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स्कूल में 250 बच्चे, पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं
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सांगीपुर ब्लाक के राजापुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक न होने पर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : PRATAPGARH
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स्कूल में 250 बच्चे, पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं
सांगीपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजापुर में ढाई सौ बच्चे हैं, मगर उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक एक भी नहीं हैं। लगभग एक माह से पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। स्कूल में तैनात एकमात्र शिक्षिका के मातृत्व अवकाश पर जाने से बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है। बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते हैं और दोपहर तक खेलने-कूदने के बाद घर लौट जाते हैं।
योगी सरकार बेसिक शिक्षा को मॉडल बनाने के लिए जहां करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं विभाग के अफसर ही सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे हैं। सांगीपुर विकास खंड के मिडिल स्कूल राजापुर में 252 बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका विमलारानी और अनुदेशक विजय प्रताप और अनुराग शुक्ला की तैनाती हुई थी। एक माह पूर्व शिक्षिका विमला रानी ने मातृत्व अवकाश ले लिया। बीईओ ने स्कूल की व्यवस्था संचालन के लिए दूसरे स्कूल के शिक्षक राजेश वर्मा को यहां से संबद्ध कर दिया।
इस बीच संबद्धीकरण निरस्त करने का आदेश जारी होते ही राजेश वर्मा अपने मूल स्कूल चले गए। स्कूल में बचे दोनों अनुदेशकों की मनमानी का आलम यह है कि वह कभी स्कूल जाते हैं तो कभी निजी कार्य का बहाना बताकर गायब रहते हैं। ऐेसे में स्कूल आने वाले बच्चे गुरुजी का इंतजार कर लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो स्कूल की चाभी रसोइया के पास है। वह सुबह पहुंचकर स्कूल खोलती है और शिक्षकों की कुर्सियों को बरामदे में लगाती है। बच्चे जब स्कूल आते हैं तो उन्हें लगता है कि शिक्षक आएंगे, लेकिन फिर उन्हें निराश होकर घर लौट जाना पड़ता है। खंड शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। अगर स्कूल से अनुदेशक गायब हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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सांगीपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजापुर में ढाई सौ बच्चे हैं, मगर उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक एक भी नहीं हैं। लगभग एक माह से पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। स्कूल में तैनात एकमात्र शिक्षिका के मातृत्व अवकाश पर जाने से बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है। बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते हैं और दोपहर तक खेलने-कूदने के बाद घर लौट जाते हैं।
योगी सरकार बेसिक शिक्षा को मॉडल बनाने के लिए जहां करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं विभाग के अफसर ही सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे हैं। सांगीपुर विकास खंड के मिडिल स्कूल राजापुर में 252 बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका विमलारानी और अनुदेशक विजय प्रताप और अनुराग शुक्ला की तैनाती हुई थी। एक माह पूर्व शिक्षिका विमला रानी ने मातृत्व अवकाश ले लिया। बीईओ ने स्कूल की व्यवस्था संचालन के लिए दूसरे स्कूल के शिक्षक राजेश वर्मा को यहां से संबद्ध कर दिया।
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इस बीच संबद्धीकरण निरस्त करने का आदेश जारी होते ही राजेश वर्मा अपने मूल स्कूल चले गए। स्कूल में बचे दोनों अनुदेशकों की मनमानी का आलम यह है कि वह कभी स्कूल जाते हैं तो कभी निजी कार्य का बहाना बताकर गायब रहते हैं। ऐेसे में स्कूल आने वाले बच्चे गुरुजी का इंतजार कर लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो स्कूल की चाभी रसोइया के पास है। वह सुबह पहुंचकर स्कूल खोलती है और शिक्षकों की कुर्सियों को बरामदे में लगाती है। बच्चे जब स्कूल आते हैं तो उन्हें लगता है कि शिक्षक आएंगे, लेकिन फिर उन्हें निराश होकर घर लौट जाना पड़ता है। खंड शिक्षा अधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। अगर स्कूल से अनुदेशक गायब हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

सांगीपुर ब्लाक के राजापुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक न होने पर बाहर घूमते बच्चे।- फोटो : PRATAPGARH
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