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वाहनों की संख्या में हो रहा इजाफा, सड़कें सिकुड़ी
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पीलीभीत। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए भले ही प्रशासन तमाम दावे कर रहा हो, लेकिन धरातल पर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। कारण यह है कि आबादी के साथ वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वहीं अतिक्रमण की चपेट से सिकुड़तीं सड़कें ट्रैफिक व्यवस्था को बेपटरी कर रही है। हर साल वाहनों की संख्या 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। नतीजतन शहर के प्रमुख मार्गों के अलावा गलियों में भी जाम परेशानी का सबब बन रहा है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों में वर्तमान में 2,35,800 वाहन शामिल हैं। इनमें सभी प्रकार के वाहन हैं। लगातार बढ़ते वाहन शहर में आए दिन लगने वाले जाम का कारण बन रहे हैं। साल दर साल जहां वाहनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं सड़कों का दायरा बढ़ने के बजाय अतिक्रमण के चलते सिकुड़ता जा रहा है। प्रमुख सड़कों के साथ तंग गलियों में भी गाड़ियों की रेलमपेल बनी रहती है। वाहनों की बढ़ी हुई संख्या से अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए बजाय प्रशासन की ओर से यदाकदा कार्रवाई कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
शहर में लगातार गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है। इसके बावजूद शहर में कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है। शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने का दावा जिला प्रशासन कई बार कर चुका है। जाम की स्थिति से निपटने के लिए पार्किंग का बंदोबस्त भी अब तक नहीं किया जा सका है।
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वाहनों में सबसे ज्यादा बाइक हैं। जिले में इनकी संख्या दो लाख है। पिछले साल के मुकाबले 11 हजार से अधिक दोपहिया वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। शहर की सड़कों पर करीब तीन हजार से अधिक थ्री व्हीलर दौड़ रहे हैं। बिना परमिट वाले क्षेत्रों में भी मनमानी कर चालक वाहन लेकर घुस जाते हैं।
सड़कों को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। चौराहों पर सिग्नल लाइट और ट्रैफिक कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भीड़भाड़ वाले बाजारों में वन वे व्यवस्था लागू की जाए। जगह-जगह पार्किंग बनाई जाए। आमजन को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए व्यवस्था बनाने में सहयोग करना चाहिए। जरूरत पर ही वाहन का प्रयोग किया जाए। बच्चों के हाथों में गाड़ियां नहीं थमाई जाएं। कम दूर जाने के लिए लोग गाडिय़ों का इस्तेमाल न करें। एक ही स्थान पर जाने के लिए एक गाड़ी से जाएं।
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परिवहन विभाग के आंकड़ों में वर्तमान में 2,35,800 वाहन शामिल हैं। इनमें सभी प्रकार के वाहन हैं। लगातार बढ़ते वाहन शहर में आए दिन लगने वाले जाम का कारण बन रहे हैं। साल दर साल जहां वाहनों की संख्या बढ़ रही है, वहीं सड़कों का दायरा बढ़ने के बजाय अतिक्रमण के चलते सिकुड़ता जा रहा है। प्रमुख सड़कों के साथ तंग गलियों में भी गाड़ियों की रेलमपेल बनी रहती है। वाहनों की बढ़ी हुई संख्या से अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए बजाय प्रशासन की ओर से यदाकदा कार्रवाई कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
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शहर में लगातार गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है। इसके बावजूद शहर में कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है। शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने का दावा जिला प्रशासन कई बार कर चुका है। जाम की स्थिति से निपटने के लिए पार्किंग का बंदोबस्त भी अब तक नहीं किया जा सका है।
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वाहनों में सबसे ज्यादा बाइक हैं। जिले में इनकी संख्या दो लाख है। पिछले साल के मुकाबले 11 हजार से अधिक दोपहिया वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। शहर की सड़कों पर करीब तीन हजार से अधिक थ्री व्हीलर दौड़ रहे हैं। बिना परमिट वाले क्षेत्रों में भी मनमानी कर चालक वाहन लेकर घुस जाते हैं।
सड़कों को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। चौराहों पर सिग्नल लाइट और ट्रैफिक कर्मचारियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भीड़भाड़ वाले बाजारों में वन वे व्यवस्था लागू की जाए। जगह-जगह पार्किंग बनाई जाए। आमजन को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए व्यवस्था बनाने में सहयोग करना चाहिए। जरूरत पर ही वाहन का प्रयोग किया जाए। बच्चों के हाथों में गाड़ियां नहीं थमाई जाएं। कम दूर जाने के लिए लोग गाडिय़ों का इस्तेमाल न करें। एक ही स्थान पर जाने के लिए एक गाड़ी से जाएं।