{"_id":"5ad8ec184f1c1b5f098b5766","slug":"19-people-including-the-then-bsa-panel-assistant-will-be-sued","type":"story","status":"publish","title_hn":"तत्कालीन बीएसए, पटल सहायक समेत 19 लोगों पर होगा मुकदमा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
तत्कालीन बीएसए, पटल सहायक समेत 19 लोगों पर होगा मुकदमा
Updated Fri, 20 Apr 2018 01:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेसिक शिक्षा विभाग में 19 फर्जी शिक्षकों के नामों का खुलासा होने पर शासन ने पूरी पत्रावली तलब कर ली है। इस मामले में तत्कालीन बीएसए, पटल सहायक समेत 19 फर्जी शिक्षकों पर जल्द ही मुकदमा दर्ज होगा। माना जा रहा है फर्जीवाडे़ में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
जिले के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षामित्रों के समायोजन में खेल करके फर्जी अध्यापकों की तैनाती के मामले में शासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दोपहर बाद शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जानकारी ली। शासन ने आननफानन में फाइल तलब करते हुए तत्कालीन बीएसए, पटल सहायक और फर्जीवाडे़ में शामिल 19 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। शासन ने फर्जीवाडे़ में शामिल प्रत्येक आरोपियों को कितना-कितना वेतन और एरियर का भुगतान किया गया है, उसका भी विवरण तलब किया है।
विभागीय जानकारों का मानें तो 19 फर्जी शिक्षकों में अधिकांश विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सगे-संबंधी हैं। सहायक अध्यापकों को अपनी दस्तखत से नियुक्ति पत्र देेने वाले तत्कालीन बीएसए के कई करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।
विज्ञापन
दरअसल, इस फर्जीवाडे़ में खेल करने के लिए एक बड़ी योजना बनाई गई। शिक्षामित्रों को समायोजित कर जब सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई, तो नियुक्ति पत्र में इस कालम का छोड़ दिया गया कि पूर्व में किस स्कूल में तैनाती थी। इसी का लाभ तत्कालीन बीएसए ने उठाया और जिन लोगों की तैनाती हुई उनके असली और नकली होने का साक्ष्य नहीं मिल पाया। 26 माह तक 19 फर्जी शिक्षक विभाग में जमा रहकर वेतन लेते रहे। अगर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द न हुआ होता तो शायद ही इस फर्जीवाड़े पर से पर्दा उठ पाता। फिलहाल अब अधिकारियों की नजरें फर्जीवाडे़ के गिरोह को उजागर करने पर टिकी हुई हैं।
बीएसए ने अब तक 48 फर्जी शिक्षकों को किया बाहर
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों की तैनाती कराने के लिए एक गिरोह सक्रिय है, जो बेरोजगार लोगों से मोटी रकम एेंठकर सहायक अध्यापक बनाने का ठेका लेता है। बीएसए बीएन सिंह के कार्यकाल में 48 फर्जी शिक्षकों को अब तक बाहर किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान के फर्जी अभिलेख मिलने पर 29 और समायोजन में खेल करके सहायक अध्यापक बनने वाले 19 लोग शामिल हैं। मगर दुर्भाग्य यह रहा कि फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया है।
दो करोड़ रुपये की कैसे होगी भरपाई
जिले में फर्जी तरीके से सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती वाले 19 लोगों ने 26 माह के कार्यकाल में 1,97,60,000 रुपये वेतन के रूप में लिए हैं। सवाल यह उठता है कि इन रुपयों की भरपाई विभाग कैसे करेगा।
बीईओ और वेतन लिपिक की थी मिलीभगत
फर्जी सहायक अध्यापकों के वेतन भुगतान में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी और वेतन लिपिक की भी मिलीभगत थी। इन लोगों ने मोटी रकम ऐंठने के बाद इस बात का प्रमाण लेना उचित नहीं समझा कि पूर्व में किस स्कूल में तैनाती थी। अगर सहायक अध्यापकों के पूर्व स्कूलों की खोज की जाती तो फर्जीवाडे़ का खुलासा उसी समय हो जाता, मगर मिलीभगत के चलते ऐसा नहीं हुआ।
