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पीलीभीतः आखिरकार जिला पंचायत अध्यक्ष ने कर ही दिए 25 करोड़ की फाइल पर दस्तखत
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पीलीभीत। दो दिन पहले तक शहर से बाहर होने की बात कहकर 25 करोड़ के कामों की फाइल पर दस्तखत न करने वाली जिला पंचायत अध्यक्ष ने एकदम से पलटी मारी और शुक्रवार को फाइलों पर दस्तखत कर दिए। इतना ही नहीं, जिला पंचायत बोर्ड की 14 मार्च को प्रस्तावित बैठक भी अब होली से पहले सात मार्च को कराने को तैयार हो गईं। कमीशन के खेल के कारण बैठक टालने के कुछ बोर्ड सदस्यों द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद ऐसा हुआ।
जिला पंचायत में विकास कार्य लंबे अरसे से बाधित पड़े हैं। पंचायत सदस्यों ने हर साल छह बार यानी दो महीने में एक बार होने वाली बोर्ड बैठक न कराने के आरोप अध्यक्ष गायत्री महेंद्र पर लगाए थे। सदस्यों का यह भी कहना था कि पिछले साल 12 महीनों में मात्र एक बार ही बोर्ड बैठक कराई गई। हाल ही में अपर मुख्य अधिकारी जागन सिंह ने 29 फरवरी को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक प्रस्तावित कर 25 करोड़ के कामों की फाइल स्वीकृति के लिए अध्यक्ष के पास भेजी थीं। सदस्यों का आरोप था कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने बिना ठोस वजह के इन कामों की फाइल अपने पास रोक लीं। कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाए कि 10 लाख के कामों की ई टेंडरिंग होनी है। ऐसे में ये बड़े काम अपने ठेकेदारों को कैसे दिए जाएं, इसी उधेड़बुन में फाइल पर दस्तखत नहीं हो रहे थे। कुछ सदस्यों के अनुसार जिला पंचायत बोर्ड की आखिरी बैठक है। इसमें 25 करोड़ के कामों में किसका कमीशन कितना और किस तरह दिया जाए, यह सेट नहीं हो पा रहा था। इसी के चलते फाइल पर दस्तखत नहीं हो पा रहे थे। सदस्यों के आरोप लगाने के बाद अमर उजाला ने भ्रष्टाचार के इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो पूरा सिस्टम हरकत में आ गया। अगले ही दिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने फाइल पर दस्तखत कर दिए और बोर्ड बैठक बुलाने की तारीख भी 14 से सात मार्च तय कर दी।
सत्ता की गोद में बैठ गया विपक्ष
यूं तो विपक्ष का काम ही है कि अगर सत्ता पक्ष कुछ गलत या नियम विरुद्ध कर रहा है तो विपक्ष उस पर आपत्ति जताए और उसका जोरदार विरोध करे। यहां जिला पंचायत बोर्ड में 34 सदस्य है। इसमें कुछ सदस्य सपा के हैं। बाकी अधिकांश सदस्य भाजपा और कांग्रेस के हैं। मगर, सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष से विपक्षी सदस्यों की इतनी अच्छी पटरी बैठ रही है कि वे किसी भी बात का विरोध नहीं कर रहे हैं। विपक्ष के जिला पंचायत सदस्य भी कामों के बंटवारे में ठीक ठाक हिस्सा मिलने के बाद सत्ता पक्ष की गोद में जाकर बैठ गए। किसी को काम मिल रहे हैं तो किसी के ठेकेदार को टेंडर। जब हिस्सा बराबर का है तो फिर विरोध किस बात का। ऐसे में जिला पंचायत में ईमानदारी से काम कराने की बात ही बेमानी हो गई।
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19 दिन बाद फाइल पर हुए दस्तखत
अपर मुख्य अधिकारी जागन सिंह ने 25 करोड़ के कामों की पत्रावली नौ फरवरी को यानी 19 दिन पहले पंचायत अध्यक्ष तक पहुंचा दी थीं। मगर उन्होंने फाइल पर दस्तखत कराने में दिलचस्पी नहीं ली। इस पर सीडीओ का अनुमोदन भी हो चुका है। अब किरकिरी से बचने के लिए फाइल पर 19 दिन बाद दस्तखत किए गए।
वित्तीय वर्ष में 32 दिन बचे, कैसे होंगे 25 करोड़ के काम
जिला पंचायत अध्यक्ष ने प्रस्तावित 25 करोड़ के विकास कार्यों की पत्रावली पर दस्तखत तो कर दिए, लेकिन अब स्टाफ के सामने समस्या यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति होने में मात्र 32 दिन ही शेष बचे हैं, ऐसे में इन 32 दिनों में ई-टेंडर की प्रक्रिया समेत अन्य कार्रवाई पूरी होकर काम कैसे पूरे कराए जाएंगे। सब कुछ मनमाने तरीके से होगा। जहां मर्जी आएगी, उसी तरह बजट ठिकाने लगाया जाएगा। जिला पंचायत सदस्यों में भी दो गुट हैं। सब एक दूसरे से आगे निकलकर अधिक से अधिक काम अपने लिए हासिल करना चाह रहे हैं।
