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एमडीएम : यहां भी गटका जा रहा बच्चों का निवाला
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एमडीएम : यहां भी गटका जा रहा बच्चों का निवाला
सीएम ने दिया है सभी जिलों में मिड डे मील की जांच कराने का निर्देश
प्रतिमाह 20.66 करोड़ रुपये कनवर्जन कास्ट और 5009.75 क्विंटल राशन होता है खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले में भी स्कूलों में मिड डे मील के नाम पर खूब हेराफेरी की जा रही है। बच्चों की संख्या बढ़ाकर और घटाकर खेल किया जाता है। सीएम योगी के सभी जिलों में मिड डे मील की जांच कराने के आदेश के बाद अब अफसरों में खलबली मची है।
जिले में 2958 स्कूल ऐसे हैं जहां नामांकित कक्षा एक से आठ तक के 2,67,062 बच्चों को प्रतिदिन पका-पकाया भोजन मुहैया कराने के लिए 82.65 लाख रुपये कनवर्जनकास्ट और 200.363 क्विंटल राशन खर्च होता है। इसमें गेहूं की मात्रा 66.78 क्विंटल और चावल की मात्रा 133.57 क्विंटल होती है। बच्चों के नाम पर खर्च होने वाली अधिकांश धनराशि हेडमास्टरों के जेब में पहुंचती है, जबकि कुछ हिस्सा ही बच्चों के अंश में पहुंच रहा है। विभागीय अधिकारियों ने कई बार अनियमितता पर रोक लगाने की पहल की, मगर कुछ नहीं हो सका।
नौनिहालों को दोपहर का भोजन परोसने में हेडमास्टर जमकर खेल कर रहे हैं। मगर विभाग उन पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। दरअसल, एमडीएम खेल में सिर्फ संख्या का हेर-फेर ही काफी है। अगर स्कूल में कम बच्चे आए हैं और आपने अधिक संख्या दिखा दिया है तो स्कूल बंद होते ही हेडमास्टर पर कोई भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसलिए वह बच्चों की फर्जी संख्या रजिस्टर कनवर्जनकास्ट और राशन को हड़पने का खेल कर लेता है।
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इनसेट---------
एमडीएम की रिपोर्ट नहीं देने पर बीईओ को नोटिस
कुंडा और कालाकांकर ब्लाक के अधिकांश स्कूलों के आनलाइन सूचना नहीं देने पर खंड शिक्षा अधिकारी रतनलाल को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। हालांकि अभी तक बीईओ की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
इनसेट---------
प्राइमरी में 4.35 और मिडिल में 6.51 रुपये की दर से होता है भुगतान
जिले के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के अनुपात में स्कूलों में कनवर्जन कास्ट की रकम भेजी जाती है। प्राइमरी स्कूलों में 4.35 रुपये और मिडिल स्कूलों में 6.51 रुपये प्रति छात्र की दर से भुगतान किया जाता है। यह दरें जनवरी 2018 से लागू है।
इनसेट---------
प्राइमरी में 100 और मिडिल 150 ग्राम है मानक
प्राइमरी स्कूलों में 100 ग्राम प्रति छात्र और मिडिल स्कूलों में 150 ग्राम प्रति छात्र की दर से राशन दिया जाता है। हेडमास्टर बच्चों की संख्या बढ़ाकर इसी का खेल करते हैं।
इनसेट----------
खाते में गए 1071.59 करोड़ रुपये
जिले के 2958 स्कूलों में नवंबर माह में 1071.59 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी गई थी। फिलहाल मार्च माह के पहले ही दूसरी खेप भेजने की तैयारी हो रही है।
इनसेट--------
सिर्फ नोटिस तक सीमित रहता है मामला
जब कभी स्कूलों का निरीक्षण करने अधिकारी पहुंचते हैं तो बच्चों की संख्या कम होने और एमडीएम खाने वाले बच्चों की संख्या अधिक दिखाने पर विभाग सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित रहता है। फिर क्या बीईओ से सेटिंग होते ही मामला शांत हो जाता है।
इनसेट-----------
एमडीएम में ऐसे होता है खेल
एमडीएम खाने वाले बच्चों की प्रतिदिन मोबाइल पर संख्या मांगी जाती है। पहली बार मोबाइल पर बारह बजे के पहले फोन आएगा। इस दौरान अधिकांश हेडमास्टर फोन नहीं उठाते हैं। फोन नहीं उठने पर दूसरी बार दो से तीन बजे के बीच फोन आता है। दूसरी बार फोन उठते ही स्कूल में मौजूद बच्चों से दूनी संख्या बताई जाती है। टीचर पहले राउंड में फोन इसलिए नहीं उठाते हैं कि संख्या फीड कराने पर अगर स्कूल की जांच हो गई तो वह फंस जाएंगे। इसलिए दूसरे राउंड में सूचना देते हैं, क्योंकि उस समय स्कूल बंद होने वाला होता है। स्कूल में अगर छुट्टी हो गई तो बच्चों की उपस्थिति होने की सही संख्या कदापि नहीं मिल सकती है।
वर्जन----------
एमडीएम की जांच के लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जहां कही भी गड़बड़ी मिलेगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभी तक किसी भी स्कूल से गड़बड़ी का मामला नहीं आया है, अगर संज्ञान में आता है तो फौरन निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।
