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महोफ रेंज में पहुंचे हाथी, रात में जंगल से बाहर निकलकर फसल को किया तहस नहस

Sun, 05 Sep 2021 01:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:05 AM IST
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wild animal
पीलीभीत। दुधवा नेशनल पार्क की ओर से वापस लौटे नेपाली हाथियों ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की पिछले एक माह से मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कभी उत्तराखंड के जंगल तो कभी पीटीआर के जंगल में हाथियों का उत्पात जारी है। शुक्रवार की रात जंगल से निकल हाथियों ने गन्ना की फसल को तहस नहस कर दिया। हालांकि हाथी अभी महोफ रेंज में डेरा जमाए हुए हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की ओर से जनपद की सीमा नेपाली हाथियों ने प्रवेश किया था। इसके बाद आठ अगस्त को हाथियों का झुंड ने महोफ रेंज में लालपुल के निकट खटीमा हाईवे पर डेरा जमा लिया था। कड़ी मशक्कत के बाद वनकर्मियों ने हाथियों को उत्तराखंड की सुरई रेंज की ओर खदेड़ दिया। तीन दिन के बाद हाथियों फिर महोफ रेंज में लौट आए। इसके बाद निगरानी मे जुटी वनकर्मियों की टीम ने इन्हें खदेड़ने की कोशिश की, मगर हाथी 15 अगस्त को माला रेंज में आ गए। इससे वनकर्मियों की मुश्किलें और बढ़ गई। हाथियों का झुंड माला रेलवे स्टेशन के निकट डेरा जमाए रहा। इनको खदेड़ने के लिए पीटीआर प्रशासन की ओर से चार टीमें बनाई गईं थी। कई दिनों की मशक्कत के बाद हाथियों का झुंड फिर उत्तराखंड की सुरई रेंज में चला गया है। इसके बाद दो दिन पहले उत्तराखंड की सुरई रेंज से लौटे हाथी महोफ रेंज में डेरा जमाए हुए है। शुक्रवार की रात जंगल से निकले हाथियों ने पंडरी गांव के पास किसानों की गन्ने की फसल को तहस नहस कर दिया है। इससे किसान परेशान है। वन दारोगा शेर सिंह ने बताया कि हाथी महोफ रेंज के जंगल में है। हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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हाथियों को वापस नहीं भेजा गया, तो होगा आंदोलन
पीलीभीत। हाथियों द्वारा फसल को तहस नहस करने की सूचना पर पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने मौके पर जाकर फसल को देखा। पूर्व मंत्री ने कहा कि जनपद में पिछले 25 दिनों से लगातार जंगली हाथियों का आतंक कायम है। सैकड़ों एकड़ गन्ने और धान की फसल बर्बाद कर चुके हैं। प्रशासन, वन विभाग और सरकार में बैठे हुए सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि आंखों पर पट्टी बांध कर, किसानों की बर्बाद को नजरअंदाज कर रहे हैं। महोफ रेंज पहुंचकर पीटीआर के बात की। पूर्व मंत्री ने कहा कि अगर एक्सपर्ट बुलाकर जल्द से जल्द हाथियों के झुंड को क्षेत्र से बाहर नहीं किया, तो कई दर्जन गांव के सभी पीड़ित क्षेत्रवासी उग्र धरना-प्रदर्शन कर अपनी बात मनवाने के लिए मजबूर करेंगे।
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