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बीत गया साल, रकम ही नहीं खर्च कर सके अफसर
Updated Mon, 10 Jul 2017 07:19 PM IST
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प्रतापगढ़। गंगा को निर्मल-अविरल बनाने की योजना को सरकार के ही अफसर किस तरह पलीता लगा रहे हैं, इसकी बानगी देखिए। जिले में गंगा एक्शन प्लान के तहत होने वाले कार्यों के लिए 882.43 लाख रुपये आए। हालांकि अफसर पूरी रकम खर्च ही नहीं कर सके। वित्तीय वर्ष बीत गया और 106.24 लाख रुपये विभाग के पास ही बचे रह गए। जो रकम खर्च हुई उससे भी महज दिखावे के ही काम कराए गए।
नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए जिले में गंगा एक्शन प्लान योजना प्रारंभ की गई है। गंगा की धारा को अविरल बनाने के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष में 882.43 लाख रुपये मिले थे। इससे गंगा के किनारे बसे 18 ग्राम पंचायतों के 26 राजस्व गांवों के प्रत्येक घरों में शौचालय बनाने, गांव से निकलने वाले नालों की धारा मोड़ने, गंगा घाटों पर साफ-सफाई का काम होना था। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की लापरवाही का आलम यह रहा कि गंगा को अविरल बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके चलते बीते वित्तीय वर्ष में मात्र शौचालय बनाने में 776.19 रुपये खर्च हो गए। कागज पर तो यह शौचालय बन गए, मगर वास्तविकता इससे अलग है। अधिकांश गांव ऐसे हैं, जहां अभी शौचालय के लिए गड्ढे ही नहीं खोदे गए हैं। विभाग का दावा है कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं जाता है। फिलहाल विभागीय अधिकारियों के अंधाधुंध खर्च करने के बाद भी 106.24 लाख रुपये बचे हुए हैं।
दो ब्लाक के 26 राजस्व गांवों के लिए है योजना
जिले के कालाकांकर और कुंडा ब्लाक के 18 ग्राम पंचायत और 26 राजस्व गांवों के लिए गंगा एक्शन प्लान योजना बनाई गई है। कालाकांकर से प्रारंभ होने वाली प्रतापगढ़ की सीमा कुंडा ब्लाक के समसपुर गांव तक है। लगभग 20 किमी के दायरे में फैले इन गांवों की गंदगी रोकने के लिए योजना थी, मगर जिला प्रशासन कोई ठोस रणनीति नहीं बना सका। इससे योजना निरर्थक साबित हुई।
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इस योजना के तहत क्या-क्या होना था---
0 गंगा तट पर स्थित सभी गांवों में घर-घर शौचालय
0 गांव के गंदे पानी को गंगा में गिरने से रोकना।
0 गंदे नालों का पानी गंगा में गिरने के बजाय उसकी दिशा मोड़ी जाए।
0 गंगा घाटों को साफ-सुथरा बनाया जाए।
0 गंगा में शव प्रवाहित करने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
0 गंगा तट पर शव जलाने की अनुमति न प्रदान की जाए।
0 स्थानीय स्तर पर जो संभव हो, प्रयास किया जाए।
सिर्फ शौचालयों के लिए ही भुगतान की गई रकम
गंगा एक्शन प्लान के तहत सिर्फ शौचालयों के निर्माण के लिए ही रकम का भुगतान किया गया। विभाग मांग के अनुरुप धनराशि का भुगतान तो करता रहा, मगर कभी भी वास्तविकता देखने का प्रयास नहीं किया। इससे ब्लाक स्तर पर रुपये का दुरुपयोग होता रहा।
पंडित का पुरवा गांव में नहीं बना एक भी शौचालय
गंगा के तट पर स्थित कालाकांकर ब्लाक के समसपुर ग्राम पंचायत के पंडित का पुरवा ऐसा राजस्व गांव है, जहां अभी तक एक भी शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है। इसी गांव में प्रधान के विरोधी का घर है। इसलिए इस गांव में शौचालय नहीं बनाया गया है।
ओडीएफ गांवों की हो रही है जांच
