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Pilibhit News: आर्टिफिशियल आभूषण बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
Sat, 17 Jan 2026 12:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 17 Jan 2026 12:48 AM IST
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घर पर आभूषण तैयार कर रही शालिनी देवी। स्रोत विभाग।
- फोटो : 1
पीलीभीत। आर्टिफिशियल आभूषण बनाकर महिलाएं खुद की आर्थिकी सुधार रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं यह महिलाएं खुद तो आत्मनिर्भर बन ही रहीं, अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। इस काम से जिले के मरौरी और पूरनपुर ब्लॉक के दो समूहों की करीब 20 महिलाएंं जुड़ी हैं। इनमें से करीब सात महिलाएं काम को अधिक समय दे रहीं और प्रतिमाह आठ से 10 हजार रुपये की घर बैठे कमाई कर रही हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन स्तर से कई योजनाएं संचालित हैं। स्वरोजगार के मौके भी मुहैया कराए जा रहे हैं। एनआरएलएम की ओर से गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बेहतर काम कर मिसाल भी कायम कर रही हैं। जिले के मरौरी और पूरनपुर ब्लॉक क्षेत्र की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी मंजू, अनीता, शालिनी, प्रीती और पूजा आदि महिलाएं आर्टिफिशियल ज्वेलरी बना रही हैं। इन आभूषणों की बिक्री भी खुद ही करती हैं। साथ ही ऑर्डर पर भी आभूषण तैयार कर रही हैं। इस काम से होने वाली आय से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
दिल्ली व बरेली से आता है कच्चा माल, घरों में बनते आभूषण
अनीता, पूजा आदि महिलाओं ने बताया कि आर्टिफिशियल आभूषण तैयार करने के लिए दिल्ली व बरेली जाकर कच्चा माल लाती हैं। इसके बाद घर पर ही आभूषण तैयार किया जाता है। एक आभूषण को तैयार करने में करीब चार से पांच दिनों का समय लग रहा है। इसके बाद इन्हें दुकानों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
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घर बैठे पांच से दस हजार रुपये महीने की कमाई
आभूषण बनाकर बेचने से महिलाओं को अच्छी आय हो रही है। आभूषणों को बेचने के बाद इसके निर्माण पर आने वाली लागत निकालकर महिलाएं प्रतिमाह माह पांच से 10 हजार रुपये की बचत कर रही हैं। इसके साथ ही आर्डर पर तैयार करने वाले आभूषणों पर और अधिक बचत हो रही है।
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महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन स्तर से कई योजनाएं संचालित हैं। स्वरोजगार के मौके भी मुहैया कराए जा रहे हैं। एनआरएलएम की ओर से गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बेहतर काम कर मिसाल भी कायम कर रही हैं। जिले के मरौरी और पूरनपुर ब्लॉक क्षेत्र की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी मंजू, अनीता, शालिनी, प्रीती और पूजा आदि महिलाएं आर्टिफिशियल ज्वेलरी बना रही हैं। इन आभूषणों की बिक्री भी खुद ही करती हैं। साथ ही ऑर्डर पर भी आभूषण तैयार कर रही हैं। इस काम से होने वाली आय से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
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दिल्ली व बरेली से आता है कच्चा माल, घरों में बनते आभूषण
अनीता, पूजा आदि महिलाओं ने बताया कि आर्टिफिशियल आभूषण तैयार करने के लिए दिल्ली व बरेली जाकर कच्चा माल लाती हैं। इसके बाद घर पर ही आभूषण तैयार किया जाता है। एक आभूषण को तैयार करने में करीब चार से पांच दिनों का समय लग रहा है। इसके बाद इन्हें दुकानों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
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घर बैठे पांच से दस हजार रुपये महीने की कमाई
आभूषण बनाकर बेचने से महिलाओं को अच्छी आय हो रही है। आभूषणों को बेचने के बाद इसके निर्माण पर आने वाली लागत निकालकर महिलाएं प्रतिमाह माह पांच से 10 हजार रुपये की बचत कर रही हैं। इसके साथ ही आर्डर पर तैयार करने वाले आभूषणों पर और अधिक बचत हो रही है।