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कोरोना काल में जब भी फुर्सत पाइए.. तो मिनी गोवा और बाइफरकेशन घूमने आइए

Sun, 27 Sep 2020 06:46 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 06:46 PM IST
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World Tourism Day
पीलीभीत। तराई की प्राकृतिक सुंदरता, यहां के घने जंगल और ऐतिहासिक धर्मस्थल हमेशा से देश-विदेश के सैलानियों का मन मोहते आए हैं। उत्तराखंड का प्रवेश द्वार समझे जाने वाले तराई के जंगलों, खासतौर से टूरिज्म स्पॉट चूका बीच को मिनी गोवा कहा जाता है। जो पर्यटक गोवा, शिमला या नैनीताल नहीं जा पाते, वह पीलीभीत के चूकाबीच और बाइफरकेशन आकर मिनी गोवा घूमने का आनंद ले सकते हैं।
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टाइगर रिजर्व में मुख्य टूरिज्म स्पॉट चूका बीच मिनी गोवा के नाम से जाना जाता है। पर्यटन के मानचित्र पर यह हमेशा अपनी गहरी छाप छोड़ता है। चूका बीज के अलावा बाइफरकेशन में कल-कल करती शारदा समेत अन्य नहरें, जंगल में स्वच्छंद विचरण करते बाघ, तेंदुए, हिरन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा तराई के इस छोटे से जनपद पीलीभीत में कई अन्य प्राचीन धर्मस्थल हैं, जो इस क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा के ध्वजवाहक हैं। विश्व पर्यटन दिवस पर अमर उजाला ने एतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के खूबसूरत दृश्यों को पर्यटकों के साथ तरोताजा किया है। अगर आप कोरोना महामारी के दौर में परिवार के साथ खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर घूमने जाना चाहते हैं तो यहां के खूबसूरत नजारे आपका मन मोह लेंगे।
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मिनी गोवा यानी कि इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच
पर्यटन के लिहाज से वैसे तो पूरा टाइगर रिजर्व ही प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है, मगर महोफ रेंज के दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में बना इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच सैलानियों के लिए लंबे समय से आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां ठहरने के लिए बनी थारु हट, बैंबू हट, ट्री टॉ हट और वॉटर हट की सुंदरता देखते ही बनती है। शासन के आदेश पर 15 नवंबर के बाद यह सैलानियों के लिए खुलेगा। यहां ठहरने के लिए टाइगर रिजर्व मुख्यालय पर ऑनलाइन बुकिंग कराई जा सकती है। कोरोना काल में मार्च में चूकाबीज बंद था। 15 नवंबर से नया पर्यटन सत्र शुरू होगा। चूका बीच के पास ही शारदा डैम में मोटर बोटिंग की भी सुविधा है। पीलीभीत मुख्यालय से चूका बीज की दूरी 25 किलोमीटर है। टनकपुर हाईवे पर बनकटी रोड पर महोफ गेट के अंदर प्रवेश करने पर चूका बीज पहुंचते हैं। दूसरा रास्ता मुस्तफाबाद होकर जाता है। इस रास्ते से बाइफरकेशन की खूबसूरती को भी निहारा जा सकता है। यह पीलीभीत मुख्यालय से 42 किलोमीटर दूर है।
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टाइगर रिजर्व में भी बहुत कुछ है देखने के लिए
टाइगर रिजर्व प्रशासन अपने पर्यटकों को जंगल की सैर कराने के लिए हर साल वाहनों की भी व्यवस्था करता है। प्रत्येक वाहन पर एक गाइड भी रहता है। टाइगर रिजर्व के जंगल में 65 से अधिक बाघ हैं। इनके अलावा तेंदुए, हिरन, गुलदार, भालू, पांडा, नीलगाय, बारहसिंघा, सेही, अजगर, जंगली बिल्ली, लोमड़ी आदि पाए जाते हैं। हिरन की कई प्रजातियां हैं। इनके अलावा कई तरह के पक्षी भी हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या पर्यटकों को यहां आकर्षित करने के लिए काफी है। महोफ रेंज का इंटरपिटेशन सेंटर और सेल्फी प्वाइंट भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां सप्तसरोवर, बाइफरकेशन, भीमताल भी अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध हैं।
गोमती उद्गम स्थल का धार्मिक महत्व
अवधनगरी लखनऊ को अपनी हिलोरों से पावन स्पर्श कराने वाली गोमती नदी का उद्गम स्थल भी पीलीभीत के माधोटांडा में हैं। पीलीभीत मुख्यालय से गोमती उद्गम स्थल की दूरी 30 किलोमीटर है। खूबसूरत धार्मिक स्थलों में शुमार गोमती उद्गम स्थल पर तीन झीलें हैं। इन झीलों में 17 दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। बाबा दुर्गानाथ का मंदिर भी यहीं पर है। स्थानीय प्रशासन ने यहां ट्री हट समेत पार्क का निर्माण कराया है। यहां आने वाले अधिकतर पर्यटक गोमती उद्गम स्थल की छटा निहारने अवश्य पहुंचते हैं।
प्राचीन धरोहर है गौरीशंकर मंदिर
शहर का गौरीशंकर मंदिर जनपद की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है। गौरीशंकर मंदिर में एक विशेष शिवलिंग स्थापित है। इसकी खास बात यह है कि एक ही शिवलिंग में भगवान शिव और गौरी की प्रतिमा बनी हुई है। प्राचीन मंदिर के दो मुख्य द्वारों का निर्माण हाफिज रहमत खां ने करवाया था। इसलिए यह मंदिर हिंदू मुस्लिम धार्मिक एकता की मिसाल भी है।
दिल्ली की तर्ज पर यहां भी जामा मस्जिद
शहर की जामा मस्जिद का निर्माण भी हाफिज रहमत खां ने वर्ष 1769 में कराया था। पीलीभीत की जामा मस्जिद दिल्ली की शाही जामा मस्जिद की तर्ज पर बनी हुई है। मस्जिद में एक सूर्य घड़ी भी है। जामा मस्जिद में की गई नक्कासी, मुख्यद्वार और इसके तीन गुंबद उसकी भव्यता दर्शाने के लिए काफी हैं।
बीसलपुर में भी हैं कई धार्मिक और पर्यटन स्थल
बीसलपुर तहसील क्षेत्र में गांव इलाबांस देवल के देवी मंदिर, गांव पसगंवा के जलाशय और गांव लिलहर के शिव सरोवर बेहतरीन पर्यटन स्थल हैं। इलाबांस देवल के देवी मंदिर की एक दीवार पर अपठनीय भाषा भी लिखी हुई है। यह इतनी प्राचीन भाषा है, जिसे कोई नहीं पढ़ पाया। गांव पसगवां के जलाशय में प्रत्येक वर्ष सर्दी के मौसम में बड़ी संख्या में साइबेरियन पक्षी आते हैं। गांव लिलहर के शिव मंदिर और सरोवर को प्रत्येक अमावस्या पर बाहर से पर्यटक देखने आते हैं। जनपद मुख्यालय से इलाबास देवल की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है।

कैसे पहुंचे पीलीभीत
पीलीभीत आने का साधन रोडवेज बस, निजी वाहन या फिर ट्रेन है। विभिन्न राज्य के कई शहरों जैसे बरेली, लखनऊ, आगरा, प्रयागराज के लिए नियमित रूप से ट्रेन मिलेगी। हालांकि कोरोना काल के चलते इन दिनों ट्रेनों का संचालन बंद है। ऐसे में बरेली से पीलीभीत तक रोडवेज बस या फिर निजी वाहन से एक से डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है। स्थानीय स्तर पर भी पर्यटक स्थलों पर जाने के लिए प्राइवेट वाहनों की बुकिंग कराई जा सकती है। ठहरने के लिए यहां होटल की सुविधा है।
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