गांव को ओडीएफ करने के लिए बीते वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों को दी गई धनराशि के खर्च की जांच के आदेश डीएम ने दिए हैं। बीते सप्ताह कालाकांकर ब्लाक का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम से स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। डीएम के आदेश पर पूरे ब्लाक के ओडीएफ गांवों की जांच हो रही है।
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नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए जिले में गंगा एक्शन प्लान योजना प्रारंभ की गई है। गंगा की धारा को अविरल बनाने के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष में 882.43 लाख रुपये मिले थे। इससे गंगा के किनारे बसे 18 ग्राम पंचायतों के 26 राजस्व गांवों के प्रत्येक घरों में शौचालय बनाने, गांव से निकलने वाले नालों की धारा मोड़ने, गंगा घाटों पर साफ-सफाई का काम होना था। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की लापरवाही का आलम यह रहा कि गंगा को अविरल बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके चलते बीते वित्तीय वर्ष में मात्र शौचालय बनाने में 776.19 रुपये खर्च हो गए। कागज पर तो यह शौचालय बन गए, मगर वास्तविकता इससे अलग है। अधिकांश गांव ऐसे हैं, जहां अभी शौचालय के लिए गड्ढे ही नहीं खोदे गए हैं। विभाग का दावा है कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं जाता है। फिलहाल विभागीय अधिकारियों के अंधाधुंध खर्च करने के बाद भी 106.24 लाख रुपये बचे हुए हैं।
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दो ब्लाक के 26 राजस्व गांवों के लिए है योजना
जिले के कालाकांकर और कुंडा ब्लाक के 18 ग्राम पंचायत और 26 राजस्व गांवों के लिए गंगा एक्शन प्लान योजना बनाई गई है। कालाकांकर से प्रारंभ होने वाली प्रतापगढ़ की सीमा कुंडा ब्लाक के समसपुर गांव तक है। लगभग 20 किमी के दायरे में फैले इन गांवों की गंदगी रोकने के लिए योजना थी, मगर जिला प्रशासन कोई ठोस रणनीति नहीं बना सका। इससे योजना निरर्थक साबित हुई।
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इस योजना के तहत क्या-क्या होना था---
0 गंगा तट पर स्थित सभी गांवों में घर-घर शौचालय
0 गांव के गंदे पानी को गंगा में गिरने से रोकना।
0 गंदे नालों का पानी गंगा में गिरने के बजाय उसकी दिशा मोड़ी जाए।
0 गंगा घाटों को साफ-सुथरा बनाया जाए।
0 गंगा में शव प्रवाहित करने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
0 गंगा तट पर शव जलाने की अनुमति न प्रदान की जाए।
0 स्थानीय स्तर पर जो संभव हो, प्रयास किया जाए।
सिर्फ शौचालयों के लिए ही भुगतान की गई रकम
गंगा एक्शन प्लान के तहत सिर्फ शौचालयों के निर्माण के लिए ही रकम का भुगतान किया गया। विभाग मांग के अनुरुप धनराशि का भुगतान तो करता रहा, मगर कभी भी वास्तविकता देखने का प्रयास नहीं किया। इससे ब्लाक स्तर पर रुपये का दुरुपयोग होता रहा।
पंडित का पुरवा गांव में नहीं बना एक भी शौचालय
गंगा के तट पर स्थित कालाकांकर ब्लाक के समसपुर ग्राम पंचायत के पंडित का पुरवा ऐसा राजस्व गांव है, जहां अभी तक एक भी शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है। इसी गांव में प्रधान के विरोधी का घर है। इसलिए इस गांव में शौचालय नहीं बनाया गया है।
ओडीएफ गांवों की हो रही है जांच
गांव को ओडीएफ करने के लिए बीते वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों को दी गई धनराशि के खर्च की जांच के आदेश डीएम ने दिए हैं। बीते सप्ताह कालाकांकर ब्लाक का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम से स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। डीएम के आदेश पर पूरे ब्लाक के ओडीएफ गांवों की जांच हो रही है।