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दरोगा की गलती, बालक ने 13 दिन भुगती सजा
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 06 Jun 2015 11:29 PM IST
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मानिकपुर थाने में तैनात दरोगा की गलती की सजा बालक को भुगतनी पड़ी। करीब 13 दिन परिवार के लोगों से दूर रहने के बाद शनिवार को सीओ कुंडा के प्रयास से वह अपने पिता से मिल सका। इस मामले में एसपी ने दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया है। गढ़ी मानिकपुर निवासी लालचंद सोनकर फल बेचकर परिवार का गुजर बसर करता है। उसका तेरह वर्षीय बेटा शुभम गांव के प्राथमिक स्कूल में कक्षा पांच तक पढ़ा है। बताया गया कि 22 मई से वह मानिकपुर स्थित दुर्गा मिष्ठान भंडार पर काम कर रहा था। 24 मई को दुकान पर काम करने वाले एक कारीगर को दुकान मालिक गामा ने पीट दिया। उसने मामले की शिकायत की तो थाने पर मौजूद दरोगा केदारनाथ पांडेय उसकी दुकान पर पहुंचे।
पुलिस को देखते ही गामा भाग निकला। वहां मौजूद शुभम को वह थाने ले आए। दुकानदार ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन बात नही बनी। 25 मई को लालचंद थाने पर पहुंचा और बेटे को छोड़ने की मांग की, लेकिन दरोगा मनमानी करता रहा। शाम को उसे बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया। यहां से उसे बाल सुधार गृह सगरा भेज दिया गया। इस कार्रवाई की अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। बुधवार को शुभम के परिजन सीओ कुंडा कबींद्र मिश्र के पास पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी दी। प्रकरण जानने के बाद सीओ ने मानिकपुर एसओ शिवाकांत तिवारी से पूछताछ की तो वह अनभिज्ञता जताने लगे। दरोगा को अभिलेखों के साथ शुक्रवार को कार्यालय पर बुलाया, लेकिन वह आने के बजाय बिना अनुमति के अपने घर चला गया।
इससे नाराज सीओ ने दरोगा को फोन कर खरीखोटी सुनाई और एसओ को दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया। सीओ ने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी। एसपी बलिकरन सिंह यादव ने शुक्रवार की शाम दरोगा केदारनाथ पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया। शनिवार को सीओ मानिकपुर पुलिस को साथ लेकर बाल कल्याण समिति कार्यालय आए और आवश्यक कार्रवाई के बाद 13 दिनों से बिछड़े शुभम को पिता से मिलाने के लिए कोरम पूरा किया। बाल सुधार गृह से निकलते ही पिता को देख शुभम की आंखों से आंसू बह निकले। लालचंद भी खुद को रोक न सका। सीओ कुंडा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपी दरोगा के साथ जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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पुलिस को देखते ही गामा भाग निकला। वहां मौजूद शुभम को वह थाने ले आए। दुकानदार ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन बात नही बनी। 25 मई को लालचंद थाने पर पहुंचा और बेटे को छोड़ने की मांग की, लेकिन दरोगा मनमानी करता रहा। शाम को उसे बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया। यहां से उसे बाल सुधार गृह सगरा भेज दिया गया। इस कार्रवाई की अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। बुधवार को शुभम के परिजन सीओ कुंडा कबींद्र मिश्र के पास पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी दी। प्रकरण जानने के बाद सीओ ने मानिकपुर एसओ शिवाकांत तिवारी से पूछताछ की तो वह अनभिज्ञता जताने लगे। दरोगा को अभिलेखों के साथ शुक्रवार को कार्यालय पर बुलाया, लेकिन वह आने के बजाय बिना अनुमति के अपने घर चला गया।
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इससे नाराज सीओ ने दरोगा को फोन कर खरीखोटी सुनाई और एसओ को दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट लिखने का आदेश दिया। सीओ ने मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी। एसपी बलिकरन सिंह यादव ने शुक्रवार की शाम दरोगा केदारनाथ पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया। शनिवार को सीओ मानिकपुर पुलिस को साथ लेकर बाल कल्याण समिति कार्यालय आए और आवश्यक कार्रवाई के बाद 13 दिनों से बिछड़े शुभम को पिता से मिलाने के लिए कोरम पूरा किया। बाल सुधार गृह से निकलते ही पिता को देख शुभम की आंखों से आंसू बह निकले। लालचंद भी खुद को रोक न सका। सीओ कुंडा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। आरोपी दरोगा के साथ जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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