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एक्सक्लूसिव: तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के बच्चों को मिलेगी मुफ्त तालीम
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triple talaq
तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। स्कूलों एवं कॉलेजों में उन्हें मुफ्त तालीम दी जाएगी। शिक्षा से संबंधित हर संभव सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। डीआईओएस ने जिले के सभी स्कूलों एवं कालेजों के प्रधानाचार्यों को इसके लिए निर्देशित किया है।
तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं का जीवनस्तर ऊंचा उठाने के लिए शासन ने एक और पहल की है। डीआईओएस को ऐसी महिलाओं के बच्चों की उचित शिक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो कालेजों एवं स्कूलों में तीन तलाक पीड़ितों के बच्चों को मुफ्त तालीम दी जाएगी।
उन्हें पाठ्य पुस्तकें व शिक्षा से संबंधित सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। शिक्षा के प्रति उन्हें जागरूक किया जाएगा। ताकि उनमेें भटकाव की स् िथति न पैदा हो और वह भी शिक्षित होकर समाज में अपना योगदान दे सकें। राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन कालेजों एवं स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि उनके आस- पास तीन तलाक की जो भी पीड़िताएं हों, उनके बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें और उनके लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था मुहैया कराएं।
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डीआईओएस एसके सिंह ने बताया कि तीन तलाक पीड़िताओं के बच्चों को शिक्षा की मुख्य घारा से जोडने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है। इसके लिए बजट की मांग की जाएगी।
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तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं का जीवनस्तर ऊंचा उठाने के लिए शासन ने एक और पहल की है। डीआईओएस को ऐसी महिलाओं के बच्चों की उचित शिक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो कालेजों एवं स्कूलों में तीन तलाक पीड़ितों के बच्चों को मुफ्त तालीम दी जाएगी।
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उन्हें पाठ्य पुस्तकें व शिक्षा से संबंधित सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। शिक्षा के प्रति उन्हें जागरूक किया जाएगा। ताकि उनमेें भटकाव की स् िथति न पैदा हो और वह भी शिक्षित होकर समाज में अपना योगदान दे सकें। राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन कालेजों एवं स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि उनके आस- पास तीन तलाक की जो भी पीड़िताएं हों, उनके बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें और उनके लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था मुहैया कराएं।
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डीआईओएस एसके सिंह ने बताया कि तीन तलाक पीड़िताओं के बच्चों को शिक्षा की मुख्य घारा से जोडने की पहल की जा रही है। इसके लिए प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है। इसके लिए बजट की मांग की जाएगी।