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परीक्षा देने के दो साल बाद भी नहीं आया बीएड का रिजल्ट
प्रतापगढ़
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:06 AM IST
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बीएड करने की आस मन में संजोए सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। दो साल पहले बीएड में दाखिला लिया। परीक्षा भी हो गई, लेकिन अब तक परीक्षाफल नहीं आ सका है। प्रशिक्षु इधर-उधर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है।
2013-14 में हुई बीएड की काउंसलिंग में दाखिले से काफी छात्र छूट गए थे। विद्यालयों में काफी सीटें भी बच गई थीं। इसके चलते न्यायालय ने छूटे छात्रों से खाली सीटें भरने का आदेश दिया था। इस पर इन छात्रों ने दाखिले ले लिए। इसके बाद एडमिट कार्ड और परीक्षा के लिए भी कोर्ट को ही आदेश करना पड़ा था। हालांकि परीक्षा देने के बाद भी इन छात्रों का परीक्षाफल नहीं आया। वह विद्यालय जाते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि परीक्षा कराने का आदेश उन्हें मिला था इसलिए उनकी परीक्षा करा दी गई। परीक्षाफल जारी होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी। दो साल से बीएड का प्रशिक्षण लेने के बाद भी प्रशिक्षुओं को अब तक परीक्षा फल नहीं मिल पाया है। क्षेत्र के राजेश पांडेय, रीना देवी, शिवचंद्र सरोज, रुचि सिंह, सुचि सिंह, धर्मेंद्र मौर्य, रंजना वर्मा, कनक, नीलम, राकेश पटेल, रामपाल, फूलचंद्र सहित सैकड़ों ऐसे प्रशिक्षु हैं जो परीक्षाफल के लिए चक्कर काट रहे हैं। प्रशिक्षुओं का कहना है कि रिजल्ट न आने से किसी भी अन्य कोर्स को करने में दिक्कत हो रही है। टीजीटी, टेट आदि का फार्म भी नहीं डाल पा रहे हैं। यही नहीं लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी हाथ में कुछ भी नहीं है।
इस बारे में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन बंद मिला। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो.एसएन शुक्ला ने बताया कि इस बारे में अभी पूरी तरह से जानकारी नहीं है। यह कोर्ट का मामला है। विद्यालयों में गलत तरीके से एडमीशन होने के कारण ऐसा हो सकता है। फिलहाल इसके बारे में जानकारी की जाएगी।
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2013-14 में हुई बीएड की काउंसलिंग में दाखिले से काफी छात्र छूट गए थे। विद्यालयों में काफी सीटें भी बच गई थीं। इसके चलते न्यायालय ने छूटे छात्रों से खाली सीटें भरने का आदेश दिया था। इस पर इन छात्रों ने दाखिले ले लिए। इसके बाद एडमिट कार्ड और परीक्षा के लिए भी कोर्ट को ही आदेश करना पड़ा था। हालांकि परीक्षा देने के बाद भी इन छात्रों का परीक्षाफल नहीं आया। वह विद्यालय जाते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि परीक्षा कराने का आदेश उन्हें मिला था इसलिए उनकी परीक्षा करा दी गई। परीक्षाफल जारी होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाएगी। दो साल से बीएड का प्रशिक्षण लेने के बाद भी प्रशिक्षुओं को अब तक परीक्षा फल नहीं मिल पाया है। क्षेत्र के राजेश पांडेय, रीना देवी, शिवचंद्र सरोज, रुचि सिंह, सुचि सिंह, धर्मेंद्र मौर्य, रंजना वर्मा, कनक, नीलम, राकेश पटेल, रामपाल, फूलचंद्र सहित सैकड़ों ऐसे प्रशिक्षु हैं जो परीक्षाफल के लिए चक्कर काट रहे हैं। प्रशिक्षुओं का कहना है कि रिजल्ट न आने से किसी भी अन्य कोर्स को करने में दिक्कत हो रही है। टीजीटी, टेट आदि का फार्म भी नहीं डाल पा रहे हैं। यही नहीं लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी हाथ में कुछ भी नहीं है।
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इस बारे में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन बंद मिला। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो.एसएन शुक्ला ने बताया कि इस बारे में अभी पूरी तरह से जानकारी नहीं है। यह कोर्ट का मामला है। विद्यालयों में गलत तरीके से एडमीशन होने के कारण ऐसा हो सकता है। फिलहाल इसके बारे में जानकारी की जाएगी।
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