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Pratapgarh News: कुएं में बुजुर्ग बबऊ की मौत...जान देकर जिंदा रखी संवेदना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 11:39 PM IST
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Elder Babu dies in a well...kept sympathy alive by giving life
फतनपुर के पूरे बिच्छूर में सूखे कुएं में गिरी बकरी को निकालने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आए युवक को बचाने के चक्कर में बुजुर्ग बचऊ ने अपनी जान गवां दी। पूरा घटनाक्रम जीती-जागती संवेदना की कहानी है। क्योंकि वहां बहुत से नौजवान थे लेकिन युवक को बचाने कोई आगे न आया।
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भतीजे प्रीतम को बचाने दयाराम रस्सी व खटोले की मदद से कुएं में उतरे। जब वह भी फंस गए तो 65 साल के बबऊ जान की परवाह किए बिना खटोला लेकर नीचे उतर गए। उनके प्रयास से ही दयाराम और प्रतीम बाहर निकाले गए। लेकिन उम्र ज्यादा होने के चलते बबऊ झेल गए। रस्सी से उनकी पकड़ छूट गई और वहीं गिर पड़े। उन्हें आखिरी में निकाला जा सका।
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फायरब्रिगेड कर्मियों ने टार्च की रोशनी में पहले रस्सी में कांटा फंसाकर उन्हें उठाया। फिर रस्सी एक पैर में डालकर फंसाया। इसके बाद उन्हें टोकरी में डालकर बाहर निकाला। उनके पूरे शरीर पर मिट्टी लगी थी। परिजनों ने मिट्टी साफ कर उन्हें के सामने लिटाया लेकिन वह होश में नहीं आ सके। ट्रॉमा सेंटर में डॉ. रतीश मिश्रा ने जांच के बाद बताया कि वह मृत अवस्था में लाए गए थे।
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रेस्क्यू के दौरान भीड़ जुट गई थी। फायरब्रिगेड टीम के पास ऑक्सीजन सिलिंडर तक नहीं था। वे कुएं में उतरने के बजाय संसाधन खोजते रहे। रस्सी व बांस की टोकरी की मदद से लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते रहे। इसे लेकर ग्रामीण भड़क गए। लोगों का गुस्सा देख पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस बुलाई। उसमें ऑक्सीजन सिलिंडर होने की जानकारी देने के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ।
पूर्व प्रधान ने दिखाया जज्बा
घटना की सूचना मिलने पर पूरे बिच्छूर के 2015 में प्रधान चुने गए जितेंद्र यादव मौके पर पहुंचे। कुएं में फंसे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए पुलिस व फायरब्रिगेड कर्मियों की मौजूदगी में खुद कुएं में घुसने के लिए रस्सी बांधने लगे। जबकि वहां सैकड़ों युवक मौजूद थे। प्रधान का जज्बा देख वहां मौजूद तमाशबीन खिसकने लगे।

कुएं में जहरीली गैस से कम हो जाती है ऑक्सीजन

प्रतापगढ़। पीबीपीजी कॉलेज में रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. सीपी पांडेय ने बताया कि कुएं में पानी का स्तर कम हो और उसका उपयोग बंद हो जाए तो उसमें वनस्पति और अन्य कार्बनिक पदार्थों का विघटन शुरू हो जाता है। इस दौरान मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें निकलती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन कुएं में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती हैं। ऐसे में सांस लेने में दिक्कत होती है। दम घुटने से मौत भी हो सकती है।
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