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एआरटीओ कार्यालय में बाबू और युवक में मारपीट
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:34 PM IST
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नगर कोतवाली के फुलवरिया स्थित एआरटीओ कार्यालय में शनिवार को एक युवक और बाबू के बीच मारपीट हो गई। मारपीट होती देख परिसर में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंचे शहर कोतवाल युवक को कोतवाली उठा लाए।
कर्यालय में लिपिक कृपाशंकर दुबे के पास महुली निवासी राजेश सिंह एक वाहन के पेपर को ट्रांसफर कराने का काम लेकर पहुंचा। जिसे लेकर दोनों बीच कहासुनी होने लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो राजेश व कृपाशंकर के बीच मारपीट शुरू हो गई। लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की लेकिन मारपीट बंद नहीं हुई। कार्यालय में लोग जमा हो गए। मौका पाकर कृपाशंकर ने कमरे से बाहर आकर दरवाजा बंद कर लिया और घटना की सूचना कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलने पर शहर कोतवाल बलिराम मिश्र पहुंचे। पुलिस ने बवाल करने वाले युवक को कमरे से बाहर निकालकर जमकर सबक सिखाया। बवाल की आशंका को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया। शहर कोतवाल ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय के लिपिक से मारपीट करने वाले युवक राजेश को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। अभी तक कर्मचारी ने तहरीर नहीं दी है।
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एआरटीओ कार्यालय में हुए बवाल के बाद कंट्रोल रूम की खबर पर कोतवाल बलिराम मिश्र पहुंच गए। आरोपी को पकड़कर कोतवाली के लिए निकले तो चीता मोबाइल और चौकी प्रभारी सिटी आ गए। कोतवाल ने सभी को फटकारते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में लेटलतीफी ठीक नहीं है। इसके बाद सिटी चौकी के पुलिसकर्मी शाम तक कार्यालय के बाहर डटे रहे।
एआरटीओ कार्यालय में आए दिन हंगामा होता है। बवाल के दौरान हंगामा करने वाले लोग कर्मचारियों के साथ ही दूसरों से भी मारपीट करने लगते हैं। फुलवरिया में कार्यालय शिफ्ट होने के बाद से बवाल बढ़ गया है। कार्यालय के भीतर और बाहर असलहों का प्रदर्शन, तमंचा के बल पर कर्मचारियों को धमकाने, सुरक्षा में लगे होमगार्ड को मारपीट कर फायरिंग करने की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
शहर कोतवाल बलिराम मिश्र ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में विवाद की जड़ वहां तैनात कर्मचारी ही हैं। वे दलालों के मार्फत से आने वालों के ही कार्य करते हैं। लेनदेन को लेकर ही दलालों व कर्मचारियों के बीच विवाद होता है। दूरदराज से आने वाले लोगों कोे बैरंग लौटना पड़ता है। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष विजय सिंह भी सारे विवादों की जड़ कर्मचारियों को ही ठहराते हैं। उनका आरोप है कि कर्मचारियों की वजह से ऐसी समस्या पैदा होती है। वहीं, पुलिस हिरासत में राजेश ने बताया कि उसे डेढ़ माह से एक वाहन के पेपर ट्रांसफर के लिए परेशान किया जा रहा है। अधिक रुपए की डिमांड के चलते उसका काम करने में पटल बाबू ना-नुकुर कर रहे थे। इसलिए विवाद की नौबत आई।
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कर्यालय में लिपिक कृपाशंकर दुबे के पास महुली निवासी राजेश सिंह एक वाहन के पेपर को ट्रांसफर कराने का काम लेकर पहुंचा। जिसे लेकर दोनों बीच कहासुनी होने लगी।
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प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो राजेश व कृपाशंकर के बीच मारपीट शुरू हो गई। लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की लेकिन मारपीट बंद नहीं हुई। कार्यालय में लोग जमा हो गए। मौका पाकर कृपाशंकर ने कमरे से बाहर आकर दरवाजा बंद कर लिया और घटना की सूचना कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलने पर शहर कोतवाल बलिराम मिश्र पहुंचे। पुलिस ने बवाल करने वाले युवक को कमरे से बाहर निकालकर जमकर सबक सिखाया। बवाल की आशंका को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया। शहर कोतवाल ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय के लिपिक से मारपीट करने वाले युवक राजेश को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। अभी तक कर्मचारी ने तहरीर नहीं दी है।
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एआरटीओ कार्यालय में हुए बवाल के बाद कंट्रोल रूम की खबर पर कोतवाल बलिराम मिश्र पहुंच गए। आरोपी को पकड़कर कोतवाली के लिए निकले तो चीता मोबाइल और चौकी प्रभारी सिटी आ गए। कोतवाल ने सभी को फटकारते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में लेटलतीफी ठीक नहीं है। इसके बाद सिटी चौकी के पुलिसकर्मी शाम तक कार्यालय के बाहर डटे रहे।
एआरटीओ कार्यालय में आए दिन हंगामा होता है। बवाल के दौरान हंगामा करने वाले लोग कर्मचारियों के साथ ही दूसरों से भी मारपीट करने लगते हैं। फुलवरिया में कार्यालय शिफ्ट होने के बाद से बवाल बढ़ गया है। कार्यालय के भीतर और बाहर असलहों का प्रदर्शन, तमंचा के बल पर कर्मचारियों को धमकाने, सुरक्षा में लगे होमगार्ड को मारपीट कर फायरिंग करने की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
शहर कोतवाल बलिराम मिश्र ने बताया कि एआरटीओ कार्यालय में विवाद की जड़ वहां तैनात कर्मचारी ही हैं। वे दलालों के मार्फत से आने वालों के ही कार्य करते हैं। लेनदेन को लेकर ही दलालों व कर्मचारियों के बीच विवाद होता है। दूरदराज से आने वाले लोगों कोे बैरंग लौटना पड़ता है। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष विजय सिंह भी सारे विवादों की जड़ कर्मचारियों को ही ठहराते हैं। उनका आरोप है कि कर्मचारियों की वजह से ऐसी समस्या पैदा होती है। वहीं, पुलिस हिरासत में राजेश ने बताया कि उसे डेढ़ माह से एक वाहन के पेपर ट्रांसफर के लिए परेशान किया जा रहा है। अधिक रुपए की डिमांड के चलते उसका काम करने में पटल बाबू ना-नुकुर कर रहे थे। इसलिए विवाद की नौबत आई।