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गुस्से से ज्यादा चली थी सहानुभूति की लहर
Pratapgarh
Updated Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने के बाद 1977 में हुए चुनाव में जिले की जनता ने कांग्रेस के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। उस समय रूपनाथ सिंह यादव ने कांग्रेस को 1,49,320 वोटों से हराया था। यह कांग्रेस के खिलाफ जिले की जनता का ऐतिहासिक फैसला था। इसके बाद 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से पैदा हुई संवेदना में कांग्रेस ने यहां 2,32,507 वोटों से जीत दर्ज की। यह जीत जिले के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत साबित हुई।
आजादी के बाद के चुनावाें में जिले में कांग्रेस का बोलबाला था। 1952 और 1957 का चुनाव लगातार कांग्रेस ने जीता। 1962 में जनसंघ के टिकट पर जिले में बड़ा प्रभाव रखने वाले राजा अजीत प्रताप सिंह ने कांग्रेस का रथ रोका। हालांकि वह कांग्रेस उम्मीदवार पर 23,684 वोटाें से ही जीत दर्ज कर सके थे। 1967, 1971 में हुए अगले चुनाव फिर कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह ने जीते थे। 1977 के चुनाव में पूरे देश के साथ जिले में भी कांग्रेस के विरोध में लहर चल रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने से जनता उन्हें कुर्सी से बेदखल करने का फैसला कर चुकी थी। इस चुनाव में पब्लिक ने कांग्रेस के विरोध में फैसला सुनाया और जिले से जनता पार्टी समर्थित भारतीय लोकदल के उम्मीदवार रूपनाथ सिंह यादव को 1,49,320 वोटों से जिताया। रूपनाथ को 2,06,339 और कांग्रेस के दिनेश सिंह को मात्र 57,019 वोट ही मिल सके थे। यह जीत जिले के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी थी। इसके बाद 1980 में चुनाव हुआ तो कांग्रेस आई के अजीत प्रताप सिंह जीते। दूसरे नंबर पर जय सिंह थे जबकि राजा दिनेश सिंह तीसरे स्थान पर खिसक गए थे।
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जो लहर आई थी उसमें सभी विरोधी उड़ गए। जिले के लोकसभा चुनाव में संवेदना की यह ऐतिहासिक लहर थी। कांग्रेस के राजा दिनेश प्रताप सिंह को 2,79,354 वोट मिले। राजा दिनेश इस चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी लोकदल के रामदेव से 2,32,507 वोटों से जीते थे। इस जीत का रेकार्ड आज तक बरकरार है। न तो राम लहर इसे तोड़ सकी और न ही आरक्षण व बोफोर्स दलाली का मुद्दा। बाद के चुनाव विकास, गुंडागर्दी जैसे स्थानीय मुद्दों पर हुए। उनमें सिर्फ मामूली अंतर से हार-जीत हो सकी।
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जिले का लोकसभा चुनाव परिणाम
वर्ष जीते वोट पार्टी हारे वोट पार्टी
1. 1952 मुनीश्वर दत्त 77,668 कांग्रेस पशुपति प्र. सिंह 23,518 जनसंघ
2. 1957 मुनीश्वर दत्त 78,399 कांग्रेस हरिशरण सिंह 65,773 निर्दल
3. 1962 अजीत प्र. सिंह 96,483 जनसंघ मुनीश्वर दत्त 72,779 कांग्रेस
4. 1967 दिनेश सिंह 1,02,825 कांग्रेस बी सिंह 81,133 एसएसपी
5. 1971 दिनेश सिंह 1,56,902 कांग्रेस मुनीश्वर दत्त 76,716 एसएसपी
6. 1977 रूपनाथ सिंह 2,06,339 लोकदल दिनेश सिंह 57,019 कांग्रेस
7. 1980 अजीत प्र. सिंह 94,223 कांग्रेसआई जयसिंह 80,038 जेएनपीएस
8. 1984 दिनेश सिंह 2,79,354 कांग्रेस रामदेव 46,847 लोकदल
9. 1989 दिनेश सिंह 1,65,870 कांग्रेस अभय प्र. सिंह 1,61,664 जद+भाजपा
10. 1991 अभय प्र. सिंह 1,10,838 जद उदयराज मिश्र 1,07,142 भाजपा
11. 1996 रत्ना सिंह 1,39,326 कांग्रेस उदयराज मिश्र 1,17,689 भाजपा
