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दो बार पहले भी जेल जा चुके हैं अक्षय प्रताप

Wed, 23 Mar 2022 11:48 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 11:48 PM IST
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Akshay Pratap has gone to jail twice before
प्रतापगढ़। पूर्व मंत्री व कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया के करीबी निवर्तमान विधान परिषद सदस्य अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी पहले भी दो बार जेल जा चुके हैं। करीब 18 महीने तक वह प्रदेश की अलग-अलग जेलों में रह चुके हैं। अबकी वह तीसरी बार जेल गए हैं।
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जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया के करीबी और मूल रूप से अमेठी के जामो के रहने वाले अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी ने वर्ष 1997 में एमएलसी चुनाव जीतने के बाद अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। तमाम राजनैतिक झंझावतों के बीच राजाभैया के साथ अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी खड़े नजर आए। वैसे तो अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ अमेठी, रायबरेली के साथ ही प्रतापगढ़ में संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए। अधिकांश मुकदमों में वह दोषमुक्त हो चुके हैं। दो मुकदमों में उन्हें जेल जाना पड़ा था। दोनों बार प्रदेश में बसपा की सरकार थी। 26 जनवरी 2002 को कुंडा कोतवाली में दर्ज पोटा के मुकदमे में अक्षय प्रताप सिंह भी शामिल थे। जिसमें करीब डेढ़ साल तक वह जेल में रहे।
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2004 के लोकसभा चुनाव के कुछ दिनों पहले ही वह जमानत पर छूटे थे। इसके बाद वर्ष 2010 में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान कुंडा कोतवाली के बाहर हुए बवाल में भी गोपालजी राजाभैया के साथ जेल गए थे। करीब दो माह बाद वह जमानत पर छूटे थे। मार्च 2013 में हथिगवां के बलीपुर में प्रधान नन्हें सिंह, उसके भाई सुरेश व सीओ जियाउल हक की हत्या हो गई। सीओ जिया उल हक की हत्या में उनकी पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर राजाभैया, एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में घटना की सीबीआई जांच हुई। सीबीआई ने अक्षय प्रताप सिंह को क्लीनचिट दे दी। नगर कोतवाली में दर्ज फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में तीसरी बार वह जेल गए हैं। बुधवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसले में यह भी जिक्र किया है कि अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के खिलाफ वर्ष 1996 में नवाबगंज में धमकी, सुलतानपुर के जामो थाने में अलग-अलग तीन मुकदमे, रायबरेली व कुंडा कोतवाली में भी 1997 से पहले संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज थे।
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जेल में रहते हुआ जीता था एमएलसी का चुनाव
बसपा सरकार में पोटा के मामले में जेल में निरुद्घ अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी ने वर्ष 2003 में विधान परिषद का चुनाव लड़ा था। वह जेल से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। बसपा शासनकाल में भी वर्ष 2010 में सपा प्रत्याशी के रूप में अक्षय प्रताप सिंह पूरे प्रदेश में अकेले एमएलसी चुने गए थे। वर्ष 2016 के चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे अक्षय प्रताप सिंह निर्विरोध एमएलसी बने थे।
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