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विद्युतीकरण घोटाले को दबाने की तैयारी
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:10 AM IST
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पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत आरकेईसी कंपनी ने सूची के इतर मजरों में विद्युतीकरण करके करोड़ों का हेरफेर किया था। जांच में भारी गोलमाल उजागर हुआ था। विभाग ने सूची से इतर मजरों को चिह्नित कर घपलेबाजी का हिसाब करने का दावा किया था, लेकिन तीन महीने बाद भी कुछ नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो कुछ नेताओं के दबाव और अफसरों की मिलीभगत से अंदरखाने में घोटाले को दबाने की तैयारी चल रही है।
केंद्र सरकार द्वारा बिजली से वंचित मजरों को रोशन करने की पहल 2014 में शुरू की गई थी। विभाग ने बिजली से वंचित 5042 मजरे चिह्नित किए थे। जिसमें 2885 मजरों के सापेक्ष 122 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। विद्युतीकरण की जिम्मेदारी आरकेईसी कंपनी को मिली थी। शुरू में कु छ दिनों तक कार्य ठीक-ठाक चला, मगर बाद में ठेकेदारों एवं संस्था के जिम्मेदारों ने अनियमितता शुरू कर दी। प्रस्तावित सूची के बजाए सेटिंग वाले मजरों में लेन-देन कर पोल- व तार गिराकर विद्युतीकरण कराया गया। मजे की बात यह है कि दूसरे मजरों में लगाए गए उपकरण व पोलों को सूची में दर्ज मजरों के नाम दिखाया गया। इसके अलावा प्रस्तावित सूची में के अनुरूप जिन मजरों में विद्युतीकरण हुआ भी, उसमें मानक की अनदेखी की गई। पोल बचाने के लिए रूट चार्ट को ताक पर रख दिया गया। इसके अलावा बचे उपकरणों से भी जमकर कमाई की गई। जानकारी होने पर सांसद हरिवंश सिंह व रानीगंज विधायक धीरज ओझा ने ऊर्जा सचिव से शिकायत कर जांच कराने की मांग की। लखनऊ व वाराणसी से आई विशेष जांच टीम ने मजरों की पड़ताल की तो विद्युतीकरण में व्यापक हेरफेर का मामला सामने आया। इस मामले में बिजली विभाग के तत्कालीन एसी को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद जांच टीम ने जिले में डेरा जमा दिया। जांच के बाद यह भी पता चला कि अभी तक निर्धारित मजरों में कार्य पूरा भी नहीं हो सका। जांच के बाद आरकेईसी कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। इसके बाद विभाग ने सूची से इतर मजरों में विद्युतीकरण के दौरान लगाए गए उपकरण व पोल के खर्च का हिसाब करने की पहल शुरू की। इसके लिए टीमें तैनात की गईं। तीन महीने पहले शुरू की गई यह पहल अब तक एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे वंचित मजरों के विद्युतीकरण का कार्य अधर में लटका पड़ा है। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने बताया कि मजरों को जांच की जा रही है। जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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केंद्र सरकार द्वारा बिजली से वंचित मजरों को रोशन करने की पहल 2014 में शुरू की गई थी। विभाग ने बिजली से वंचित 5042 मजरे चिह्नित किए थे। जिसमें 2885 मजरों के सापेक्ष 122 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। विद्युतीकरण की जिम्मेदारी आरकेईसी कंपनी को मिली थी। शुरू में कु छ दिनों तक कार्य ठीक-ठाक चला, मगर बाद में ठेकेदारों एवं संस्था के जिम्मेदारों ने अनियमितता शुरू कर दी। प्रस्तावित सूची के बजाए सेटिंग वाले मजरों में लेन-देन कर पोल- व तार गिराकर विद्युतीकरण कराया गया। मजे की बात यह है कि दूसरे मजरों में लगाए गए उपकरण व पोलों को सूची में दर्ज मजरों के नाम दिखाया गया। इसके अलावा प्रस्तावित सूची में के अनुरूप जिन मजरों में विद्युतीकरण हुआ भी, उसमें मानक की अनदेखी की गई। पोल बचाने के लिए रूट चार्ट को ताक पर रख दिया गया। इसके अलावा बचे उपकरणों से भी जमकर कमाई की गई। जानकारी होने पर सांसद हरिवंश सिंह व रानीगंज विधायक धीरज ओझा ने ऊर्जा सचिव से शिकायत कर जांच कराने की मांग की। लखनऊ व वाराणसी से आई विशेष जांच टीम ने मजरों की पड़ताल की तो विद्युतीकरण में व्यापक हेरफेर का मामला सामने आया। इस मामले में बिजली विभाग के तत्कालीन एसी को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद जांच टीम ने जिले में डेरा जमा दिया। जांच के बाद यह भी पता चला कि अभी तक निर्धारित मजरों में कार्य पूरा भी नहीं हो सका। जांच के बाद आरकेईसी कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। इसके बाद विभाग ने सूची से इतर मजरों में विद्युतीकरण के दौरान लगाए गए उपकरण व पोल के खर्च का हिसाब करने की पहल शुरू की। इसके लिए टीमें तैनात की गईं। तीन महीने पहले शुरू की गई यह पहल अब तक एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाई है। इससे वंचित मजरों के विद्युतीकरण का कार्य अधर में लटका पड़ा है। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने बताया कि मजरों को जांच की जा रही है। जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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