फर्जीवाडे़ की जानकारी शासन को होते ही पूरी पत्रावली तलब कर ली गई है। मामले की जांचकर आरोपियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। कार्यालय में संलिप्त कर्मचारियों की जांच कराई जा रही है।
बीएन सिंह, बीएसए।
विज्ञापन
जिले के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षामित्रों के समायोजन में खेल करके फर्जी अध्यापकों की तैनाती के मामले में शासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दोपहर बाद शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जानकारी ली। शासन ने आननफानन में फाइल तलब करते हुए तत्कालीन बीएसए, पटल सहायक और फर्जीवाडे़ में शामिल 19 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। शासन ने फर्जीवाडे़ में शामिल प्रत्येक आरोपियों को कितना-कितना वेतन और एरियर का भुगतान किया गया है, उसका भी विवरण तलब किया है।
विज्ञापन
विभागीय जानकारों का मानें तो 19 फर्जी शिक्षकों में अधिकांश विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सगे-संबंधी हैं। सहायक अध्यापकों को अपनी दस्तखत से नियुक्ति पत्र देेने वाले तत्कालीन बीएसए के कई करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।
विज्ञापन
दरअसल, इस फर्जीवाडे़ में खेल करने के लिए एक बड़ी योजना बनाई गई। शिक्षामित्रों को समायोजित कर जब सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई, तो नियुक्ति पत्र में इस कालम का छोड़ दिया गया कि पूर्व में किस स्कूल में तैनाती थी। इसी का लाभ तत्कालीन बीएसए ने उठाया और जिन लोगों की तैनाती हुई उनके असली और नकली होने का साक्ष्य नहीं मिल पाया। 26 माह तक 19 फर्जी शिक्षक विभाग में जमा रहकर वेतन लेते रहे। अगर शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द न हुआ होता तो शायद ही इस फर्जीवाड़े पर से पर्दा उठ पाता। फिलहाल अब अधिकारियों की नजरें फर्जीवाडे़ के गिरोह को उजागर करने पर टिकी हुई हैं।
बीएसए ने अब तक 48 फर्जी शिक्षकों को किया बाहर
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों की तैनाती कराने के लिए एक गिरोह सक्रिय है, जो बेरोजगार लोगों से मोटी रकम एेंठकर सहायक अध्यापक बनाने का ठेका लेता है। बीएसए बीएन सिंह के कार्यकाल में 48 फर्जी शिक्षकों को अब तक बाहर किया जा चुका है। सत्यापन के दौरान के फर्जी अभिलेख मिलने पर 29 और समायोजन में खेल करके सहायक अध्यापक बनने वाले 19 लोग शामिल हैं। मगर दुर्भाग्य यह रहा कि फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया है।
दो करोड़ रुपये की कैसे होगी भरपाई
जिले में फर्जी तरीके से सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती वाले 19 लोगों ने 26 माह के कार्यकाल में 1,97,60,000 रुपये वेतन के रूप में लिए हैं। सवाल यह उठता है कि इन रुपयों की भरपाई विभाग कैसे करेगा।
बीईओ और वेतन लिपिक की थी मिलीभगत
फर्जी सहायक अध्यापकों के वेतन भुगतान में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी और वेतन लिपिक की भी मिलीभगत थी। इन लोगों ने मोटी रकम ऐंठने के बाद इस बात का प्रमाण लेना उचित नहीं समझा कि पूर्व में किस स्कूल में तैनाती थी। अगर सहायक अध्यापकों के पूर्व स्कूलों की खोज की जाती तो फर्जीवाडे़ का खुलासा उसी समय हो जाता, मगर मिलीभगत के चलते ऐसा नहीं हुआ।
फर्जीवाडे़ की जानकारी शासन को होते ही पूरी पत्रावली तलब कर ली गई है। मामले की जांचकर आरोपियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। कार्यालय में संलिप्त कर्मचारियों की जांच कराई जा रही है।
बीएन सिंह, बीएसए।