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ठेकेदारों से सेटिंग करके अधिकारी हो रहे मालामाल, सिंचाई विभाग के तीन डिवीजन में सिल्ट

Wed, 01 Dec 2021 11:13 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 11:13 AM IST
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Arbitrary: Online order, tender fired offline
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सिंचाई विभाग में नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर अफसर ठेकेदारों से सेटिंग करके मालामाल हो रहे हैं। नहरों की सिल्ट सफाई के लिए शासन ने 3.46 करोड़ रुपये जारी करके ऑनलाइन टेंडर करने को कहा था, मगर अधिकारियों ने अपने करीबियों को ठेका देने के लिए ऑफलाइन टेंडर कर दिया।
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इससे उन्हीं ठेकेदारों को टेंडर निकलने की जानकारी हुई, जिनकी सेटिंग थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि एक ही विभाग के तीन डिवीजन ने ऑफलाइन टेंडर निकाला, जबकि एक डिवीजन में ऑनलाइन टेंडर निकाला गया। जिन ठेकेदारों ने आनलाइन टेंडर डाला था, वह तो अभी कार्य करा रहे हैं, जबकि ऑफलाइन टेंडर डालने वाले ठेकेदारों का कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है।
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जिले की नहरों की सिल्ट सफाई करने के लिए के लिए 3.46 करोड़ रुपये मिले हैं। 219 नहरों की सिल्ट सफाई कराने के लिए शासन ने नवंबर माह तक का समय दिया था। सिंचाई विभाग के चार खंडों में से तीन खंडों ने ऑफलाइन टेंडर जारी करके चहेते ठेकेदारों को सिल्ट सफाई की जिम्मेदारी सौंप दी। जबकि सिंचाई खंड दो ने आनलाइन टेंडर जारी किया। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिन ठेकेदारों ने आनलाइन टेंडर डाला था, वह अभी नहरों की सिल्ट सफाई करा रहे हैं।
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जबकि जिन ठेकेदारों ने ऑफलाइन टेंडर डाला था, वे सिल्ट सफाई का कार्य पूरा होने का दावा कर रहे हैं। दरअसल, ऑफलाइन सिल्ट सफाई में ठेकेदारों ने जमकर खेल किया है। अफसरों की मिलीभगत के चलते ठेकेदारों ने बगैर सफाई कराए ही पुरानी फोटो और वी डियो अ धिकारियों को सौंप दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन ठेकेदारों ने सिल्ट सफाई का कार्य कराया है, उन्हें तो अभी भुगतान किया नहीं गया है। जब भुगतान करने की बारी आएगी, तो मामले की जांच भी कर ली जाएगी।
21 नहरों का दबा लिया टेंडर
बाबागंज और कुंडा की 21 ऐसी नहरें हैं, जिनके सिल्ट सफाई के लिए ऑफलाइन या ऑनलाइन टेंडर ही नहीं किया गया। अफसरों ने इन नहरों पर वर्कआर्डर के माध्यम से सफाई कराने का निर्णय लिया है। दरअसल, वर्कआर्डर में अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों को काम देकर अपना काम निकालेंगे।

नहरों की सिल्ट सफाई का टेंडर कराने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प दिए गए थे। जिसको जो पसंद आया, उसी के मुताबिक टेंडर जारी किया गया है। फिलहाल अभी भुगतान किसी का नहीं किया गया है, जांच कराने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। -अरविंद वर्मा, अधिशाषी अभियंता, सिंचाई विभाग
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