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सीएम ने दिया है सभी जिलों में मिड डे मील की जांच कराने का निर्देश
प्रतिमाह 20.66 करोड़ रुपये कनवर्जन कास्ट और 5009.75 क्विंटल राशन होता है खर्च
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले में भी स्कूलों में मिड डे मील के नाम पर खूब हेराफेरी की जा रही है। बच्चों की संख्या बढ़ाकर और घटाकर खेल किया जाता है। सीएम योगी के सभी जिलों में मिड डे मील की जांच कराने के आदेश के बाद अब अफसरों में खलबली मची है।
जिले में 2958 स्कूल ऐसे हैं जहां नामांकित कक्षा एक से आठ तक के 2,67,062 बच्चों को प्रतिदिन पका-पकाया भोजन मुहैया कराने के लिए 82.65 लाख रुपये कनवर्जनकास्ट और 200.363 क्विंटल राशन खर्च होता है। इसमें गेहूं की मात्रा 66.78 क्विंटल और चावल की मात्रा 133.57 क्विंटल होती है। बच्चों के नाम पर खर्च होने वाली अधिकांश धनराशि हेडमास्टरों के जेब में पहुंचती है, जबकि कुछ हिस्सा ही बच्चों के अंश में पहुंच रहा है। विभागीय अधिकारियों ने कई बार अनियमितता पर रोक लगाने की पहल की, मगर कुछ नहीं हो सका।
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नौनिहालों को दोपहर का भोजन परोसने में हेडमास्टर जमकर खेल कर रहे हैं। मगर विभाग उन पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। दरअसल, एमडीएम खेल में सिर्फ संख्या का हेर-फेर ही काफी है। अगर स्कूल में कम बच्चे आए हैं और आपने अधिक संख्या दिखा दिया है तो स्कूल बंद होते ही हेडमास्टर पर कोई भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसलिए वह बच्चों की फर्जी संख्या रजिस्टर कनवर्जनकास्ट और राशन को हड़पने का खेल कर लेता है।
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एमडीएम की रिपोर्ट नहीं देने पर बीईओ को नोटिस
कुंडा और कालाकांकर ब्लाक के अधिकांश स्कूलों के आनलाइन सूचना नहीं देने पर खंड शिक्षा अधिकारी रतनलाल को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। हालांकि अभी तक बीईओ की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
इनसेट---------
प्राइमरी में 4.35 और मिडिल में 6.51 रुपये की दर से होता है भुगतान
जिले के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के अनुपात में स्कूलों में कनवर्जन कास्ट की रकम भेजी जाती है। प्राइमरी स्कूलों में 4.35 रुपये और मिडिल स्कूलों में 6.51 रुपये प्रति छात्र की दर से भुगतान किया जाता है। यह दरें जनवरी 2018 से लागू है।
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प्राइमरी में 100 और मिडिल 150 ग्राम है मानक
प्राइमरी स्कूलों में 100 ग्राम प्रति छात्र और मिडिल स्कूलों में 150 ग्राम प्रति छात्र की दर से राशन दिया जाता है। हेडमास्टर बच्चों की संख्या बढ़ाकर इसी का खेल करते हैं।
इनसेट----------
खाते में गए 1071.59 करोड़ रुपये
जिले के 2958 स्कूलों में नवंबर माह में 1071.59 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी गई थी। फिलहाल मार्च माह के पहले ही दूसरी खेप भेजने की तैयारी हो रही है।
इनसेट--------
सिर्फ नोटिस तक सीमित रहता है मामला
जब कभी स्कूलों का निरीक्षण करने अधिकारी पहुंचते हैं तो बच्चों की संख्या कम होने और एमडीएम खाने वाले बच्चों की संख्या अधिक दिखाने पर विभाग सिर्फ नोटिस देने तक ही सीमित रहता है। फिर क्या बीईओ से सेटिंग होते ही मामला शांत हो जाता है।
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एमडीएम में ऐसे होता है खेल
एमडीएम खाने वाले बच्चों की प्रतिदिन मोबाइल पर संख्या मांगी जाती है। पहली बार मोबाइल पर बारह बजे के पहले फोन आएगा। इस दौरान अधिकांश हेडमास्टर फोन नहीं उठाते हैं। फोन नहीं उठने पर दूसरी बार दो से तीन बजे के बीच फोन आता है। दूसरी बार फोन उठते ही स्कूल में मौजूद बच्चों से दूनी संख्या बताई जाती है। टीचर पहले राउंड में फोन इसलिए नहीं उठाते हैं कि संख्या फीड कराने पर अगर स्कूल की जांच हो गई तो वह फंस जाएंगे। इसलिए दूसरे राउंड में सूचना देते हैं, क्योंकि उस समय स्कूल बंद होने वाला होता है। स्कूल में अगर छुट्टी हो गई तो बच्चों की उपस्थिति होने की सही संख्या कदापि नहीं मिल सकती है।
वर्जन----------
एमडीएम की जांच के लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जहां कही भी गड़बड़ी मिलेगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभी तक किसी भी स्कूल से गड़बड़ी का मामला नहीं आया है, अगर संज्ञान में आता है तो फौरन निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार सिंह, बीएसए।