी न तो मामले की जांच करने आए और न ही फरार कर्मचारी को खोजने का प्रयास किया। विभागीय अधिकारी कर्मचारी के पास एक बीघा खेत बताकर रिकवरी की कार्रवाई से बच रहे हैं।
दरअसल, किसानों के हिस्से की 21,100 बोरी डीएपी बेचकर फरार होने वाले कर्मचारी को सिर्फ मोहरा बनाया गया है। ढाई करोड़ रुपये की डीएपी बेचकर मोटी रकम कमाने में पीसीएफ के अफसरों का भी हाथ होने की आशंका है। जांच दल में शामिल अफसरों का मानना है कि 21,100 बोरी डीएपी को एक या दो दिन में कोई नहीं बेच सकता है, बल्कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। अगर डीएपी की रैक पहले आ जाती, तो इस खेल का खुलासा न हो पाता।
मगर मांग बढ़ती गई और रैक आने में देर होती गई। यही वजह रही कि 21,100 बोरी डीएपी के खेल से पर्दा उठा। निलंबित भंडार नायर संतोष कुमार के समर्थन में विभागीय अधिकारी आ गए हैं। प्रशासनिक अफसरों ने जब फरार कर्मचारी की संपत्ति से रिकवरी करने को कहा तो विभागीय अधिकारियों का तर्क था कि उसके पास सिर्फ एक बीघा ही जमीन है।
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जबकि भंडार नायक प्रतिदिन अलग-अलग रंग की कार लेकर आता था। विभागीय अधिकारियों को खुश करने का परिणाम रहा कि वह नौ साल से पीसीएफ के सभी गोदामों का इंचार्ज बना हुआ था। सवाल उठता है कि अगर निलंबित कर्मचारी को विभागीय अधिकारियों का संरक्षण न होता, तो वह इतने दिनों तक इंचार्ज कैसे बना रहता। फिलहाल, अब जांच आगे बढ़ने पर ही डीएपी घपले में हुए खेल का खुलासा होगा।
लखनऊ से अभी कोई अधिकारी मामले की जांच करने नहीं आया है। जब तक विभागीय अधिकारी आकर गहराई से जांच नहीं करते हैं, तब तक मामले का खुलासा नहीं होगा। डीएम के स्तर से जो टीम गठित है, वह गोदाम में मौजूद खाद की बोरियों की गणना कराने की तैयारी में है। पीसीएफ में कोई कर्मचारी चार्ज लेना नहीं चाह रहा है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता
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दरअसल, किसानों के हिस्से की 21,100 बोरी डीएपी बेचकर फरार होने वाले कर्मचारी को सिर्फ मोहरा बनाया गया है। ढाई करोड़ रुपये की डीएपी बेचकर मोटी रकम कमाने में पीसीएफ के अफसरों का भी हाथ होने की आशंका है। जांच दल में शामिल अफसरों का मानना है कि 21,100 बोरी डीएपी को एक या दो दिन में कोई नहीं बेच सकता है, बल्कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। अगर डीएपी की रैक पहले आ जाती, तो इस खेल का खुलासा न हो पाता।
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मगर मांग बढ़ती गई और रैक आने में देर होती गई। यही वजह रही कि 21,100 बोरी डीएपी के खेल से पर्दा उठा। निलंबित भंडार नायर संतोष कुमार के समर्थन में विभागीय अधिकारी आ गए हैं। प्रशासनिक अफसरों ने जब फरार कर्मचारी की संपत्ति से रिकवरी करने को कहा तो विभागीय अधिकारियों का तर्क था कि उसके पास सिर्फ एक बीघा ही जमीन है।
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जबकि भंडार नायक प्रतिदिन अलग-अलग रंग की कार लेकर आता था। विभागीय अधिकारियों को खुश करने का परिणाम रहा कि वह नौ साल से पीसीएफ के सभी गोदामों का इंचार्ज बना हुआ था। सवाल उठता है कि अगर निलंबित कर्मचारी को विभागीय अधिकारियों का संरक्षण न होता, तो वह इतने दिनों तक इंचार्ज कैसे बना रहता। फिलहाल, अब जांच आगे बढ़ने पर ही डीएपी घपले में हुए खेल का खुलासा होगा।
लखनऊ से अभी कोई अधिकारी मामले की जांच करने नहीं आया है। जब तक विभागीय अधिकारी आकर गहराई से जांच नहीं करते हैं, तब तक मामले का खुलासा नहीं होगा। डीएम के स्तर से जो टीम गठित है, वह गोदाम में मौजूद खाद की बोरियों की गणना कराने की तैयारी में है। पीसीएफ में कोई कर्मचारी चार्ज लेना नहीं चाह रहा है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता