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Pratapgarh News: मार्च के बाद मेडिकल काॅलेज में दूरबीन विधि से होंगे ऑपरेशन
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हार्निया और पथरी के मरीजों का मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से ऑपरेशन होगा। उन्हें अब निजी अस्पताल या फिर प्रयागराज के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अप्रैल से मेडिकल कॉलेज में बगैर चीरा-टांके उनका ऑपरेशन होगा। शासन के आदेश पर अस्पताल प्रशासन दूरबीन विधि सर्जरी के सभी उपकरण खरीदने की तैयारी में है।
बीते तीन साल पहले जिला अस्पताल को उच्चीकृत करके मेडिकल काॅलेज बना दिया गया। यहां अभी भी काफी कुछ पुराने ढर्रे पर चल रहा है। सर्जरी विभाग भी इससे अछूता नहीं है। यहां पर सर्जन तो कई आ गए हैं, पर उपकरण नहीं हैं। जिला अस्पताल की तरह आज भी चीरा सिस्टम से ऑपरेशन होता है। मरीजों को कई दिन अस्पताल में बिताना पड़ता है।
यहां पर अब तक दूरबीन विधि से ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। अब मेडिकल कॉलेज में संसाधन धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं। यहां पर लेप्रोस्कोपिक सर्जन तो हैं, दूरबीन सिस्टम न होने से उनको भी पुराने तरीके से ऑपरेशन करना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुशवाहा ने कहा कि प्राचार्य रहे डॉ. वीके पांडेय ने शासन को पत्र भेजकर मरीजों के ऑपरेशन के दौरान प्रयोग में आने वाली दूरबीन विधि मशीन को खरीद के लिए अनुमति मांगी थी।
शासन ने अपनी अनुमति दे दी है। मशीन खरीद के लिए मार्च में बजट जारी होगा। अप्रैल में मशीन की खरीद होगी। इसके बाद ऑपरेशन करने में सहूलियत मिलेगी। मरीजों को ऑपरेशन के दूसरे दिन डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाएगा। मरीजों का समय बचेगा और बगैर चीरा व टांका ऑपरेशन भी हो जाएगा।
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बीते तीन साल पहले जिला अस्पताल को उच्चीकृत करके मेडिकल काॅलेज बना दिया गया। यहां अभी भी काफी कुछ पुराने ढर्रे पर चल रहा है। सर्जरी विभाग भी इससे अछूता नहीं है। यहां पर सर्जन तो कई आ गए हैं, पर उपकरण नहीं हैं। जिला अस्पताल की तरह आज भी चीरा सिस्टम से ऑपरेशन होता है। मरीजों को कई दिन अस्पताल में बिताना पड़ता है।
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यहां पर अब तक दूरबीन विधि से ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। अब मेडिकल कॉलेज में संसाधन धीरे-धीरे बढ़ाए जा रहे हैं। यहां पर लेप्रोस्कोपिक सर्जन तो हैं, दूरबीन सिस्टम न होने से उनको भी पुराने तरीके से ऑपरेशन करना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुशवाहा ने कहा कि प्राचार्य रहे डॉ. वीके पांडेय ने शासन को पत्र भेजकर मरीजों के ऑपरेशन के दौरान प्रयोग में आने वाली दूरबीन विधि मशीन को खरीद के लिए अनुमति मांगी थी।
शासन ने अपनी अनुमति दे दी है। मशीन खरीद के लिए मार्च में बजट जारी होगा। अप्रैल में मशीन की खरीद होगी। इसके बाद ऑपरेशन करने में सहूलियत मिलेगी। मरीजों को ऑपरेशन के दूसरे दिन डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाएगा। मरीजों का समय बचेगा और बगैर चीरा व टांका ऑपरेशन भी हो जाएगा।