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जर्जर हो गया करोड़ों की लागत से बना बर्न वार्ड और पोस्टमार्टम हाउस
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 27 Mar 2016 11:40 PM IST
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तीन वर्ष पहले करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हुई बर्न यूनिट और पोस्टमार्टम हाउस का प्लास्टर उखड़ने लगा है। भवन जर्जर होता चला जा रहा है, मगर अधिकारी न तो इस ओर ध्यान दे रहे हैं और न ही नए भवन का इस्तेमाल कर रहे हैं। दशकों पुराना पोस्टमार्टम हाउस जर्जर हो गया है। इसे देखते हुए शासन ने लाखों रुपये खर्च करके शहर से दूर पूरे अंती गांव के पास तीन वर्ष पहले नया पोस्टमार्टम हाउस बनवाया। कार्यदायी संस्था ने नए भवन को स्वास्थ्य विभाग को दो वर्ष पहले ही हैंडओवर भी कर दिया। इसके बाद भी चिकित्सक और फार्मासिस्ट नए भवन में पोस्टमार्टम करने को तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ी बात यह हैं कि शासन ने लाखों रुपये खर्च करके इस भवन को तैयार जरूर किया, मगर वह तीन ही वर्ष में जर्जर हो गया। कहीं दीवार टूट रही है तो कहीं-कहीं का प्लास्टर उखड़ने लगा है।
देखने में ऐसा लग रहा है कि वर्षों पुराना भवन है। उधर, जिला अस्पताल में जले हुए मरीजों को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में चिकित्सक प्राथमिक उपचार करके मरीज को इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। लोगों की शिकायत पर शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए करोड़ों रुपये खर्च करके तीन वर्ष पहले बर्न यूनिट वार्ड बनवाया। इस वार्ड में झुलसे मरीजों के इलाज के साथ सर्जरी करने की व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बात पर गौर किया जाए तो करीब दो वर्ष पहले कार्यदायी संस्था ने इस बर्न यूनिट को विभाग को हैंडओवर भी कर दिया। मगर इस भवन में स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों को भर्ती करने की जगह इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। इस बाबत सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि एक्सरे मशीन न होने के चलते नए भवन में पोस्टमार्टम नहीं किया जा रहा है। 15 अप्रैल तक मशीन मिल जाएगी। इसके बाद नए भवन में पोस्टमार्टम शुरू कर दिया जाएगा। बर्न यूनिट बनी जरूर है, मगर अभी किसी प्रकार की सामग्री नहीं मिली है। न तो कोई चिकित्सक की तैनाती की गई। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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देखने में ऐसा लग रहा है कि वर्षों पुराना भवन है। उधर, जिला अस्पताल में जले हुए मरीजों को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में चिकित्सक प्राथमिक उपचार करके मरीज को इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। लोगों की शिकायत पर शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए करोड़ों रुपये खर्च करके तीन वर्ष पहले बर्न यूनिट वार्ड बनवाया। इस वार्ड में झुलसे मरीजों के इलाज के साथ सर्जरी करने की व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बात पर गौर किया जाए तो करीब दो वर्ष पहले कार्यदायी संस्था ने इस बर्न यूनिट को विभाग को हैंडओवर भी कर दिया। मगर इस भवन में स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों को भर्ती करने की जगह इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। इस बाबत सीएमओ वीके पांडेय का कहना है कि एक्सरे मशीन न होने के चलते नए भवन में पोस्टमार्टम नहीं किया जा रहा है। 15 अप्रैल तक मशीन मिल जाएगी। इसके बाद नए भवन में पोस्टमार्टम शुरू कर दिया जाएगा। बर्न यूनिट बनी जरूर है, मगर अभी किसी प्रकार की सामग्री नहीं मिली है। न तो कोई चिकित्सक की तैनाती की गई। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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