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गंगाजल से गोवर्धन का हुआ अभिषेक
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Tue, 01 Nov 2016 11:40 PM IST
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गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। दिवाली के ठीक दूसरे दिन मनाया जाने वाला पर्व सोमवार को धूमधाम से मनाया गया। पंचामृत और गंगाजल से गोवर्धन पर्वत का अभिषेक होने के बाद भगवान इंद्र का घमंड चूर करने वाले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की गई।
सर्वोदय सद्भावना संस्थान ने आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भगवान सालिग्राम और गोपिंड से बने गोवर्धन का रीति रिवाज से पूजा हुई। पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया गया।
पूजन के उपरांत पं ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द रामानुजदास ने कहा कि भगवान इंद्र का घमंड चूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में सात दिन और सात रात अपने बाएँ हाथ की कनखी की उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर ग्वाल-बालों की रक्षा की। उन्होेंने कहा कि चतुर्भुज धारी भगवान श्री कृष्ण ही गोवर्धन हैं और गोवर्धन ही श्रीकृष्ण हैं। इस मौके पर आचार्य अतुलानंद, गणेश नारायण मिश्र, राजेंद्र शुक्ल, आलोक द्विवेदी, दिनकर आदि मौजूद रहे।
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सर्वोदय सद्भावना संस्थान ने आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में भगवान सालिग्राम और गोपिंड से बने गोवर्धन का रीति रिवाज से पूजा हुई। पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया गया।
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पूजन के उपरांत पं ओम प्रकाश पांडेय अनिरुध्द रामानुजदास ने कहा कि भगवान इंद्र का घमंड चूर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में सात दिन और सात रात अपने बाएँ हाथ की कनखी की उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर ग्वाल-बालों की रक्षा की। उन्होेंने कहा कि चतुर्भुज धारी भगवान श्री कृष्ण ही गोवर्धन हैं और गोवर्धन ही श्रीकृष्ण हैं। इस मौके पर आचार्य अतुलानंद, गणेश नारायण मिश्र, राजेंद्र शुक्ल, आलोक द्विवेदी, दिनकर आदि मौजूद रहे।
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