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Pratapgarh News: बेल्हा के हर कोने में झोलाछाप चिकित्सक कर रहे इलाज, 12 पर ही कार्रवाई का साहस जुटा सका स्वास्थ्य विभाग
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Belha 40 counterfeiters marked, FIR against 12
जिले के हर कोने में झोलाछाप दुकान सजाए बैठे हैं। मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करते हुए उनका इलाज कर रहे हैं। सरकार के निर्देश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग महज 40 झोलाछाप को चिन्हित कर सका है। इनमें सिर्फ 12 के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कराया जा सका है।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचल की बाजारों में झोलाछाप बिना डिग्री और प्रशिक्षण के गंभीर मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद दवा दे रहे हैं। मरीजों से झोलाछाप फीस भले ही नहीं लेते पर अति गंभीर मरीज को लेकर सेटिंग वाले निजी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शासन ने जिले के झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी से ब्योरा मांगा है। जनपद में कितने झोलाछाप डॉक्टर हैं। इनके पास कौन-कौन सी डिग्री है। मरीजों को कौन सी दवा मुहैया कराते हैं। कितनी फीस लेते हैं।
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शासन का निर्देश मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमा हैरान है। आनन-फानन में गांव-गांव झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित कर खोजबीन शुरू कर दी गई। अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी के अनुसार अभी तक 40 झोलाछाप को चिन्हित किया गया है। इनमें से 12 झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। बाकी झोलाछाप को नोटिस दो बार भेजी गई है। जवाब न देने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
रानीगंज और जेठवारा में हैं ज्यादा झोलाछाप
रानीगंज और जेठवारा इलाके में सबसे ज्यादा झोलाछाप हैं। रानीगंज में एक झोलाछाप आशा का पति है। वह ब्रेन हैमरेज का इलाज करता है। बीरापुर में एक झोलाछाप बाल रोग विशेषज्ञ बनकर बच्चों का इलाज कर रहा है। वहीं दुर्गागंज और जेठवारा, डेरवा सहित अन्य ग्रामीणांचल में झोलाछाप बिना डिग्री के मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगातार एक डिप्टी सीएमओ अपर शोध अधिकारी के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। बगैर डिग्री व डिप्लोमा के मरीजों का इलाज करने वाले झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस साल 12 झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। डॉ. जीएम शुक्ला, सीएमओ।
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शहर से लेकर ग्रामीण अंचल की बाजारों में झोलाछाप बिना डिग्री और प्रशिक्षण के गंभीर मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद दवा दे रहे हैं। मरीजों से झोलाछाप फीस भले ही नहीं लेते पर अति गंभीर मरीज को लेकर सेटिंग वाले निजी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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शासन ने जिले के झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी से ब्योरा मांगा है। जनपद में कितने झोलाछाप डॉक्टर हैं। इनके पास कौन-कौन सी डिग्री है। मरीजों को कौन सी दवा मुहैया कराते हैं। कितनी फीस लेते हैं।
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शासन का निर्देश मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमा हैरान है। आनन-फानन में गांव-गांव झोलाछाप डॉक्टरों को चिन्हित कर खोजबीन शुरू कर दी गई। अपर शोध अधिकारी आरजी चौधरी के अनुसार अभी तक 40 झोलाछाप को चिन्हित किया गया है। इनमें से 12 झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। बाकी झोलाछाप को नोटिस दो बार भेजी गई है। जवाब न देने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
रानीगंज और जेठवारा में हैं ज्यादा झोलाछाप
रानीगंज और जेठवारा इलाके में सबसे ज्यादा झोलाछाप हैं। रानीगंज में एक झोलाछाप आशा का पति है। वह ब्रेन हैमरेज का इलाज करता है। बीरापुर में एक झोलाछाप बाल रोग विशेषज्ञ बनकर बच्चों का इलाज कर रहा है। वहीं दुर्गागंज और जेठवारा, डेरवा सहित अन्य ग्रामीणांचल में झोलाछाप बिना डिग्री के मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगातार एक डिप्टी सीएमओ अपर शोध अधिकारी के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं। बगैर डिग्री व डिप्लोमा के मरीजों का इलाज करने वाले झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस साल 12 झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। डॉ. जीएम शुक्ला, सीएमओ।