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मरीज परेशान, मनमानी पर उतारू 'धरती के भगवान'

Sat, 03 Sep 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Sat, 03 Sep 2016 12:00 AM IST
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patient suffer during the strike
न्यूज
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है तो दूसरी तरफ डॉक्टर भी मनमानी पर उतारू हैं। ओपीडी से लेकर वार्ड तक मरीज परेशान रहते हैं लेकिन किसी को उनकी फिक्र नहीं। मरीजों का आरोप है कि चिकित्सक परिसर में ही प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहते हैं लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं होती। शुक्रवार को जिला अस्पताल का क्या हाल रहा, किस तरह मरीज और तीमारदार अपनी शिकायतें लेकर भटकते रहे, खुद ही पढ़िए इस रिपोर्ट में....
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दोपहर 1.00 बजे
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस और वरिष्ठ फीजिशियन डा. आरडी द्विवेदी के चेंबर के बाहर मरीजों की भीड़ जमा थी। चार-पांच मरीज अंदर थे। बाकी लोग बाहर इंतजार कर रहे थे। राजीगंज से आई सुधा को तेज बुखार था। वह डाक्टर के इंतजार में बैठी थी। इसी तरह गौरा से आई सीमा को भी संक्रमण की शिकायत थी। वह भी काफी देर से बैठी थी। सीएमएस अपने कक्ष में नहीं थे। उनकी कुर्सी के बगल बैठकर एक मेडिकल स्टोर संचालक लोगों का इलाज कर रहा था।
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दोपहर 1.10 बजे
फतनपुर के रामनिहोर को हार्निया की शिकायत थी। वह जांच कराने और परामर्श लेने के लिए जिला अस्पताल आया था। ओपीडी में सर्जन कक्ष के बाहर काफी देर से बैठा था। उसने स्वास्थ्य कर्मियों से कई बार डाक्टर के बारे में पूछा, लेकिन कोई कुछ बताने के लिए तैयार नहीं था। सर्जन का कक्ष खाली था। चैंबर में कोई डाक्टर नहीं था। काफी देर तक इंतजार करने के बाद वह लौट गया।
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दोपहर 1. 20 बजे
बाल रोग विशेषज्ञ डा. अनिल गुप्ता के चेंबर में मरीजों की भारी भीड़ थी। बाहर भी बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों के इलाज के लिए लाइन में खड़े थे। बगल में बाल रोग विशेषज्ञ डा. मोहित शुक्ला का चैंबर खाली था। अकेले डा. गुप्ता बच्चों का इलाज करने में जुटे थे। बीमार बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि लोग दो-दो घंटे से लाइन में लगे थे। पूछने पर कई मरीजों ने बताया कि ज्यादातर डाक्टर अपने आवास पर ही इलाज करना पसंद करते हैं। वे ड्यूटी छोड़कर भी आवास पर मरीज देखने चले जाते हैं।

गंदगी में लेटाए जा रहे मरीज
जिला अस्पताल में ठेके पर रखे गए स्वीपर और धोबी छह महीने से पैसे नहीं मिलने के कारण हड़ताल पर चले गए हैं। इससे सारी व्यवस्था चरमरा गई है। मरीजों को वार्ड में बिना चादर के गंदगी के बीच लेटाया जा रहा है। उधर डायरिया वार्ड में कचरा पसरा पड़ा था। पान की पीक और कचरे की भीषण दुर्गंध से वहां एक पल भी ठहरना मुश्किल था।


मैं लखनऊ में था। दो सर्जन छुट्टी पर हैं। इस समय केवल एक सर्जन हैं। उन्हें ओटी, ओपीडी दोनों देखना पड़ रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ मोहित शुक्ला के बारे में जानकरी नहीं है। वार्डों से गंदगी दूर करवाने के साथ ही स्ट्रेचर भी बनवाए जाएंगे।
डा. आरडी द्विवेदी, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल।
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