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साधन सहकारी समितियों से गायब हुई यूरिया
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:46 PM IST
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जिले के साधन सहकारी समितियों से यूरिया खाद गायब हो गई है। सचिवों के मांग के बाद भी खाद नहीं दी जा रही है। अचानक यूरिया की मांग बढ़ने से जिले के अधिकारी भी आश्चर्य चकित हैं। समितियों से खाद गायब होने से प्राइवेट दुकानदार ऊंचे दाम पर खाद बेंचकर मुनाफा कमाने में जुटे हुए हैं।
जिले की साधन सहकारी समितियों पर यूरिया का संकट गहरा गया है। समितियों से मिलने वाली नान कोडेड यूरिया को किसान खेतों में अधिक प्रयोग कर रहे हैं। बरसात अच्छी होने से किसान खेतों में यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं। इससे समितियों पर उपलब्ध खाद देखते ही देखते गायब हो गई। आलम यह है कि जिले की साधन सहकारी समितियों पर इन दिनों दाना भर खाद नहीं है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में 14,000 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य होता है, जबकि गोदाम में रखी सितंबर माह की 15,500 मीट्रिक टन यूरिया भी खत्म हो गई। खाद का संकट गहराने की जानकारी डीएम को होते ही उन्होंने 2684 मीट्रिक टन यूरिया की मांग कर दी। खाद मिलने में हो रही देरी से प्राइवेट दुकानदार किसानों से अधिक रकम वसूल रहे हैं। फिलहाल विभाग का दावा है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है, यूरिया की एक रैक आ गई है, जो गोदाम में आनी प्रारंभ हो गई है। 16 अगस्त से यह खाद समितियों को भेजना प्रारंभ किया जाएगा।
अगस्त और सितंबर में हर साल खड़ा होता है संकट
जिले में अगस्त और सितंबर माह में प्रत्येक वर्ष यूरिया का संकट खड़ा होता है। मगर इसके बाद भी विभागीय अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। यह बात समझ में नहीं आती है, कि जब अगस्त, सितंबर में यूरिया की मांग अधिक है, तो अधिकारी मांग के अनुरूप यूरिया क्यों नहीं मंगाते हैं।
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जिले में खाद की संकट नहीं है, डीएम के प्रयास से एक रैक खाद आ गई है। जो जल्द ही साधन सहकारी समितियों को भेजी जाएगी।
डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जिले की साधन सहकारी समितियों पर यूरिया का संकट गहरा गया है। समितियों से मिलने वाली नान कोडेड यूरिया को किसान खेतों में अधिक प्रयोग कर रहे हैं। बरसात अच्छी होने से किसान खेतों में यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं। इससे समितियों पर उपलब्ध खाद देखते ही देखते गायब हो गई। आलम यह है कि जिले की साधन सहकारी समितियों पर इन दिनों दाना भर खाद नहीं है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में 14,000 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य होता है, जबकि गोदाम में रखी सितंबर माह की 15,500 मीट्रिक टन यूरिया भी खत्म हो गई। खाद का संकट गहराने की जानकारी डीएम को होते ही उन्होंने 2684 मीट्रिक टन यूरिया की मांग कर दी। खाद मिलने में हो रही देरी से प्राइवेट दुकानदार किसानों से अधिक रकम वसूल रहे हैं। फिलहाल विभाग का दावा है कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है, यूरिया की एक रैक आ गई है, जो गोदाम में आनी प्रारंभ हो गई है। 16 अगस्त से यह खाद समितियों को भेजना प्रारंभ किया जाएगा।
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अगस्त और सितंबर में हर साल खड़ा होता है संकट
जिले में अगस्त और सितंबर माह में प्रत्येक वर्ष यूरिया का संकट खड़ा होता है। मगर इसके बाद भी विभागीय अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। यह बात समझ में नहीं आती है, कि जब अगस्त, सितंबर में यूरिया की मांग अधिक है, तो अधिकारी मांग के अनुरूप यूरिया क्यों नहीं मंगाते हैं।
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जिले में खाद की संकट नहीं है, डीएम के प्रयास से एक रैक खाद आ गई है। जो जल्द ही साधन सहकारी समितियों को भेजी जाएगी।
डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी