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Pilibhit News: स्तनपान को प्रोत्साहित करने पर महिला अस्पताल को मिला प्रशस्तिपत्र
Sun, 06 Aug 2023 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 06 Aug 2023 11:32 PM IST
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डॉ. प्रियंका चतुर्वेदी ।
पीलीभीत। जन्म के बाद बच्चे को स्तनपान कराने के लिए मां को प्रेरित करने और उसके लाभ को बताने में महिला अस्पताल के स्टाफ का कार्य सराहनीय रहा। इसको लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से महिला जिला अस्पताल के स्टाफ को प्रशस्तिपत्र दिया गया है।
जन्म के बाद मां का दूध नवजात के लिए काफी फायदेमंद होता है। मां का पहला दूध नवजात का सुरक्षा चक्र माना गया है जो कि कई बीमारियों से बचाता है। इसको लेकर जिला महिला अस्पताल की तत्कालीन सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने महिलाओं को स्तनपान कराने के लिए जागरूक करने और लाभों की जानकारी देने के लिए टीम के साथ काम किया था।
प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को स्तनपान कराने के तौर तरीकों को बताने के लिए अलग से टीम को भी लगाया गया था। तत्कालीन सीएमएस की इस पहल की अन्य जिलों में भी सराहना हुई थी। अब इस कार्य के लिए जिला महिला अस्पताल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महिमा मित्तल और बाल स्वास्थ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. वेदप्रकाश ने संयुक्त रूप से उनको प्रशस्तिपत्र दिया है। रिटायर्ड सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने बताया इस मुहिम से कई महिलाओं को लाभ मिला था।
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फोटो 19-
शिशु के शरीर में मांं का दूध पहुंचते ही स्वाद रस का विकास होता हैं। ऐसे में छह माह तक शिशु को केवल मां का ही दूध पिलाना चाहिए। उसके बाद मां के दूध के साथ साथ थोड़ा-थोडा दाल का पानी, साबूदाना, फल के जूस आदि देना शुरू करें, साथ ही बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करते समय मां को पूरी सावधानी रखनी चाहिए। - डॉ. प्रियंका चतुर्वेदी, महिला चिकित्सक, सीएचसी पूरनपुर
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जन्म के बाद मां का दूध नवजात के लिए काफी फायदेमंद होता है। मां का पहला दूध नवजात का सुरक्षा चक्र माना गया है जो कि कई बीमारियों से बचाता है। इसको लेकर जिला महिला अस्पताल की तत्कालीन सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने महिलाओं को स्तनपान कराने के लिए जागरूक करने और लाभों की जानकारी देने के लिए टीम के साथ काम किया था।
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प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं को स्तनपान कराने के तौर तरीकों को बताने के लिए अलग से टीम को भी लगाया गया था। तत्कालीन सीएमएस की इस पहल की अन्य जिलों में भी सराहना हुई थी। अब इस कार्य के लिए जिला महिला अस्पताल को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. महिमा मित्तल और बाल स्वास्थ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. वेदप्रकाश ने संयुक्त रूप से उनको प्रशस्तिपत्र दिया है। रिटायर्ड सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने बताया इस मुहिम से कई महिलाओं को लाभ मिला था।
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शिशु के शरीर में मांं का दूध पहुंचते ही स्वाद रस का विकास होता हैं। ऐसे में छह माह तक शिशु को केवल मां का ही दूध पिलाना चाहिए। उसके बाद मां के दूध के साथ साथ थोड़ा-थोडा दाल का पानी, साबूदाना, फल के जूस आदि देना शुरू करें, साथ ही बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करते समय मां को पूरी सावधानी रखनी चाहिए। - डॉ. प्रियंका चतुर्वेदी, महिला चिकित्सक, सीएचसी पूरनपुर