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एएनएम हैं नहीं,किराए के भवन में कागज पर चल रहा 120 एएनएम सेंटर
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प्रतापगढ़। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शासन ने मुख्य चिकित्साधिकारी को किराए के भवनों में 120 नए एएनएम सेंटर संचालित करने का आदेश दिया था। शासन के आदेश के बाद सीएमओ ने सब सेंटर का संचालन शुरू करा दिया। मगर यहां न एएनएम की तैनाती की गई है और न ही दवाएं और किसी प्रकार के उपकरण खरीदे गए हैं।
जिले की 38 लाख की आबादी के लिए 27 सीएचसी, पांच ब्लॉक स्तरीय पीएचसी और 56 पीएचसी का संचालन हो रहा है। इसके बाद भी बहुत से ऐसे इलाके हैं, जहां के लोगों को इलाज कराने के लिए दूर के अस्पताल जाना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जिले में 120 नए एएनएम सेंटरों का संचालन करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को किराए के भवन चिह्नित करने के निर्देश दिए। विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि भवन चिह्नित करने के बाद सीएमओ ने शासन को रिपोर्ट भेज दी। भवन का किराया भी दिया जाने लगा। जबकि एएनएम सेंटर का संचालन कागजों पर हो रहा है।
हर एएनएम को सीएमओ ने दो से तीन सेंटरों की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में अब दोनों स्थानों पर कार्य नहीं हो पा रहा है। एएनएम के पदों पर शासन ने भर्ती निकाली थी, मगर अभी तक तैनाती नहीं हो सकी। पहले ही कई सब सेंटर एएनएम की तैनाती नहीं होने के कारण बंद हो गए। किराये के भवनों में महज कागज पर एएनएम सेंटरों का संचालन किया जा रहा है।
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दोपहर बाद ही एएनएम सेंटरों में लटक जाता है ताला
शासन का आदेश है कि सब सेंटर पर 24 घंटे एएनएम मौजूद रहेंगी। गर्भवती महिलाओं की जांच के साथ समय-समय पर टीकाकरण और दिक्कत होने पर प्राथमिक उपचार करने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं प्राथमिक तौर पर एएनएम सेंटर पर ही प्रसव भी करवाने के निर्देश हैं। लेकिन, ज्यादातर एएनएम सेंटरों में दोपहर बाद ताला लटक जाता है। एएनएम सेंटर छोड़कर घर चली जाती हैं। पूछे जाने पर उनके पास कई बहाने होते हैं। कभी मीटिंग में व्यस्त होने तो कभी सीएमओ कार्यालय या फिर सीएचसी अथवा कभी प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल पहुंचाने का हवाला देती हैं। जबकि हकीकत यह है कि रात में अधिकांश एएनएम सेंटरों में ताला लटकता रहता है।
किराए के भवनों में संचालित हो रहे सब सेंटरों में जल्द ही संविदा पर एएनएम की तैनाती हो जाएगी। इसके लिए शासन स्तर से प्रयास जारी हैं। कुछ उपकरण खरीदकर सेंटरों में रखवा दिए गए हैं। कुछ के लिए टेंडर निकाले गए हैं। रात में एएनएम के गायब रहने पर कार्रवाई की जाएगी।
राजशेखर, डीपीएम
रात में निरीक्षण किया जाएगा। जो एएनएम सेंटर पर नहीं मिलेंगी, उनका वेतन रोक दिया जाएगा। यदि मरीजों को सहूलियत नहीं मिल रही है तो यह गलत है। प्रयास रहेगा शासन की ओर से मिलने वाली सभी सुविधाएं लोगों तक पहुंचाई जाएं।
डॉ. एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ
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जिले की 38 लाख की आबादी के लिए 27 सीएचसी, पांच ब्लॉक स्तरीय पीएचसी और 56 पीएचसी का संचालन हो रहा है। इसके बाद भी बहुत से ऐसे इलाके हैं, जहां के लोगों को इलाज कराने के लिए दूर के अस्पताल जाना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जिले में 120 नए एएनएम सेंटरों का संचालन करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को किराए के भवन चिह्नित करने के निर्देश दिए। विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि भवन चिह्नित करने के बाद सीएमओ ने शासन को रिपोर्ट भेज दी। भवन का किराया भी दिया जाने लगा। जबकि एएनएम सेंटर का संचालन कागजों पर हो रहा है।
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हर एएनएम को सीएमओ ने दो से तीन सेंटरों की जिम्मेदारी दी है। ऐसे में अब दोनों स्थानों पर कार्य नहीं हो पा रहा है। एएनएम के पदों पर शासन ने भर्ती निकाली थी, मगर अभी तक तैनाती नहीं हो सकी। पहले ही कई सब सेंटर एएनएम की तैनाती नहीं होने के कारण बंद हो गए। किराये के भवनों में महज कागज पर एएनएम सेंटरों का संचालन किया जा रहा है।
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दोपहर बाद ही एएनएम सेंटरों में लटक जाता है ताला
शासन का आदेश है कि सब सेंटर पर 24 घंटे एएनएम मौजूद रहेंगी। गर्भवती महिलाओं की जांच के साथ समय-समय पर टीकाकरण और दिक्कत होने पर प्राथमिक उपचार करने का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं प्राथमिक तौर पर एएनएम सेंटर पर ही प्रसव भी करवाने के निर्देश हैं। लेकिन, ज्यादातर एएनएम सेंटरों में दोपहर बाद ताला लटक जाता है। एएनएम सेंटर छोड़कर घर चली जाती हैं। पूछे जाने पर उनके पास कई बहाने होते हैं। कभी मीटिंग में व्यस्त होने तो कभी सीएमओ कार्यालय या फिर सीएचसी अथवा कभी प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल पहुंचाने का हवाला देती हैं। जबकि हकीकत यह है कि रात में अधिकांश एएनएम सेंटरों में ताला लटकता रहता है।
किराए के भवनों में संचालित हो रहे सब सेंटरों में जल्द ही संविदा पर एएनएम की तैनाती हो जाएगी। इसके लिए शासन स्तर से प्रयास जारी हैं। कुछ उपकरण खरीदकर सेंटरों में रखवा दिए गए हैं। कुछ के लिए टेंडर निकाले गए हैं। रात में एएनएम के गायब रहने पर कार्रवाई की जाएगी।
राजशेखर, डीपीएम
रात में निरीक्षण किया जाएगा। जो एएनएम सेंटर पर नहीं मिलेंगी, उनका वेतन रोक दिया जाएगा। यदि मरीजों को सहूलियत नहीं मिल रही है तो यह गलत है। प्रयास रहेगा शासन की ओर से मिलने वाली सभी सुविधाएं लोगों तक पहुंचाई जाएं।
डॉ. एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