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स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ का ‘गेम’!
Pratapgarh
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ रुपए में ‘गेम’ की आहट आने लगी है। ग्राम पंचायतों में भेजी गई रकम का महकमे के पास कोई हिसाब नहीं है। पैसे किस मद में और कहां खर्च हुए यह खुद जिम्मेदारों को नहीं पता है। अब अपने किए पर वे पर्दा डालने की जुगत में हैं। सरकारी पैसा बांटने के बाद उसके खर्च का उपभोग प्रमाण पत्र न लेना ही नियम विरुद्ध माना जाता है। जिले में सरकारी धन के दुरुपयोग की यह स्थिति और भी विभागों में है।
जिले में व्यवस्था के नाम बांटे गए धन से हुए काम की कोई जानकारी अफसरों को नहीं है। वे पैसा तो ग्राम पंचायतों में भेज देते हैं मगर उसका हिसाब रखना शान के खिलाफ समझ रहे हैं। इस तरह स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ से अधिक धन में खेल होने की दुर्गंध उठने लगी है। सूत्रों पर यकीं करें तो ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति के तहत विभाग में एक करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपए शासन से आए थे। जिले में कुल 1105 ग्राम पंचायतें हैं। उस पैसे को अफसरों ने 1104 ग्राम पंचायतों में भेज दिया है। एक ग्राम पंचायत के खाते का लफड़ा होने से वहां पैसा नहीं भेजा जा सका। इस तरह वह पूरा पैसा ग्राम पंचायतों में गया। गौर करने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2012-2013 बीतने की कगार पर है। अब तक उसमें से कितना धन ग्राम पंचायतों ने खर्च किया यह हिसाब विभाग में नहीं है जबकि मदवार ग्राम पंचायतों से उस पैसे केखर्च का उपभोग प्रमाण पत्र अफसरों को लेना चाहिए। मगर एक भी ग्राम पंचायत से वह प्रमाण पत्र नहीं लिया गया। इस तरह उस पैसे में खेल होने की आशंकाओं ने सिर उठा लिया गया है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो योजना में घपले जैसा मामला प्रकाश में आ सकता है।
ग्राम पंचायतों में भेजी गई रकम को जिम्मेदारों ने निकाल लिया। मगर उसे कहां खर्च किया गया यह रिकार्ड ग्राम पंचायत स्तर पर दुरुस्त नहीं किए गए। इतना ही नहीं अधिकारियों ने उनसे वह हिसाब लेना भी उचित नहीं समझा। अब विभाग केअधिकारी खुद की लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश में हैं। जिस उद्देश्य से वह धन दिए गए थे वह मकसद उस पैसे से सफलता का जामा नहीं पहन सका।
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स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम आरबी यादव ने कहा कि यह सच है कि उस मद में उतनी रकम शासन से मिली थी। मगर पैसा अभी ग्राम पंचायतों में गया नहीं है। एक पत्र जारी हुआ कि जो धन बीते वर्षों के खाते में बचे हों, वह उसे खर्च करें। उसके बाद जरूरत के मुताबिक पैसा दिया जाएगा।
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जिले में व्यवस्था के नाम बांटे गए धन से हुए काम की कोई जानकारी अफसरों को नहीं है। वे पैसा तो ग्राम पंचायतों में भेज देते हैं मगर उसका हिसाब रखना शान के खिलाफ समझ रहे हैं। इस तरह स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ से अधिक धन में खेल होने की दुर्गंध उठने लगी है। सूत्रों पर यकीं करें तो ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति के तहत विभाग में एक करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपए शासन से आए थे। जिले में कुल 1105 ग्राम पंचायतें हैं। उस पैसे को अफसरों ने 1104 ग्राम पंचायतों में भेज दिया है। एक ग्राम पंचायत के खाते का लफड़ा होने से वहां पैसा नहीं भेजा जा सका। इस तरह वह पूरा पैसा ग्राम पंचायतों में गया। गौर करने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2012-2013 बीतने की कगार पर है। अब तक उसमें से कितना धन ग्राम पंचायतों ने खर्च किया यह हिसाब विभाग में नहीं है जबकि मदवार ग्राम पंचायतों से उस पैसे केखर्च का उपभोग प्रमाण पत्र अफसरों को लेना चाहिए। मगर एक भी ग्राम पंचायत से वह प्रमाण पत्र नहीं लिया गया। इस तरह उस पैसे में खेल होने की आशंकाओं ने सिर उठा लिया गया है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो योजना में घपले जैसा मामला प्रकाश में आ सकता है।
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ग्राम पंचायतों में भेजी गई रकम को जिम्मेदारों ने निकाल लिया। मगर उसे कहां खर्च किया गया यह रिकार्ड ग्राम पंचायत स्तर पर दुरुस्त नहीं किए गए। इतना ही नहीं अधिकारियों ने उनसे वह हिसाब लेना भी उचित नहीं समझा। अब विभाग केअधिकारी खुद की लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश में हैं। जिस उद्देश्य से वह धन दिए गए थे वह मकसद उस पैसे से सफलता का जामा नहीं पहन सका।
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स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम आरबी यादव ने कहा कि यह सच है कि उस मद में उतनी रकम शासन से मिली थी। मगर पैसा अभी ग्राम पंचायतों में गया नहीं है। एक पत्र जारी हुआ कि जो धन बीते वर्षों के खाते में बचे हों, वह उसे खर्च करें। उसके बाद जरूरत के मुताबिक पैसा दिया जाएगा।