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धूल से प्रभावित हो रही दुकानदारी
Pratapgarh
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। महीनों से खोदी गई सड़क व्यवसायियों के लिए मुसीबत बन गई है। उनका व्यवसाय तो प्रभावित हो ही रहा है। दुकान में रखा सामान भी खराब हो रहा है। इससे निजात पाने के लिए व्यापारी दुकान के गेट पर पन्नी लगा रहे हैं।
शहर की सड़क खोदकर छोड़े जाने के कारण शहर में धूल ने अपना साम्राज्य कायम कर रखा है। वाहनों के गुजरने के कारण उड़ने वाली धूल लोगों को बीमार कर ही रही है, व्यापार को भी प्रभावित हो रहा है। कपड़े की दुकान में तो इसका इतना अधिक प्रभाव है कि लोगों को इसके लिए पन्नी के परदे लगवाने पड़ गए हैं। क्या कपड़े की दुकान, जूते, चप्पल, गिफ्ट आइटम, इलेक्ट्रानिक्स की दुकानाें के अंदर रखे सामानों पर भारी मात्रा में धूल घुस जाती है। मेडिकल स्टोर के साथ ही रोड पर ठेला लगाने वाले भी इससे परेशान हो गए हैं। चौक बजाजा के पास तो हर दुकानदार इससे बचने के लिए पन्नी के परदे बनवा लिए हैं। पूरे दिन यह परदे दुकान को ढंके रहते हैं। इसके अंदर ही ग्राहक सामनों की खरीदारी करते हैं। ठेले वाली खाद्य सामग्री भी पन्नियों से ढक कर बेची जा रही है। बावजूद इसके ग्राहक सड़कों पर लगी इन दुकानों पर ठहरना पसंद नहीं कर रहे हैं। कपड़ों की दुकानों पर तो पन्नी लगाने के बाद कपड़ों का कलर ही धूल से बदल जाता है।
नगर पालिका बीच-बीच में टैंकर के माध्यम से सड़क पर पानी जरूर डलवाती है लेकिन यह बेअसर ही रहता है। यह पानी उन लोगों के घरों के सामने डाला जाता है जिनसे बवाल की आशंका रहती है। महीनों से शहर में धूल ने अपना कब्जा जमा रखा है लेकिन इस ओर अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
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शहर की सड़क खोदकर छोड़े जाने के कारण शहर में धूल ने अपना साम्राज्य कायम कर रखा है। वाहनों के गुजरने के कारण उड़ने वाली धूल लोगों को बीमार कर ही रही है, व्यापार को भी प्रभावित हो रहा है। कपड़े की दुकान में तो इसका इतना अधिक प्रभाव है कि लोगों को इसके लिए पन्नी के परदे लगवाने पड़ गए हैं। क्या कपड़े की दुकान, जूते, चप्पल, गिफ्ट आइटम, इलेक्ट्रानिक्स की दुकानाें के अंदर रखे सामानों पर भारी मात्रा में धूल घुस जाती है। मेडिकल स्टोर के साथ ही रोड पर ठेला लगाने वाले भी इससे परेशान हो गए हैं। चौक बजाजा के पास तो हर दुकानदार इससे बचने के लिए पन्नी के परदे बनवा लिए हैं। पूरे दिन यह परदे दुकान को ढंके रहते हैं। इसके अंदर ही ग्राहक सामनों की खरीदारी करते हैं। ठेले वाली खाद्य सामग्री भी पन्नियों से ढक कर बेची जा रही है। बावजूद इसके ग्राहक सड़कों पर लगी इन दुकानों पर ठहरना पसंद नहीं कर रहे हैं। कपड़ों की दुकानों पर तो पन्नी लगाने के बाद कपड़ों का कलर ही धूल से बदल जाता है।
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नगर पालिका बीच-बीच में टैंकर के माध्यम से सड़क पर पानी जरूर डलवाती है लेकिन यह बेअसर ही रहता है। यह पानी उन लोगों के घरों के सामने डाला जाता है जिनसे बवाल की आशंका रहती है। महीनों से शहर में धूल ने अपना कब्जा जमा रखा है लेकिन इस ओर अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
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