फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   old women died foe pention

नहीं मिली पेंशन, लाइन में लगी वृद्धा की गई जान

Fri, 02 Dec 2016 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़ Updated Fri, 02 Dec 2016 12:12 AM IST
विज्ञापन
old women died foe pention
न्‍यूूज

विज्ञापन
भारतीय स्टेट बैंक में गुरुवार को पेंशन की रकम निकालने के लिए आई एक वृद्धा की मौत हो गई। घंटों से लाइन में खड़ी वृद्धा 15,000 रुपये की मांग रही थी, मगर कैशियर दो हजार से अधिक देने को तैयार नहीं था। आखिरकार वृद्धा की मौत होते ही कैशियर ने उसके बेटे को पंद्रह हजार रुपये का भुगतान कर दिया। वृद्धा की मौत से बैंक परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसका शव जिला अस्पताल भेजवाया।

गुरुवार को एसबीआई की मुख्य शाखा में कोहंड़ौर इलाके के मंगापुर (हथसारा) गांव निवासी करमैता देवी (80) अपने बड़े बेटे रामकिशोर और बहू बिकना के साथ पेंशन के रुपये निकालने आई थी। करमैता ने पंद्रह हजार रुपये के लिए फार्म भरा था। काउंटर पर बैठा कैशियर उसे पंद्रह की बजाए सिर्फ दो हजार रुपये दे रहा था। करमैता और उसका बेटा रामकिशोर कैशियर से विनती करते रहे कि इलाज के लिए पंद्रह हजार रुपये चाहिए, मगर वह अपनी बात पर अड़ा रहा। इस बीच लाइन में खड़ी करमैता को अचानक चक्कर आया और वह गिर पड़ी। बेटा रामकिशोर जब तक उसे उठाता तब तक उसके प्राण पखेरू उड़ चुके थे। वृद्धा की मौत के बाद बैंक में हड़कंप मच गया। कैशियर ने तत्काल उसके बेटे को 15,000 हजार रुपये दे दिए। घटना की जानकारी मिलते ही आनन-फानन में सीओ सिटी, प्रभारी नगर कोतवाल समेत फोर्स मौके पर पहुंच गई। पुलिस वृद्धा के शव को जिला अस्पताल ले गई। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया।
विज्ञापन


मर के दिखाओ तो दूं पंद्रह हजार रुपये
मर के दिखाओ, तो दूं पंद्रह हजार रुपये.....। यह शब्द गुरुवार को काउंटर पर बैठे कैशियर के थे। एसबीआई की मुख्यशाखा में घंटे भर से लाइन में खड़ी करमैता और उसके बेटा रामकिशोर पेंशन के रुपये के लिए गिड़गिड़ाते रहे, मगर कैशियर ने एक न सुनी।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोहंड़ौर इलाके के मंगापुर (हथसारा) गांव निवासी करमैता देवी (80) के पति रामप्रसाद रेलवे से रिटायर होने बाद वर्ष 2003 दुनिया में छोड़ गए। करमैता देवी का बड़ा बेटा रामकिशोर गांव में जबकि छोटा बेटा कांधरपुर बाजार में घर बनवाकर रहता है। गुरुवार को करमैता देवी अपने बडे़ बेटे रामकिशोर और बहू बिकना के साथ एसबीआई की मुख्य शाखा में पेंशन लेने आई हुईं थीं।  बीमार चल रही करमैता रुपये नहीं होने के कारण इलाज नहीं करा पा रही थी। 30 नवंबर की रात खाते में पेंशन आते ही गुररुवार को वह बैंक पहुंच गईं, मगर कैशियर दो हजार  से अधिक रकम देने को तैयार नहीं था। जब वृद्धा बोली कि साहब रुपये नहीं देंगे तो हम इलाज के अभाव में मर जाएंगे, तो कैशियर ने कहा कि पहले मर के दिखाओ, बाद में देंगे पंद्रह हजार रुपये। अब नियति का खेल देखिए, इसके कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed