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विद्युतीकरण घपले को दबाने की तैयारी
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Feb 2018 11:11 PM IST
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जिले के 2085 मजरों के विद्युतीकरण में हुए करोड़ों रुपये के घपले की पोल खुलने से अब फर्म पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अब कंपनी को ब्लैक लिस्टेड भी किया जा सकता है। ऐसे में कंपनी के लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए लखनऊ तक की परिक्रमा शुरू कर दी है। जिले के नेताओं के चक्कर लगाए जा रहे हैं। 24 फरवरी तक संबंधित फर्म को इस मामले में स्पष्टीकरण देना है।
जिले में पं. दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण ग्राम ज्योति योजना के तहत 5013 मजरों को रोशन किया जाना था। गांवों एवं मजरों में विद्युतीकरण के कार्य में संबंधित फर्म ने जमकर मनमानी की। विद्युतीकरण के लिए निर्धारित किए गए गांवों एवं मजरों में अब तक बिजली नहीं पहुंची, लेकिन गांवों को कागज पर रोशन कर दिया गया।
कहीं गांव में महज पोल गिरे हैं तो कहीं तार खींचे गए हैं। मेन लाइन से उनका का कोई कनेक्शन तक नहीं है। बावजूद इसके 2085 मजरों को विद्युतीकरण से संतृप्त किए जाने की रिपोर्ट बना दी गई। संबंधित फर्म आरकेईसी ने मजरों में विद्युतीकरण का दावा किया। रानीगंज विधायक धीरज ओझा व सांसद हरिवंश सिंह द्वारा विद्युतीकरण में बरती गई अनियमितता की शिकायत की गई। इस पर वाराणसी व लखनऊ की टीम ने हकीकत खंगाली तो बड़ा घपला सामने आया। जांच में करीब दर्जनभर गांवों में कागज पर विद्युतीकरण कराने की बात सामने आई। व्यापक अनियमितता के मद्देनजर अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर दिया गया। इधर, विभागीय अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए आनन-फानन में आरकेईसी कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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अधीक्षण अभियंता पर कार्रवाई के बाद अब कंपनी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। कंपनी को स्पष्टीकरण देने मेें महज गिनती भर के दिन शेष हैं। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में साफ आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा विद्युतीकरण में मनमानी व अनियमितता बरती गई। ऐसे में इस बात के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि इस फर्म को शासनस्तर से ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है। यह देखते हुए फर्म के लोगों ने जिले से लेकर लखनऊ तक की भागदौड़ शुरू कर दी है। नेताओं की परिक्रमा की जा रही है। घपले को दबाने की भी तैयारी है।
सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट के अनुसार जिन-जिन गांवों एवं मजरों में अनियमितता की गई है, उसकी भरपाई करने के करार की बात चल रही है। फर्म के लोग इस प्रयास में हैं कि किसी तरह बात बन जाए और मामला दब जाए। मजे की बात यह है कि कल तक कंपनी पर जिन अफसरों के सुर विरोधी थे, वह अब नरम हो गए हैं। अंदरखाने में अफसर व फर्म के जिम्मेदार दोनों पक्ष इसे दबाने में लगे हैं। प्रभारी अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि स्पष्टीकरण देने में अभी हप्तेभर का समय शेष है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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जिले में पं. दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण ग्राम ज्योति योजना के तहत 5013 मजरों को रोशन किया जाना था। गांवों एवं मजरों में विद्युतीकरण के कार्य में संबंधित फर्म ने जमकर मनमानी की। विद्युतीकरण के लिए निर्धारित किए गए गांवों एवं मजरों में अब तक बिजली नहीं पहुंची, लेकिन गांवों को कागज पर रोशन कर दिया गया।
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कहीं गांव में महज पोल गिरे हैं तो कहीं तार खींचे गए हैं। मेन लाइन से उनका का कोई कनेक्शन तक नहीं है। बावजूद इसके 2085 मजरों को विद्युतीकरण से संतृप्त किए जाने की रिपोर्ट बना दी गई। संबंधित फर्म आरकेईसी ने मजरों में विद्युतीकरण का दावा किया। रानीगंज विधायक धीरज ओझा व सांसद हरिवंश सिंह द्वारा विद्युतीकरण में बरती गई अनियमितता की शिकायत की गई। इस पर वाराणसी व लखनऊ की टीम ने हकीकत खंगाली तो बड़ा घपला सामने आया। जांच में करीब दर्जनभर गांवों में कागज पर विद्युतीकरण कराने की बात सामने आई। व्यापक अनियमितता के मद्देनजर अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर दिया गया। इधर, विभागीय अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए आनन-फानन में आरकेईसी कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी।
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अधीक्षण अभियंता पर कार्रवाई के बाद अब कंपनी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। कंपनी को स्पष्टीकरण देने मेें महज गिनती भर के दिन शेष हैं। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में साफ आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा विद्युतीकरण में मनमानी व अनियमितता बरती गई। ऐसे में इस बात के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि इस फर्म को शासनस्तर से ब्लैक लिस्टेड किया जा सकता है। यह देखते हुए फर्म के लोगों ने जिले से लेकर लखनऊ तक की भागदौड़ शुरू कर दी है। नेताओं की परिक्रमा की जा रही है। घपले को दबाने की भी तैयारी है।
सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट के अनुसार जिन-जिन गांवों एवं मजरों में अनियमितता की गई है, उसकी भरपाई करने के करार की बात चल रही है। फर्म के लोग इस प्रयास में हैं कि किसी तरह बात बन जाए और मामला दब जाए। मजे की बात यह है कि कल तक कंपनी पर जिन अफसरों के सुर विरोधी थे, वह अब नरम हो गए हैं। अंदरखाने में अफसर व फर्म के जिम्मेदार दोनों पक्ष इसे दबाने में लगे हैं। प्रभारी अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि स्पष्टीकरण देने में अभी हप्तेभर का समय शेष है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।