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कलीनगर तहसील में नहीं है कोई राजकीय डिग्री कॉलेज- बेटियों की पढ़ाई अधूरी, सपने कैसे हों पूरे
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परीक्षा केंद्र से बाहर निकली छात्राएं।
- फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। अवसर मिलते हैं तो महिलाएं भी हर क्षेत्र में आगे निकलती हैं और अपना तथा अपने परिवार का नाम रोशन करती हैं लेकिन बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां शिक्षण संस्थाएं न होने से छात्राओं के सपने टूट रहे हैं। ऐसा ही क्षेत्र है कलीनगर तहसील। यहां राजकीय महाविद्यालय का अभाव है। ऐसे में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए बीस से तीस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। साथ अतिरिक्त खर्च भी वहन करना होता है।
कलीनगर तहसील में 170 गांव हैं। इंटरमीडिएट के बाद बेटे बेटियों की पढ़ाई के लिए कोई राजकीय डिग्री कॉलेज नहीं है। एक निजी डिग्री कॉलेज है लेकिन वहां की फीस देना और सबका पढ़ना लिखना आसान काम नहीं है। इसलिए कई बेटियां इंटरमीडिएट के बाद घर बैठ जातीं हैं। इन छात्राओं का कहना है कि उनमें पढ़कर देश का नाम रोशन करने की ललक है, लेकिन उसके लिए बेहतर शिक्षा सुविधाओं की जरूरत है। इससे जनप्रतिनिधि और सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
इस इलाके की छात्राओं को होती है अधिक परेशानी
तहसील क्षेत्र के तराई इलाके के गांव सिमरा, धुरिया पलिया, मझारा, पुरैना, रमनगरा, गभिया सहराई समेत गांव की रहनी वाली छात्राओं को स्नातक की शिक्षा के लिए तीस किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। मार्ग के बीच में जंगल क्षेत्र होने के चलते समस्या और भी बढ़ जाती है। इसके चलते अभिभावक भी इंटर तक की शिक्षा पूरी करवा कर चुप बैठ जाते हैं।
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ग्राम पंचायत के पास पर्याप्त भूमि, मंजूरी का इंतजार
ग्राम पंचायत माधोटांडा समेत लगभग अन्य पंचायतों में डिग्री कॉलेज बनाने के लिए पर्याप्त भूमि है। क्षेत्रीय जनता छात्राओं का भविष्य बनाने के लिए डिग्री कॉलेज की मांग भी करती आ रही है पर जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया।
बोली छात्राएं- शिक्षा में सुविधा के बजाय झेलनी पड़ रही दिक्कतें
तराई क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज न होने से हम लोगों को 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद काफी समस्या आती है। तीस से चालीस किलोमीटर की दूरी तय कर पूरनपुर जाना पड़ता है। शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए डिग्री कॉलेज होना बहुत जरूरी है। - मोनिका विश्वास, गभिया सहराई
पूरनपुर की दूरी चालीस किलोमीटर है। 12वीं की शिक्षा में मेरे सत्तर प्रतिशत अंक आए। स्नातक की पढ़ाई के लिए क्षेत्र में एक भी शिक्षण संस्थान नहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में लंबी दूरी तय करना पड़ती है। मेरी कई सहेलियां मजबूरी में पढ़ाई छोड़ भी चुकी हैं। - ईशा सरकार
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कलीनगर तहसील में 170 गांव हैं। इंटरमीडिएट के बाद बेटे बेटियों की पढ़ाई के लिए कोई राजकीय डिग्री कॉलेज नहीं है। एक निजी डिग्री कॉलेज है लेकिन वहां की फीस देना और सबका पढ़ना लिखना आसान काम नहीं है। इसलिए कई बेटियां इंटरमीडिएट के बाद घर बैठ जातीं हैं। इन छात्राओं का कहना है कि उनमें पढ़कर देश का नाम रोशन करने की ललक है, लेकिन उसके लिए बेहतर शिक्षा सुविधाओं की जरूरत है। इससे जनप्रतिनिधि और सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
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इस इलाके की छात्राओं को होती है अधिक परेशानी
तहसील क्षेत्र के तराई इलाके के गांव सिमरा, धुरिया पलिया, मझारा, पुरैना, रमनगरा, गभिया सहराई समेत गांव की रहनी वाली छात्राओं को स्नातक की शिक्षा के लिए तीस किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। मार्ग के बीच में जंगल क्षेत्र होने के चलते समस्या और भी बढ़ जाती है। इसके चलते अभिभावक भी इंटर तक की शिक्षा पूरी करवा कर चुप बैठ जाते हैं।
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ग्राम पंचायत के पास पर्याप्त भूमि, मंजूरी का इंतजार
ग्राम पंचायत माधोटांडा समेत लगभग अन्य पंचायतों में डिग्री कॉलेज बनाने के लिए पर्याप्त भूमि है। क्षेत्रीय जनता छात्राओं का भविष्य बनाने के लिए डिग्री कॉलेज की मांग भी करती आ रही है पर जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया।
बोली छात्राएं- शिक्षा में सुविधा के बजाय झेलनी पड़ रही दिक्कतें
तराई क्षेत्र में एक भी डिग्री कॉलेज न होने से हम लोगों को 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद काफी समस्या आती है। तीस से चालीस किलोमीटर की दूरी तय कर पूरनपुर जाना पड़ता है। शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए डिग्री कॉलेज होना बहुत जरूरी है। - मोनिका विश्वास, गभिया सहराई
पूरनपुर की दूरी चालीस किलोमीटर है। 12वीं की शिक्षा में मेरे सत्तर प्रतिशत अंक आए। स्नातक की पढ़ाई के लिए क्षेत्र में एक भी शिक्षण संस्थान नहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में लंबी दूरी तय करना पड़ती है। मेरी कई सहेलियां मजबूरी में पढ़ाई छोड़ भी चुकी हैं। - ईशा सरकार