12. 1998 राम विलास वेदांती 2,32,927 भाजपा रत्ना सिंह 1,64,487 कांग्रेस
13. 1999 रत्ना सिंह 2,02,170 कांग्रेस अभय प्र. सिंह 1,96,167 भाजपा
14.2004 अक्षय प्रताप सिंह 2,38,137 सपा रत्ना सिंह 1,68,885 कांग्रेस
15. 2009 रत्ना सिंह 1,69,137 कांग्रेस शिवाकांत ओझा 1,39,358 बसपा
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आजादी के बाद के चुनावाें में जिले में कांग्रेस का बोलबाला था। 1952 और 1957 का चुनाव लगातार कांग्रेस ने जीता। 1962 में जनसंघ के टिकट पर जिले में बड़ा प्रभाव रखने वाले राजा अजीत प्रताप सिंह ने कांग्रेस का रथ रोका। हालांकि वह कांग्रेस उम्मीदवार पर 23,684 वोटाें से ही जीत दर्ज कर सके थे। 1967, 1971 में हुए अगले चुनाव फिर कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह ने जीते थे। 1977 के चुनाव में पूरे देश के साथ जिले में भी कांग्रेस के विरोध में लहर चल रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने से जनता उन्हें कुर्सी से बेदखल करने का फैसला कर चुकी थी। इस चुनाव में पब्लिक ने कांग्रेस के विरोध में फैसला सुनाया और जिले से जनता पार्टी समर्थित भारतीय लोकदल के उम्मीदवार रूपनाथ सिंह यादव को 1,49,320 वोटों से जिताया। रूपनाथ को 2,06,339 और कांग्रेस के दिनेश सिंह को मात्र 57,019 वोट ही मिल सके थे। यह जीत जिले के लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ी थी। इसके बाद 1980 में चुनाव हुआ तो कांग्रेस आई के अजीत प्रताप सिंह जीते। दूसरे नंबर पर जय सिंह थे जबकि राजा दिनेश सिंह तीसरे स्थान पर खिसक गए थे।
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1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जो लहर आई थी उसमें सभी विरोधी उड़ गए। जिले के लोकसभा चुनाव में संवेदना की यह ऐतिहासिक लहर थी। कांग्रेस के राजा दिनेश प्रताप सिंह को 2,79,354 वोट मिले। राजा दिनेश इस चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंदी लोकदल के रामदेव से 2,32,507 वोटों से जीते थे। इस जीत का रेकार्ड आज तक बरकरार है। न तो राम लहर इसे तोड़ सकी और न ही आरक्षण व बोफोर्स दलाली का मुद्दा। बाद के चुनाव विकास, गुंडागर्दी जैसे स्थानीय मुद्दों पर हुए। उनमें सिर्फ मामूली अंतर से हार-जीत हो सकी।
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जिले का लोकसभा चुनाव परिणाम
वर्ष जीते वोट पार्टी हारे वोट पार्टी
1. 1952 मुनीश्वर दत्त 77,668 कांग्रेस पशुपति प्र. सिंह 23,518 जनसंघ
2. 1957 मुनीश्वर दत्त 78,399 कांग्रेस हरिशरण सिंह 65,773 निर्दल
3. 1962 अजीत प्र. सिंह 96,483 जनसंघ मुनीश्वर दत्त 72,779 कांग्रेस
4. 1967 दिनेश सिंह 1,02,825 कांग्रेस बी सिंह 81,133 एसएसपी
5. 1971 दिनेश सिंह 1,56,902 कांग्रेस मुनीश्वर दत्त 76,716 एसएसपी
6. 1977 रूपनाथ सिंह 2,06,339 लोकदल दिनेश सिंह 57,019 कांग्रेस
7. 1980 अजीत प्र. सिंह 94,223 कांग्रेसआई जयसिंह 80,038 जेएनपीएस
8. 1984 दिनेश सिंह 2,79,354 कांग्रेस रामदेव 46,847 लोकदल
9. 1989 दिनेश सिंह 1,65,870 कांग्रेस अभय प्र. सिंह 1,61,664 जद+भाजपा
10. 1991 अभय प्र. सिंह 1,10,838 जद उदयराज मिश्र 1,07,142 भाजपा
11. 1996 रत्ना सिंह 1,39,326 कांग्रेस उदयराज मिश्र 1,17,689 भाजपा
12. 1998 राम विलास वेदांती 2,32,927 भाजपा रत्ना सिंह 1,64,487 कांग्रेस
13. 1999 रत्ना सिंह 2,02,170 कांग्रेस अभय प्र. सिंह 1,96,167 भाजपा
14.2004 अक्षय प्रताप सिंह 2,38,137 सपा रत्ना सिंह 1,68,885 कांग्रेस
15. 2009 रत्ना सिंह 1,69,137 कांग्रेस शिवाकांत ओझा 1,39,358 बसपा