{"_id":"5c8a713ebdec2213ef2d184f","slug":"121552576830-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"25,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
25,
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनाव के समय लापता हो गए दिव्यांग
25,896 दिव्यांगों को पेंशन तो देतेे हैं, मगर नहीं मिल रहा घर का पता
नाम, खाता नंबर हैं लेकिन नहीं है ब्लाक और गांव की सूचना
56,893 दिव्यांगों को खोजने में दो विभागों का छूटा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले में दिव्यांगों की वास्तविक संख्या को लेकर दिव्यांग जन कल्याण अधिकारी और सीएमओ डीएम को गुमराह कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग 56,893 दिव्यांगों का प्रमाणपत्र जारी कर चुका है, जबकि दिव्यांग जन कल्याण अधिकारी 25,896 लाभार्थियों को पेंशन बांट रहे हैं। मगर इन दोनों विभागों के पास इन दिव्यांगों के घर का पता नहीं है।
लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों की भागीदारी के लिए डीएम ने उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करने और मतदान के दिन विशेष वाहन से उन्हें पोलिंग बूथ तक लाने के लिए चिह्नित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके यहां से 56,893 लोगों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इधर, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी का दावा है कि जिले के 25,896 दिव्यांग महिलाओं और पुरुषों को पेंशन दी जा रही है, जबकि मतदाता सूची में दिव्यांगों की संख्या 14,411 है। आश्चर्य की बात तो यह है कि दोनों विभागों के पास दिव्यांगों के घरों का पता नहीं है। कंप्यूटर में नाम, पिता का नाम, खाता नंबर और बैंक का नाम तो अंकित है, मगर वह किस ब्लाक और गांव के हैं, इसकी सूचना नहीं है।
ऐेसे में दिव्यांगों को मतदाता बनाने और लोकसभा चुनाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के दावे पर पानी फिरता नजर आ रहा है। डीएम ने चार दिन पहले इन दोनों विभागों के अफसरों को दिव्यांगों के पते साथ सूची तलब की थी, मगर अभी तक दोनों विभाग अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों को बूथ तक पहुंचाने और मतदान कराने के लिए डीएम ने यह रणनीति बनाई है कि पहले सब का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। उसके बाद मतदान के दिन उन्हें बूथ तक लाने पर जोर दिया जाएगा। मगर अभी विभागों से सूची नहीं मिली है।
शत्रोहन वैश्य, उप जिला निर्वाचन अधिकारी।
विज्ञापन
25,896 दिव्यांगों को पेंशन तो देतेे हैं, मगर नहीं मिल रहा घर का पता
नाम, खाता नंबर हैं लेकिन नहीं है ब्लाक और गांव की सूचना
56,893 दिव्यांगों को खोजने में दो विभागों का छूटा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले में दिव्यांगों की वास्तविक संख्या को लेकर दिव्यांग जन कल्याण अधिकारी और सीएमओ डीएम को गुमराह कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग 56,893 दिव्यांगों का प्रमाणपत्र जारी कर चुका है, जबकि दिव्यांग जन कल्याण अधिकारी 25,896 लाभार्थियों को पेंशन बांट रहे हैं। मगर इन दोनों विभागों के पास इन दिव्यांगों के घर का पता नहीं है।
लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों की भागीदारी के लिए डीएम ने उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करने और मतदान के दिन विशेष वाहन से उन्हें पोलिंग बूथ तक लाने के लिए चिह्नित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके यहां से 56,893 लोगों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इधर, जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी का दावा है कि जिले के 25,896 दिव्यांग महिलाओं और पुरुषों को पेंशन दी जा रही है, जबकि मतदाता सूची में दिव्यांगों की संख्या 14,411 है। आश्चर्य की बात तो यह है कि दोनों विभागों के पास दिव्यांगों के घरों का पता नहीं है। कंप्यूटर में नाम, पिता का नाम, खाता नंबर और बैंक का नाम तो अंकित है, मगर वह किस ब्लाक और गांव के हैं, इसकी सूचना नहीं है।
विज्ञापन
ऐेसे में दिव्यांगों को मतदाता बनाने और लोकसभा चुनाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के दावे पर पानी फिरता नजर आ रहा है। डीएम ने चार दिन पहले इन दोनों विभागों के अफसरों को दिव्यांगों के पते साथ सूची तलब की थी, मगर अभी तक दोनों विभाग अपना पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव में दिव्यांगों को बूथ तक पहुंचाने और मतदान कराने के लिए डीएम ने यह रणनीति बनाई है कि पहले सब का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। उसके बाद मतदान के दिन उन्हें बूथ तक लाने पर जोर दिया जाएगा। मगर अभी विभागों से सूची नहीं मिली है।
शत्रोहन वैश्य, उप जिला निर्वाचन अधिकारी।