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प्रशासकों ने खाली कर दिया प्रधानों का खजाना, सीडीओ ने तलब की फाइल
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ग्राम पंचायतों में नामित प्रशासकों ने प्रधानों का खजाना खाली कर दिया है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में पंद्रहवां वित्त आयोग और राज वित्त आयोग की धनराशि को पूरी तरह साफ कर दिया गया है। बगैर विकास कार्य कराए ही धनराशि निकालकर बंदरबांट करने में सदर ब्लाक के कर्मचारी आगे रहे हैं। मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ ने फाइल तलब कर जांच शुरू कर दी है। इधर, कालाकांकर में घपले में शामिल तीन लोगों के खिलाफ बीडीओ ने मुकदमा दर्ज कराया है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने सभी ब्लाकों में प्रशासक नामित करके वीडीओ और प्रशासक के नाम खाता संचालन करने का अधिकार दिया था। मनमानी पर उतरे वीडीओ और प्रशासकों ने बगैर विकास कार्य कराए ही रुपयों का आहरण कर लिया है। सदर विकास खंड के पूरेमाधव सिंह में 7.47 लाख रुपये के बाद नसीरपुर और बहलोलपुर, सरायवीरभद्र, कुसुमी और भुवालपुरकिला, सरायबहेलिया, चकबनतोड़ जगदीशपुर में भी लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है।
कालाकांकर विकास खंड में 5.05,840 लाख रुपये में घपले में शामिल मो. इस्लाम, मो. इश्तियाक, मो. इम्तियाज के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। सदर ब्लॉक में रुपये की बंदरबांट का मामला संज्ञान में आने के बाद सीडीओ ने संलिप्त लोगों का तबादला करने के साथ ही फाइल को अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारी अभी यह आकलन करने में लगे हैं, कि जिले में प्रशासकों के कार्यकाल में कितने रुपये निकाले गए हैं।
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प्रधानों को जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद निकाल लिए रुपये
वीडीओ और प्रशासकों ने आंखें बंद कर रुपये निकाले हैं। दो मई को प्रधानों के मतों की गणना हो रही थी तो दूसरी तरफ प्रशासक पंचायतों से रुपये साफ करने में जुटे। कई ग्राम पंचायत ऐसी हैं, जहां प्रधान के विजयी होने के बाद भी प्रशासकों ने डोंगल लगाकर रुपये निकाल लिए हैं। जबकि गांव में विकास कार्य एक रुपये का भी नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायतों में रुपये निकालने की जो शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गहनता से जांच कराई जा रही है। दोषी कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों से रिकवरी करने के साथ ही मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
प्रभाष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने सभी ब्लाकों में प्रशासक नामित करके वीडीओ और प्रशासक के नाम खाता संचालन करने का अधिकार दिया था। मनमानी पर उतरे वीडीओ और प्रशासकों ने बगैर विकास कार्य कराए ही रुपयों का आहरण कर लिया है। सदर विकास खंड के पूरेमाधव सिंह में 7.47 लाख रुपये के बाद नसीरपुर और बहलोलपुर, सरायवीरभद्र, कुसुमी और भुवालपुरकिला, सरायबहेलिया, चकबनतोड़ जगदीशपुर में भी लाखों रुपये के गोलमाल का मामला सामने आया है।
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कालाकांकर विकास खंड में 5.05,840 लाख रुपये में घपले में शामिल मो. इस्लाम, मो. इश्तियाक, मो. इम्तियाज के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया है। सदर ब्लॉक में रुपये की बंदरबांट का मामला संज्ञान में आने के बाद सीडीओ ने संलिप्त लोगों का तबादला करने के साथ ही फाइल को अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारी अभी यह आकलन करने में लगे हैं, कि जिले में प्रशासकों के कार्यकाल में कितने रुपये निकाले गए हैं।
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प्रधानों को जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद निकाल लिए रुपये
वीडीओ और प्रशासकों ने आंखें बंद कर रुपये निकाले हैं। दो मई को प्रधानों के मतों की गणना हो रही थी तो दूसरी तरफ प्रशासक पंचायतों से रुपये साफ करने में जुटे। कई ग्राम पंचायत ऐसी हैं, जहां प्रधान के विजयी होने के बाद भी प्रशासकों ने डोंगल लगाकर रुपये निकाल लिए हैं। जबकि गांव में विकास कार्य एक रुपये का भी नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायतों में रुपये निकालने की जो शिकायतें मिल रही हैं, उनकी गहनता से जांच कराई जा रही है। दोषी कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों से रिकवरी करने के साथ ही मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
प्रभाष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी