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बेल्हा ने अमन के साथ सुना अयोध्या का फैसला

Sun, 10 Nov 2019 12:01 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:01 AM IST
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belha listened the decission on ram mandir with peace
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सामाजिक सौहार्द का संदेश देते सर्व समाज के लोग। - फोटो : PRATAPGARH
बेल्हा ने अमन के साथ सुना अयोध्या का फैसला
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खुशी न गम, अपनी रौ में रमा रहा शहर, साप्ताहिक बंदी के बाद भी सड़कों पर रही भीड़भाड़
प्रतापगढ़। अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बेल्हा के लोगों ने न सिर्फ अमन-चैन से सुना बल्कि, उसका खैरमकदम भी किया। देश के सबसे बड़े विवाद पर सर्वोच्च अदालत के निर्णय को हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों ने तहे दिल से स्वीकार किया। कोर्ट के फैसले को सर्वोपरि बताया। इतना ही नहीं फैसले के बाद कहीं किसी ने खुशी या गम का इजहार नहीं किया। शहर में सार्वजनिक चर्चा करने से भी लोग बचते नजर आए। सिर्फ इस बात का जिक्र था कि फैसला आ गया। घरों में सुप्रीमकोर्ट का निर्णय जानने के लिए लोग टीवी से जरूर चिपके रहे लेकिन, शहर रोजाना की तरह शहर भी अपनी रफ्तार से दौड़ता रहा। फैसले से इतर लोग अपनी रौ में रमे रहे। हर दिन की तरह रोजमर्रा के काम को लेकर भागदौड़ मची रही। साप्ताहिक बंदी होने के बाद भी सड़कों पर वाहन और भीड़भाड़ दिखी।
शनिवार को सुबह नींद खुलने के बाद हर किसी को अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर आने वाले सुप्रीमकोर्ट के फैसले का इंतजार था। शनिवार को साप्ताहिक बंदी और स्कूल कालेजों के बंद होने के कारण लोग घरों में ही रहे। सुबह दस बजे तक कोर्ट का फैसला सुनने के लिए लोग टीवी से चिपक गए। शहर में कुछ जगहों पर लोग मोबाइल पर भी कोर्ट के फैसले के बारे में जानकारी जुटाते रहे। करीब 11 बजे विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को सौंपने के फैसले की जानकारी होने के बाद लोग अपने-अपने काम में जुट गए। फैसले को लेकर कहीं किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं हुई। घरों से बाहर निकलने के बाद लोग इस पर चर्चा करने से बचते दिखे। चाय-पान की दुकानों पर भी कहीं फैसले को लेकर बहस नहीं छिड़ी। रोज की अपेक्षा शहर में भीड़भाड़ कम थी, लेकिन लोग अपने काम में लगे रहे। साप्ताहिक बंदी के बाद भी जगह-जगह दुकानें खुली हुई थीं। भंगवाचुंगी तिराहे पर रोजाना की तरह वाहनों की आवाजाही लगी हुई थी। चौक में सुबह हर दिन की तरह मजदूरों और आम लोगों की भीड़ लगी थी। सदर बाजार तिराहे पर भी चहल-पहल थी। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर भी हर दिन की तरह मुसाफिर बस और ट्रेन पकडने की जल्दी में दिखे। अंबेडकर चौराहा, तेलिया चौराहा, पुलिस लाइन तिराहा, पीडब्ल्यूडी और ट्रेजरी चौराहे पर रोजाना की तरह दुकानें खुली थीं। लोगों की आवाजाही लगी थी। बेल्हा देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पूजन-अर्चन के लिए आने का क्रम लगा रहा। चिलबिला में साप्ताहिक बंदी न होने के कारण सबसे ज्यादा चहल-पहल रही। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले थे और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी थी। अयोध्या पर आए फैसले के बजाए लोगों को अपने रोजमर्रा के कामों की चिंता थी। रामजन्म भूमि विवाद पर आए कोर्ट के फैसले पर चर्चा करने के बजाए लोग अपने कामों के लिए भागदौड़ करते नजर आए। चौराहों पर एहतियात के तौर पर लगाए गए पुलिसकर्मी भी आराम फरमाते रहे। बीच-बीच दंगा नियंत्रण वाहन और पुलिस की हूटर लगी गाड़ियां दौड़ती रहीं, लेकिन लोगों पर इसका कोई असर नहीं था।
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सब्जीमंडी में पसरा रहा सन्नाटा
शनिवार को सरकारी कार्यालयों में अवकाश, स्कूल-कालेज बंद होने और साप्ताहिक बंदी के कारण वैसे तो शहर में हर जगह भीड़भाड़ कम थी, लेकिन सब्जीमंडी में पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। आम दिनों में इस सड़क से वाहन तो दूर लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है पर, शनिवार को सडक़ पूरी तरह खाली रही। सडक़ की पटरियों तक सब्जी की दुकानें लगाने वाले दुकानदार नदारद थे। इस सड़क पर पड़ने वाले सभी प्रमुख प्रतिष्ठान भी बंद रहे। हालत यह रही कि सब्जी मंडी की सडक़ पर बच्चे क्रिकेट खेलते नजर आए।

कचहरी के बगल दुकानें बंद होने से पसरा रहा सन्नाटा।

कचहरी के बगल दुकानें बंद होने से पसरा रहा सन्नाटा।- फोटो : PRATAPGARH

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