प्रस्तावित 25 करोड़ के विकास कार्यों की पत्रावली पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने अनुमोदन कर दिया है। दो दिन बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। जिला पंचायत बोर्ड की बैठक भी अब 14 के बजाए सात मार्च को होगी। - जागन लाल, अपर मुख्य अधिकरी, जिला पंचायत
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जिला पंचायत में विकास कार्य लंबे अरसे से बाधित पड़े हैं। पंचायत सदस्यों ने हर साल छह बार यानी दो महीने में एक बार होने वाली बोर्ड बैठक न कराने के आरोप अध्यक्ष गायत्री महेंद्र पर लगाए थे। सदस्यों का यह भी कहना था कि पिछले साल 12 महीनों में मात्र एक बार ही बोर्ड बैठक कराई गई। हाल ही में अपर मुख्य अधिकारी जागन सिंह ने 29 फरवरी को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक प्रस्तावित कर 25 करोड़ के कामों की फाइल स्वीकृति के लिए अध्यक्ष के पास भेजी थीं। सदस्यों का आरोप था कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने बिना ठोस वजह के इन कामों की फाइल अपने पास रोक लीं। कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाए कि 10 लाख के कामों की ई टेंडरिंग होनी है। ऐसे में ये बड़े काम अपने ठेकेदारों को कैसे दिए जाएं, इसी उधेड़बुन में फाइल पर दस्तखत नहीं हो रहे थे। कुछ सदस्यों के अनुसार जिला पंचायत बोर्ड की आखिरी बैठक है। इसमें 25 करोड़ के कामों में किसका कमीशन कितना और किस तरह दिया जाए, यह सेट नहीं हो पा रहा था। इसी के चलते फाइल पर दस्तखत नहीं हो पा रहे थे। सदस्यों के आरोप लगाने के बाद अमर उजाला ने भ्रष्टाचार के इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो पूरा सिस्टम हरकत में आ गया। अगले ही दिन जिला पंचायत अध्यक्ष ने फाइल पर दस्तखत कर दिए और बोर्ड बैठक बुलाने की तारीख भी 14 से सात मार्च तय कर दी।
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सत्ता की गोद में बैठ गया विपक्ष
यूं तो विपक्ष का काम ही है कि अगर सत्ता पक्ष कुछ गलत या नियम विरुद्ध कर रहा है तो विपक्ष उस पर आपत्ति जताए और उसका जोरदार विरोध करे। यहां जिला पंचायत बोर्ड में 34 सदस्य है। इसमें कुछ सदस्य सपा के हैं। बाकी अधिकांश सदस्य भाजपा और कांग्रेस के हैं। मगर, सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष से विपक्षी सदस्यों की इतनी अच्छी पटरी बैठ रही है कि वे किसी भी बात का विरोध नहीं कर रहे हैं। विपक्ष के जिला पंचायत सदस्य भी कामों के बंटवारे में ठीक ठाक हिस्सा मिलने के बाद सत्ता पक्ष की गोद में जाकर बैठ गए। किसी को काम मिल रहे हैं तो किसी के ठेकेदार को टेंडर। जब हिस्सा बराबर का है तो फिर विरोध किस बात का। ऐसे में जिला पंचायत में ईमानदारी से काम कराने की बात ही बेमानी हो गई।
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19 दिन बाद फाइल पर हुए दस्तखत
अपर मुख्य अधिकारी जागन सिंह ने 25 करोड़ के कामों की पत्रावली नौ फरवरी को यानी 19 दिन पहले पंचायत अध्यक्ष तक पहुंचा दी थीं। मगर उन्होंने फाइल पर दस्तखत कराने में दिलचस्पी नहीं ली। इस पर सीडीओ का अनुमोदन भी हो चुका है। अब किरकिरी से बचने के लिए फाइल पर 19 दिन बाद दस्तखत किए गए।
वित्तीय वर्ष में 32 दिन बचे, कैसे होंगे 25 करोड़ के काम
जिला पंचायत अध्यक्ष ने प्रस्तावित 25 करोड़ के विकास कार्यों की पत्रावली पर दस्तखत तो कर दिए, लेकिन अब स्टाफ के सामने समस्या यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति होने में मात्र 32 दिन ही शेष बचे हैं, ऐसे में इन 32 दिनों में ई-टेंडर की प्रक्रिया समेत अन्य कार्रवाई पूरी होकर काम कैसे पूरे कराए जाएंगे। सब कुछ मनमाने तरीके से होगा। जहां मर्जी आएगी, उसी तरह बजट ठिकाने लगाया जाएगा। जिला पंचायत सदस्यों में भी दो गुट हैं। सब एक दूसरे से आगे निकलकर अधिक से अधिक काम अपने लिए हासिल करना चाह रहे हैं।
प्रस्तावित 25 करोड़ के विकास कार्यों की पत्रावली पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने अनुमोदन कर दिया है। दो दिन बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। जिला पंचायत बोर्ड की बैठक भी अब 14 के बजाए सात मार्च को होगी। - जागन लाल, अपर मुख्य अधिकरी, जिला पंचायत