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Pilibhit News: गैस सिलिंडर मिला नहीं तो वर्षों बाद लौटी चूल्हे में आंच
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जहानाबाद कस्बे के मोहल्ला सादात के घर में निकाल कर रखा गया खाली सिलिंडर संवाद
पीलीभीत। ईरान-अमेरिका और इस्राइल युद्ध की आग से रसोई गैस की लौ धीमी हो गई है। गैस सिलिंडर मिला नहीं तो वर्षों बाद चूल्हे में आंच लौटी है। ग्रामीण इलाके में सिलिंडर की दोबारा बुकिंग के बीच का अंतर 45 दिन हो जाने से मुश्किलें बढ़ गईं हैं। गांवों में घरों में चूल्हे पर खाना पकने लगा है। कस्बों में भी लकड़ी और कोयले की आंच में पकवान बन रहे हैं। उधर, होटल और पटरी दुकानदारों का काम भी लकड़ी और कोयले की भट्ठी-चूल्हे से चल रहा है।
जिले में करीब 30 लाख आबादी है। घरेलू गैस के 4.68 लाख उपभोक्ता हैं। कामर्शियल उपभोक्ताओं की संख्या छह सौ से अधिक है। इनमें उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं का आंकड़ा भी दो लाख से अधिक है। युद्ध के चलते कामर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलिंडर की बुकिंग का समय 25 से 45 दिन कर दिया गया है। गैस न मिलने से वर्षों बाद मिट्टी के चूल्हों में आंच लौटी है। एजेंसियों के चक्कर काटने के बाद लोगों ने खाली सिलिंडर एक कोने में रख लकड़ी व कोयले के इंतजाम में जुट गए हैं। (संवाद)
कोने में रखा सिलिंंडर, चूल्हे ने पकड़ी आग
जहानाबाद कस्बे के मोहल्ला सादात निवासी असलम के घर की रसोई गैस चार दिन पहले खत्म हो गई। एजेंसी पहुंचे तो पता चला कि सिलिंडर की बुकिंग 45 दिन बाद होगी। मोहल्ले के कई लोगों से उनकी गैस कनेक्शन की किताब मांगी, लेकिन बात नहीं बनी। अब असलम के घर मेें मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर खाना बन रहा है। जहानाबाद में ही एक होटल संचालक ने चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
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खाना चूल्हे पर, इमरजेंसी के लिए रखा सिलिंडर
ग्रामीण इलाके में कई परिवारों ने रसोई गैस का उपयोग कम कर दिया है। खाना तो चूल्हे पर बन रहा है। चाय बनाने, मेहमान आने या अन्य स्थितियों पर ही सिलिंडर का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सिलिंडर की दोबारा बुकिंग 45 दिन बाद होगी। नियमित प्रयोग से पांच सदस्यों वाले परिवार में एक सिलिंडर एक माह या उससे कुछ अधिक समय तक ही चलता है।
लकड़ी और कोयले में लगी महंगाई की आग
कामर्शियल गैस की किल्लत बढ़ी तो लकड़ी और कोयले के भाव ने तेजी पकड़ ली। लकड़ी का भाव तीन से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं कोयले का भाव दो हजार रुपये से अधिक बढ़ गया है। अधिकांश दुकानदार लकड़ी और कोयला जलाकर भट्ठी पर चाय-समोसा, मिठाई, खाना और अन्य खाद्य वस्तुएं बना रहे हैं।
ग्रामीण इलाके में गैस बुकिंग का समय 45 दिन तय किया गया है। जिले में रसोई गैस की उपलब्धता है। खपत के सापेक्ष 20 प्रतिशत कामर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति के संबंध में निर्देश जारी हुए हैं। इस संबंध में पूर्ति निरीक्षकों से सूची बनवाई जा रही है।- विकास कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
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जिले में करीब 30 लाख आबादी है। घरेलू गैस के 4.68 लाख उपभोक्ता हैं। कामर्शियल उपभोक्ताओं की संख्या छह सौ से अधिक है। इनमें उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं का आंकड़ा भी दो लाख से अधिक है। युद्ध के चलते कामर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गैस सिलिंडर की बुकिंग का समय 25 से 45 दिन कर दिया गया है। गैस न मिलने से वर्षों बाद मिट्टी के चूल्हों में आंच लौटी है। एजेंसियों के चक्कर काटने के बाद लोगों ने खाली सिलिंडर एक कोने में रख लकड़ी व कोयले के इंतजाम में जुट गए हैं। (संवाद)
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कोने में रखा सिलिंंडर, चूल्हे ने पकड़ी आग
जहानाबाद कस्बे के मोहल्ला सादात निवासी असलम के घर की रसोई गैस चार दिन पहले खत्म हो गई। एजेंसी पहुंचे तो पता चला कि सिलिंडर की बुकिंग 45 दिन बाद होगी। मोहल्ले के कई लोगों से उनकी गैस कनेक्शन की किताब मांगी, लेकिन बात नहीं बनी। अब असलम के घर मेें मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर खाना बन रहा है। जहानाबाद में ही एक होटल संचालक ने चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है।
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खाना चूल्हे पर, इमरजेंसी के लिए रखा सिलिंडर
ग्रामीण इलाके में कई परिवारों ने रसोई गैस का उपयोग कम कर दिया है। खाना तो चूल्हे पर बन रहा है। चाय बनाने, मेहमान आने या अन्य स्थितियों पर ही सिलिंडर का उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सिलिंडर की दोबारा बुकिंग 45 दिन बाद होगी। नियमित प्रयोग से पांच सदस्यों वाले परिवार में एक सिलिंडर एक माह या उससे कुछ अधिक समय तक ही चलता है।
लकड़ी और कोयले में लगी महंगाई की आग
कामर्शियल गैस की किल्लत बढ़ी तो लकड़ी और कोयले के भाव ने तेजी पकड़ ली। लकड़ी का भाव तीन से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं कोयले का भाव दो हजार रुपये से अधिक बढ़ गया है। अधिकांश दुकानदार लकड़ी और कोयला जलाकर भट्ठी पर चाय-समोसा, मिठाई, खाना और अन्य खाद्य वस्तुएं बना रहे हैं।
ग्रामीण इलाके में गैस बुकिंग का समय 45 दिन तय किया गया है। जिले में रसोई गैस की उपलब्धता है। खपत के सापेक्ष 20 प्रतिशत कामर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति के संबंध में निर्देश जारी हुए हैं। इस संबंध में पूर्ति निरीक्षकों से सूची बनवाई जा रही है।- विकास कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी

जहानाबाद कस्बे के मोहल्ला सादात के घर में निकाल कर रखा गया खाली सिलिंडर संवाद

जहानाबाद कस्बे के मोहल्ला सादात के घर में निकाल कर रखा गया खाली सिलिंडर संवाद